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दिल्ली बंधक नहीं बनने देंगे: सीएम रेखा गुप्ता का राहुल-केजरीवाल पर निशाना, 1,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

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दिल्ली बंधक नहीं बनने देंगे: सीएम रेखा गुप्ता का राहुल-केजरीवाल पर निशाना, 1,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

सारांश

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने राहुल गांधी और केजरीवाल को सीधे निशाने पर लिया — और पीछे नहीं हटीं। वोटर लिस्ट विवाद पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दिन 1,000 से ज़्यादा लोग हिरासत में, 30,000 जवान तैनात और 45 मेट्रो स्टेशन बंद — यह दिल्ली की सड़क-राजनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने 10 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी , अरविंद केजरीवाल और सीजेपी पर दिल्ली में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया।
अधिकारियों के अनुसार 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन वोटर लिस्ट एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पर था।
30,000 से अधिक पुलिस व अर्धसैनिक जवान तैनात; 45 मेट्रो स्टेशन बंद; सेंट्रल दिल्ली में इंटरनेट सेवा निलंबित।
स्कूल, कॉलेज और अदालतें उस दिन ऑनलाइन मोड में संचालित हुईं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी (AAP) नेता अरविंद केजरीवाल और संगठन सीजेपी पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि ये नेता राजनीतिक स्वार्थ के लिए दिल्लीवासियों की शांति और सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी को किसी भी हालत में बंधक नहीं बनने दिया जाएगा। इसी बीच, अधिकारियों के अनुसार नई दिल्ली के विभिन्न इलाकों से 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

यह विरोध-प्रदर्शन सीजेपी द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की जा रही थी। आयोजकों के अनुसार इसमें विपक्षी दलों की भागीदारी भी प्रस्तावित थी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में सत्ता-परिवर्तन के बाद से राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है।

सीएम रेखा गुप्ता का कड़ा रुख

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'देशवासियों द्वारा रिजेक्टेड नेता राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल, अपनी बी-टीम सीजेपी के साथ मिलकर दिल्ली को अखाड़ा बनाना चाहते हैं। आखिर ये नेता, अपनी नॉनस्टॉप हार की खीझ, जनता पर उतारने पर क्यों तुले हैं? सड़कों पर अव्यवस्था से परेशान होने वाले दिल्लीवासियों का क्या दोष है?'

उन्होंने आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर का हवाला देते हुए सवाल उठाया, 'काम पर जाने वाले कर्मचारियों, रोज कमाकर परिवार चलाने वाले श्रमिकों और अस्पताल पहुँचने वाले मरीजों की परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या आपकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं दिल्ली के लाखों परिवारों की रोजी-रोटी, सुरक्षा और शांति से भी बड़ी हैं?'

सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत

प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए राजधानी में 30,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। जंतर-मंतर के आसपास 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए, सेंट्रल दिल्ली में इंटरनेट सेवाएँ निलंबित की गईं और सुबह 6 बजे से ट्रैफिक पर कड़ी पाबंदियाँ लागू की गईं। स्कूल, कॉलेज और अदालतें उस दिन ऑनलाइन मोड में काम करने पर मजबूर हुईं। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

राजनीतिक तनाव का व्यापक संदर्भ

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली ने विकास के लिए वोट दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार जनादेश मिला, लेकिन 'परिवारवाद और अवसरवाद से ग्रसित दल' इस जनसमर्थन को स्वीकार नहीं कर पा रहे। उन्होंने आगाह किया कि 'लोकतंत्र की आड़ में अराजकता फैलाने और जनादेश को चुनौती देने की राजनीति का डटकर मुकाबला होगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की मुहिम तेज कर रहा है।

आगे क्या होगा

हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। विपक्षी दलों ने हिरासत को 'लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला' करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उस रणनीति का हिस्सा है जो विपक्षी आंदोलनों को 'अराजकता' के रूप में परिभाषित करती है। असली सवाल यह है कि वोटर लिस्ट एसआईआर में कथित गड़बड़ियों की जाँच की माँग लोकतांत्रिक है या नहीं — इस पर सरकार ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। 45 मेट्रो स्टेशन बंद करना और इंटरनेट सेवा रोकना उन आम नागरिकों को भी प्रभावित करता है जो प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं रखते — यह विडंबना है कि जिस 'आम दिल्लीवासी' की चिंता सीएम जता रही हैं, उसे सबसे अधिक असुविधा सरकारी प्रतिबंधों से हुई।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी का दिल्ली विरोध प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
यह प्रदर्शन वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर था। सीजेपी ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था और कांग्रेस तथा AAP की भी इसमें भागीदारी बताई जा रही थी।
10 अक्टूबर को दिल्ली में कितने लोग हिरासत में लिए गए?
अधिकारियों के मुताबिक नई दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। ये लोग सीजेपी द्वारा बुलाए गए विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे।
CM रेखा गुप्ता ने राहुल गांधी और केजरीवाल पर क्या आरोप लगाए?
सीएम रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सीजेपी के साथ मिलकर दिल्ली को 'अखाड़ा' बनाना चाहते हैं और राजनीतिक स्वार्थ के लिए राजधानी की शांति भंग कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पोस्ट में इन नेताओं को 'देशवासियों द्वारा रिजेक्टेड' भी कहा।
10 अक्टूबर को दिल्ली में क्या-क्या पाबंदियाँ लागू की गईं?
जंतर-मंतर के आसपास 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, सेंट्रल दिल्ली में इंटरनेट सेवाएँ निलंबित रहीं और सुबह 6 बजे से ट्रैफिक पर कड़ी पाबंदियाँ लागू हुईं। स्कूल, कॉलेज और अदालतें उस दिन ऑनलाइन मोड में काम करने पर मजबूर हुईं और 30,000 से अधिक पुलिस व अर्धसैनिक जवान तैनात किए गए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद में क्यों हैं?
विपक्षी दलों और सीजेपी का आरोप है कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियाँ हुई हैं, जिसके चलते वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। सरकार ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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