30 अक्टूबर 2026
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आगा रुहुल्लाह का बड़ा हमला: 'अब्दुल्ला परिवार ने जम्मू-कश्मीर को जागीर बनाया, 3 नवंबर को देंगे इस्तीफा'

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आगा रुहुल्लाह का बड़ा हमला: 'अब्दुल्ला परिवार ने जम्मू-कश्मीर को जागीर बनाया, 3 नवंबर को देंगे इस्तीफा'

सारांश

नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर बड़ा विस्फोट — श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्लाह ने अब्दुल्ला परिवार को 'जागीरदार' करार दिया और 3 नवंबर को पार्टी व लोकसभा सीट दोनों छोड़ने का ऐलान किया। अनुच्छेद 370, कैदियों की रिहाई और संवैधानिक अधिकार — यह टकराव महज व्यक्तिगत नहीं, वैचारिक है।

मुख्य बातें

आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 30 अक्टूबर 2026 को अब्दुल्ला परिवार पर जम्मू-कश्मीर को 'पारिवारिक जागीर' बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस की सदस्यता और श्रीनगर लोकसभा सीट से इस्तीफा देने की घोषणा की।
मुख्य माँगें — अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक कैदियों की रिहाई और जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा।
रुहुल्लाह ने 2020 में एनसी के मुख्य प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया था; 2024 के बाद से तनाव और बढ़ा।
3 नवंबर को बडगाम के बहिश्त-ए-जहरा पार्क में जनसभा का ऐलान।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के श्रीनगर सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को अब्दुल्ला परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इस परिवार ने जम्मू-कश्मीर को अपनी पारिवारिक 'जागीर' बना रखा है और जनता से किए गए वादे कभी नहीं निभाए। उन्होंने घोषणा की कि वे 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस की सदस्यता और अपनी श्रीनगर लोकसभा सीट दोनों से इस्तीफा देंगे।

एक्स पर किया तीखा वार

रुहुल्लाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'युवराज और उनका गुट जम्मू-कश्मीर को अपनी पारिवारिक जागीर मानते हैं। वे चाहते हैं कि लोग वोट दें और फिर अपनी औकात में रहें।' उनका यह बयान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला दोनों पर सीधा निशाना था।

उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर व्यंग्य करते हुए कहा, 'जब उनसे अपने ही घोषणापत्र का पालन करने के लिए कहा जाता है, तो वे हमें ही समझाने लगते हैं कि हम रियलपॉलिटिक को कितना कम समझते हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि अब्दुल्ला परिवार लोगों को इतना नासमझ समझता है कि वे यह भी न पहचान सकें कि कौन-सा वादा तोड़ा जा रहा है।

मुख्य माँगें और नैतिक आधार

रुहुल्लाह ने अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक कैदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा — इन तीन मूल मुद्दों को अपनी लड़ाई का आधार बताया। उन्होंने पवित्र कुरान की 'सूरह अल-इसरा' की आयत 17:24 का हवाला देते हुए अब्दुल्ला परिवार को याद दिलाया, 'अपने वादों को पूरा करें, क्योंकि आपसे निश्चित रूप से उनके बारे में जवाब मांगा जाएगा।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीनगर की सीट उन्होंने एक वादे के आधार पर जीती थी, और उस वादे के साथ विश्वासघात में भागीदार बनने से बेहतर है कि वे सीट छोड़ दें।

दरार कब से और क्यों

यह ऐसे समय में आया है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस और रुहुल्लाह के बीच मतभेद कोई नए नहीं हैं। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पार्टी की चुप्पी से खुद को अलग करते हुए उन्होंने 2020 में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया था।

2024 के चुनावों के बाद तनाव और गहरा हुआ जब रुहुल्लाह ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि एनसी ने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई छोड़ दी है और केवल 'राज्य का दर्जा' पाने के लिए नई दिल्ली के सामने 'भीख' मांग रही है। इसी विवाद के चरम पर फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें इस्तीफा देने की खुली चुनौती दे डाली। गौरतलब है कि रुहुल्लाह ने बडगाम उपचुनाव में प्रचार करने से भी इनकार करके पार्टी को एक और झटका दिया था।

3 नवंबर का कार्यक्रम

रुहुल्लाह ने ऐलान किया कि 3 नवंबर को वे बडगाम के 'बहिश्त-ए-जहरा पार्क' में जनसभा को संबोधित करेंगे, जहाँ वे औपचारिक रूप से अपने इस्तीफे की घोषणा करेंगे। उन्होंने लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील भी की।

उनके इस कदम के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नई उठापटक की शुरुआत हो सकती है — यह देखना बाकी है कि रुहुल्लाह अपना नया राजनीतिक मार्ग किस दिशा में तय करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उमर अब्दुल्ला सरकार अनुच्छेद 370 पर केंद्र से कोई ठोस कदम उठा पाएगी — और रुहुल्लाह का इस्तीफा उस जवाबदेही की माँग को और तेज़ करेगा।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आगा रुहुल्लाह नेशनल कॉन्फ्रेंस क्यों छोड़ रहे हैं?
आगा रुहुल्लाह का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक कैदियों की रिहाई और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के वे वादे नहीं निभाए जिनके आधार पर जनता ने मत दिया था। उन्होंने पार्टी की 'व्यावहारिक राजनीति' को वादों से विश्वासघात करार दिया।
आगा रुहुल्लाह 3 नवंबर को क्या करेंगे?
3 नवंबर को वे बडगाम के बहिश्त-ए-जहरा पार्क में जनसभा को संबोधित करेंगे और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सदस्यता तथा श्रीनगर लोकसभा सीट दोनों से औपचारिक रूप से इस्तीफा देंगे।
आगा रुहुल्लाह और अब्दुल्ला परिवार के बीच विवाद कब से है?
यह दरार अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पैदा हुई, जब रुहुल्लाह ने पार्टी की चुप्पी का विरोध किया। 2020 में उन्होंने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया और 2024 के चुनावों के बाद तनाव और गहरा हो गया।
रुहुल्लाह की मुख्य माँगें क्या हैं?
उनकी तीन मुख्य माँगें हैं — अनुच्छेद 370 की बहाली, जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक कैदियों की रिहाई, और स्थानीय जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा। इन्हीं मुद्दों को वे पार्टी के घोषणापत्र का हिस्सा बताते हैं।
रुहुल्लाह के इस्तीफे का जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
रुहुल्लाह के जाने से नेशनल कॉन्फ्रेंस को श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव का सामना करना पड़ सकता है और पार्टी के भीतर असंतोष और उभर सकता है। यह घटनाक्रम उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ाता है, खासकर अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर।
राष्ट्र प्रेस
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