30 अक्टूबर 2026
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राजकोट में अवैध एलपीजी रिफिलिंग रैकेट ध्वस्त: 517 सिलेंडर जब्त, 7 गिरफ्तार, 15 वांछित

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राजकोट में अवैध एलपीजी रिफिलिंग रैकेट ध्वस्त: 517 सिलेंडर जब्त, 7 गिरफ्तार, 15 वांछित

सारांश

राजकोट के नेहरू नगर में घरों और गोदामों में चल रहा अवैध एलपीजी रिफिलिंग रैकेट ध्वस्त। 517 सिलेंडर, 'रिलायंस गैस' के फर्जी स्टिकर सहित ₹11.45 लाख की संपत्ति जब्त, 7 गिरफ्तार, 15 वांछित।

मुख्य बातें

गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (SMC) ने 30 अक्टूबर 2026 को राजकोट के नेहरू नगर में 8 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
517 एलपीजी सिलेंडर (मूल्य ₹9.29 लाख ) सहित कुल ₹11,45,946 की संपत्ति जब्त।
7 आरोपी गिरफ्तार ; 15 अन्य वांछित — कई गैस एजेंसियों से जुड़े।
जब्त सामग्री में 'रिलायंस गैस' के 44 फर्जी स्टिकर , 16 रिफिलिंग पाइप , 3 वाहन और 12 इलेक्ट्रॉनिक तराजू शामिल।
22 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, आवश्यक वस्तु अधिनियम और विस्फोटक अधिनियम के तहत 2 एफआईआर दर्ज।
दो गिरफ्तार आरोपियों — मेराम चावड़ा (2015) और रमेश चावड़ा (2021) — के इसी तरह के पुराने मामले भी सामने आए।

गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (SMC) ने 30 अक्टूबर 2026 को राजकोट के नेहरू नगर इलाके में एक बड़े अवैध एलपीजी गैस रिफिलिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया, जिसमें ₹9.29 लाख मूल्य के 517 एलपीजी सिलेंडर सहित कुल ₹11,45,946 रुपए की संपत्ति जब्त की गई। भक्तिनगर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आठ स्थानों पर एक साथ की गई इस छापेमारी में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 15 अन्य आरोपी वांछित घोषित किए गए हैं।

छापेमारी का विवरण और टीमें

पुलिस महानिदेशक (DGP) जीएस मलिक के निर्देश पर पुलिस सब-इंस्पेक्टर एसवी गलचर और वीएन जडेजा की अगुआई में दो विशेष टीमें गठित की गई थीं। ये टीमें नेहरू नगर की गली नंबर 2, 4, 6, 8 और 10 में स्थित गोदामों और घरों में एक साथ उतरीं। रिहायशी इलाके के भीतर घरों और गोदामों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग की जा रही थी, जिससे दुर्घटना और जान-माल की भारी क्षति का खतरा बना हुआ था।

जब्त सामग्री और आरोपियों की पहचान

पुलिस ने 517 गैस सिलेंडर के अलावा नोजल सहित 16 रिफिलिंग पाइप, 'रिलायंस गैस' लिखे 44 स्टिकर, 48 सिलेंडर कैप, 5 इलेक्ट्रिक मोटर, 12 इलेक्ट्रॉनिक तराजू, 2 साधारण तराजू, 3 वाहन, 7 मोबाइल फोन, ₹9,170 नकद और एक स्पैनर जब्त किए।

गिरफ्तार 7 आरोपियों में हरदेव चावड़ा, मेराम चावड़ा और रमेश चावड़ा (सभी राजकोट के न्यू गोपालवंदना, गली नंबर 5 के निवासी), राकेश बिश्नोई (जोधपुर, राजस्थान), पुरन्नाथ कोरी (ढेबर रोड, राजकोट), अमित डांगर (नेहरूनगर, गली नंबर 8) और आशीष गोगारा (नेहरूनगर, गली नंबर 10) शामिल हैं।

