योगी सरकार ने नए मंत्रियों को सौंपे विभाग: भूपेंद्र चौधरी को MSME, कैलाश राजपूत को ऊर्जा मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने रविवार रात मंत्रिमंडल विस्तार के करीब एक सप्ताह बाद नए मंत्रियों के विभागों का औपचारिक आवंटन कर दिया। विभागों की घोषणा में हुई देरी को लेकर लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी था, जो अब थम गया है।
किसे मिला कौन-सा विभाग
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आवंटन सूची के अनुसार, भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मनोज पाण्डेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग का प्रभार दिया गया है। कैलाश सिंह राजपूत को महत्वपूर्ण ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग की कमान सौंपी गई है।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ लेने वाले अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग मिला है, जबकि सोमेन्द्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग का दायित्व सौंपा गया है। कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
राज्य मंत्रियों में सुरेन्द्र दिलेर को राजस्व विभाग से संबद्ध किया गया है, वहीं हंसराज विश्वकर्मा को MSME विभाग में सहयोगी भूमिका दी गई है।
मंत्रिमंडल विस्तार की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इससे पहले राजभवन, लखनऊ में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी, जिनमें छह नए चेहरे शामिल रहे। इस विस्तार में दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री, दो को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा चार को राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।
सामाजिक और राजनीतिक समीकरण
विभागों के आवंटन को महज प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरकार ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के साथ-साथ संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने की कोशिश की है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक पकड़ को और सुदृढ़ करने में जुटी है। विभागों के बंटवारे में एक सप्ताह की देरी को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के भीतर अंतर्विरोध की अटकलें लगाई थीं, हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई।
आगे क्या
विभाग मिलने के बाद अब सभी नए मंत्री अपने-अपने मंत्रालयों का कार्यभार औपचारिक रूप से संभालेंगे। नए मंत्रियों के सामने अपने-अपने विभागों में प्राथमिकताएँ तय करने और योगी सरकार की नीतियों को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी।