29 अक्टूबर 2026
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जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने 8 मंत्रियों को सौंपे विभाग, सीएम के पास रहेंगे शेष महकमे

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जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने 8 मंत्रियों को सौंपे विभाग, सीएम के पास रहेंगे शेष महकमे

सारांश

शपथ के ठीक अगले दिन जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक्शन मोड अपना लिया — एलजी मनोज सिन्हा के आदेश से 8 मंत्रियों को विभाग मिल गए। डिप्टी सीएम चौधरी के पास सड़क, उद्योग और रोजगार; बाकी अनावंटित विभाग मुख्यमंत्री के पास। असली परीक्षा अब वादों को ज़मीन पर उतारने की है।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के 8 मंत्रियों को विभाग आवंटित किए।
उप मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को PWD, उद्योग एवं वाणिज्य, श्रम एवं रोजगार और कौशल विकास विभाग मिले।
अली मोहम्मद सागर को राजस्व, ऊर्जा, कानून, आपदा प्रबंधन और चुनाव विभाग सौंपे गए।
जावेद अहमद डार को कृषि उत्पादन, वित्त, खनन और सहकारिता विभाग मिले।
जो विभाग किसी मंत्री को आवंटित नहीं हुए, वे मुख्यमंत्री के पास रहेंगे।
शपथ ग्रहण के एक दिन बाद ही विभाग आवंटन, नई सरकार की त्वरित कार्यशैली का संकेत।

जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28 अक्टूबर 2026 को शपथ ग्रहण के ठीक एक दिन बाद नई सरकार के सभी 8 मंत्रियों को विभागों का आवंटन कर दिया। आधिकारिक आदेश के अनुसार, जो विभाग किसी मंत्री को नहीं सौंपे गए हैं, वे मुख्यमंत्री के पास ही रहेंगे। इस कदम से स्पष्ट है कि नई सरकार ने बिना समय गँवाए प्रशासनिक कार्यप्रणाली को गति देने का संकेत दिया है।

उप मुख्यमंत्री को मिले सबसे अहम विभाग

उप मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को सरकार के सर्वाधिक महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंपी गई है। उन्हें लोक निर्माण (सड़क एवं भवन) विभाग, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, श्रम एवं रोजगार विभाग और कौशल विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। सड़क, उद्योग और रोजगार जैसे सीधे जन-जीवन से जुड़े क्षेत्रों का प्रभार मिलने से उप मुख्यमंत्री की भूमिका इस सरकार में विशेष रूप से प्रभावशाली मानी जा रही है।

वरिष्ठ मंत्रियों को मिले राजस्व, ऊर्जा और कृषि के महकमे

वरिष्ठ मंत्री अली मोहम्मद सागर को राजस्व विभाग, ऊर्जा विकास विभाग, कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य विभाग, आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग और चुनाव विभाग सौंपे गए हैं। जावेद अहमद डार को कृषि उत्पादन विभाग, वित्त विभाग, खनन विभाग और सहकारिता विभाग जैसे आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग मिले हैं। गौरतलब है कि वित्त और कृषि एक साथ एक ही मंत्री के अधीन रखना प्रशासनिक समन्वय की दृष्टि से एक उल्लेखनीय निर्णय है।

जावेद अहमद राणा को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। जनजातीय कार्य विभाग जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की बड़ी आबादी अनुसूचित जनजाति वर्ग से आती है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण में महिला व युवा नेतृत्व

सकीना मसूद (इटू) को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग सौंपा गया है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील एवं व्यापक महकमे का प्रभार उन पर बड़ी जिम्मेदारी डालता है।

शमीमा फिरदौस को स्कूली शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और जल शक्ति विभाग आवंटित किए गए हैं। शिक्षा के दोनों बड़े स्तंभों को एक ही मंत्री के पास रखने से नीतिगत समन्वय सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

अल्ताफ अहमद वानी को वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए पर्यावरण और ग्रामीण विकास दोनों विभाग यहाँ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

मीर सैफुल्लाह को योजना, विकास एवं निगरानी विभाग, संस्कृति विभाग, युवा सेवा एवं खेल विभाग और प्रशासनिक सुधार, निरीक्षण एवं प्रशिक्षण विभाग सौंपा गया है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में लंबे अंतराल के बाद निर्वाचित सरकार सत्ता में आई है। विभागों के स्पष्ट आवंटन से प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है। नागरिकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादे — रोजगार, बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य और शिक्षा — कितनी तेज़ी से ज़मीनी स्तर पर उतरते हैं।

क्या होगा आगे

विभागों के बँटवारे के साथ ही अब सभी मंत्रियों के सामने अपने-अपने महकमों में कामकाज की शुरुआत करने और वादों को कार्यरूप देने की चुनौती है। जम्मू-कश्मीर की विशेष भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच नई सरकार के पहले कुछ महीने उसकी प्राथमिकताओं और कार्यशैली की असली कसौटी होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह नहीं है कि विभाग किसे मिले — बल्कि यह है कि उन्हें चलाया कैसे जाएगा। जम्मू-कश्मीर दशकों से शासन की निरंतरता की कमी झेल रहा है, और नई निर्वाचित सरकार के सामने उपराज्यपाल के अधिकार-क्षेत्र की संवैधानिक सीमाओं के बीच काम करने की चुनौती बनी रहेगी। वित्त और कृषि एक ही मंत्री के पास होना समन्वय की दृष्टि से सकारात्मक है, परंतु यह भी देखना होगा कि कितने विभाग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में केंद्रित रहते हैं — जो शक्ति-संतुलन का एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण संकेतक होगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में मंत्रियों को विभाग किसने आवंटित किए?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर जम्मू-कश्मीर के सभी 8 मंत्रियों को उनके विभाग सौंपे। जो विभाग किसी मंत्री को नहीं दिए गए, वे मुख्यमंत्री के अधीन रहेंगे।
उप मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को कौन-से विभाग मिले हैं?
उप मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को लोक निर्माण (सड़क एवं भवन), उद्योग एवं वाणिज्य, श्रम एवं रोजगार और कौशल विकास विभाग सौंपे गए हैं। ये जम्मू-कश्मीर के विकास और रोजगार के लिहाज से सबसे अहम विभाग माने जाते हैं।
जावेद अहमद डार को कौन-से महत्वपूर्ण विभाग मिले?
जावेद अहमद डार को कृषि उत्पादन, वित्त, खनन और सहकारिता विभाग सौंपे गए हैं। वित्त और कृषि जैसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण विभागों का एक ही मंत्री के पास होना नीतिगत समन्वय की दृष्टि से उल्लेखनीय है।
जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग किसके पास हैं?
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा और समाज कल्याण विभाग सकीना मसूद (इटू) को सौंपे गए हैं। स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और जल शक्ति विभाग शमीमा फिरदौस के पास हैं।
जम्मू-कश्मीर की नई सरकार के सामने अब क्या चुनौतियाँ हैं?
विभागों के बँटवारे के बाद अब मंत्रियों के सामने अपने-अपने महकमों में तत्काल काम शुरू करने और चुनावी वादों को लागू करने की ज़िम्मेदारी है। जम्मू-कश्मीर की विशेष भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों के बीच नई सरकार के शुरुआती महीने उसकी कार्यक्षमता की वास्तविक परीक्षा होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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