वांछित आरोपी और एजेंसियों से संबंध

वांछित 15 आरोपियों की सूची में कई गैस एजेंसियों से जुड़े लोग शामिल हैं — जयमिन गैस एजेंसी से राजू सोलंकी और करण लावड़िया; मधुरम गैस एजेंसी से मंगाभाई और शैलेश चावड़ा; जय भीम गैस एजेंसी से अरविंद नट; तथा एजीएस पियोर गैस एजेंसी से हितेश चावड़ा। इसके अतिरिक्त, चंदूभाई राठौड़, जितेंद्र जरीवाला, धीरूभाई रायधनभाई डांगर, प्रफुल्लभाई नारणभाई डांगर, उमेशभाई प्रभातभाई बोरिचा, संजयभाई चावड़ा, संजयभाई राजपूत, राज और ताजुद्दीन भी वांछित सूची में हैं।

पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और कानूनी कार्रवाई

पुलिस जाँच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में से कम से कम दो का इसी तरह के अपराधों में पूर्व रिकॉर्ड है। मेराम चावड़ा के विरुद्ध 2015 में भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज था, जबकि रमेश गगुभाई चावड़ा के खिलाफ 2021 में राजकोट जिले के आटकोट और धोराजी पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज हुए थे। यह रैकेट कोई एकाकी घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चला आ रहा संगठित गोरखधंधा प्रतीत होता है।

30 अक्टूबर 2026 को भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में 22 आरोपियों के विरुद्ध दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं। इन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 125, 287 और 54; आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7; तथा विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9(बी)(1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आगे की कार्रवाई

राज्य निगरानी प्रकोष्ठ के अनुसार वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है। यह छापेमारी ऐसे समय में आई है जब गुजरात में डीजीपी स्तर पर अवैध गतिविधियों के विरुद्ध केंद्रित अभियान चल रहे हैं। रिहायशी इलाकों में इस प्रकार के अवैध ऑपरेशन न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी हैं, बल्कि विस्फोट और आग जैसी जानलेवा दुर्घटनाओं का स्रोत भी बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और कुछ आरोपियों के 2015 व 2021 के पुराने मामले यह बताते हैं कि पकड़े जाने के बाद भी ये रैकेट दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। सवाल यह है कि बार-बार पकड़े गए आरोपी नए रूप में काम क्यों जारी रख पाते हैं। 'रिलायंस गैस' के फर्जी स्टिकर मिलना यह भी संकेत देता है कि यह सिर्फ मात्रात्मक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि ब्रांड की आड़ में उपभोक्ताओं को ठगने का संगठित षड्यंत्र है। वांछित 15 आरोपियों में से अधिकांश की गिरफ्तारी तक यह मामला अधूरा ही रहेगा।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजकोट में अवैध एलपीजी रिफिलिंग रैकेट क्या था?
राजकोट के नेहरू नगर के रिहायशी इलाके में घरों और गोदामों के अंदर घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग की जा रही थी। 'रिलायंस गैस' के फर्जी स्टिकर लगाकर इन्हें बेचा जाता था, जो उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और विस्फोट जैसे खतरे का स्रोत था।
इस छापेमारी में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कितने वांछित हैं?
इस कार्रवाई में कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 15 अन्य आरोपियों को वांछित घोषित किया गया है। भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में 22 आरोपियों के विरुद्ध दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं।
छापेमारी में कुल कितनी संपत्ति जब्त की गई?
पुलिस ने ₹9.29 लाख मूल्य के 517 एलपीजी सिलेंडर सहित रिफिलिंग पाइप, फर्जी स्टिकर, इलेक्ट्रिक मोटर, इलेक्ट्रॉनिक तराजू, तीन वाहन और नकदी मिलाकर कुल ₹11,45,946 रुपए की संपत्ति जब्त की। यह कार्रवाई आठ अलग-अलग स्थानों पर एक साथ की गई।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 125, 287 और 54; आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7; तथा विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9(बी)(1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें से कुछ धाराएँ जान को खतरे और अवैध भंडारण से जुड़ी हैं।
क्या इस मामले में किसी आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है?
हाँ, गिरफ्तार आरोपी मेराम चावड़ा के खिलाफ 2015 में और रमेश गगुभाई चावड़ा के खिलाफ 2021 में इसी तरह के मामले दर्ज हो चुके हैं। यह दर्शाता है कि ये आरोपी पहले भी इसी अपराध में शामिल रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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