जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने 8 मंत्रियों को सौंपे विभाग, सीएम के पास रहेंगे शेष महकमे
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28 अक्टूबर 2026 को शपथ ग्रहण के ठीक एक दिन बाद नई सरकार के सभी 8 मंत्रियों को विभागों का आवंटन कर दिया। आधिकारिक आदेश के अनुसार, जो विभाग किसी मंत्री को नहीं सौंपे गए हैं, वे मुख्यमंत्री के पास ही रहेंगे। इस कदम से स्पष्ट है कि नई सरकार ने बिना समय गँवाए प्रशासनिक कार्यप्रणाली को गति देने का संकेत दिया है।
उप मुख्यमंत्री को मिले सबसे अहम विभाग
उप मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को सरकार के सर्वाधिक महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंपी गई है। उन्हें लोक निर्माण (सड़क एवं भवन) विभाग, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, श्रम एवं रोजगार विभाग और कौशल विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। सड़क, उद्योग और रोजगार जैसे सीधे जन-जीवन से जुड़े क्षेत्रों का प्रभार मिलने से उप मुख्यमंत्री की भूमिका इस सरकार में विशेष रूप से प्रभावशाली मानी जा रही है।
वरिष्ठ मंत्रियों को मिले राजस्व, ऊर्जा और कृषि के महकमे
वरिष्ठ मंत्री अली मोहम्मद सागर को राजस्व विभाग, ऊर्जा विकास विभाग, कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य विभाग, आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग और चुनाव विभाग सौंपे गए हैं। जावेद अहमद डार को कृषि उत्पादन विभाग, वित्त विभाग, खनन विभाग और सहकारिता विभाग जैसे आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग मिले हैं। गौरतलब है कि वित्त और कृषि एक साथ एक ही मंत्री के अधीन रखना प्रशासनिक समन्वय की दृष्टि से एक उल्लेखनीय निर्णय है।
जावेद अहमद राणा को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। जनजातीय कार्य विभाग जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की बड़ी आबादी अनुसूचित जनजाति वर्ग से आती है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण में महिला व युवा नेतृत्व
सकीना मसूद (इटू) को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग सौंपा गया है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील एवं व्यापक महकमे का प्रभार उन पर बड़ी जिम्मेदारी डालता है।
शमीमा फिरदौस को स्कूली शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और जल शक्ति विभाग आवंटित किए गए हैं। शिक्षा के दोनों बड़े स्तंभों को एक ही मंत्री के पास रखने से नीतिगत समन्वय सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
अल्ताफ अहमद वानी को वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए पर्यावरण और ग्रामीण विकास दोनों विभाग यहाँ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
मीर सैफुल्लाह को योजना, विकास एवं निगरानी विभाग, संस्कृति विभाग, युवा सेवा एवं खेल विभाग और प्रशासनिक सुधार, निरीक्षण एवं प्रशिक्षण विभाग सौंपा गया है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में लंबे अंतराल के बाद निर्वाचित सरकार सत्ता में आई है। विभागों के स्पष्ट आवंटन से प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है। नागरिकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादे — रोजगार, बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य और शिक्षा — कितनी तेज़ी से ज़मीनी स्तर पर उतरते हैं।
क्या होगा आगे
विभागों के बँटवारे के साथ ही अब सभी मंत्रियों के सामने अपने-अपने महकमों में कामकाज की शुरुआत करने और वादों को कार्यरूप देने की चुनौती है। जम्मू-कश्मीर की विशेष भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच नई सरकार के पहले कुछ महीने उसकी प्राथमिकताओं और कार्यशैली की असली कसौटी होंगे।