दिल्ली में स्पेशल टीम ने गैस सिलेंडर की जमाखोरी का भंडाफोड़, 46 सिलेंडर जब्त किए गए
सारांश
Key Takeaways
- स्पेशल टीम ने ख्याला में गैस सिलेंडरों की जमाखोरी का भंडाफोड़ किया।
- चार आरोपी गिरफ्तार किए गए और 46 सिलेंडर जब्त किए गए।
- यह कार्रवाई अवैध रीफिलिंग के खिलाफ की गई।
- पुलिस अब गैस एजेंसियों की भूमिका की जांच कर रही है।
- आरोपी ब्लैक मार्केट में सिलेंडर बेचकर मुनाफा कमा रहे थे।
नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के पश्चिमी जिले की विशेष स्टाफ टीम ने बुधवार को ख्याला क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए एलपीजी गैस सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी और गैर-कानूनी रीफिलिंग के तीन विभिन्न यूनिट्स का भंडाफोड़ किया है।
इस संयुक्त अभियान में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और कुल 46 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए, जिनमें 20 इंडेन गैस और 26 भारत गैस के सिलेंडर शामिल हैं। इसके साथ ही मौके से तौलने की मशीनें और अवैध रीफिलिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण भी जब्त किए गए।
पुलिस के अनुसार, खाड़ी युद्ध और उसके बाद ऊर्जा आपूर्ति, विशेषकर एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव को देखते हुए जमाखोरी करने वालों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी संदर्भ में पश्चिमी जिले के विशेष स्टाफ को खुफिया जानकारी के आधार पर ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई थी। सटीक और विश्वसनीय सूचना के आधार पर ख्याला क्षेत्र में तीन विभिन्न स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इन स्थानों पर किराए के कमरों और अस्थायी शेडों में बड़ी मात्रा में गैस सिलेंडर छिपाकर रखे गए थे।
यह पूरी कार्रवाई इंस्पेक्टर राजेश मौर्य के नेतृत्व में, एसीपी ऑपरेशंस विजय सिंह की देखरेख में और वरिष्ठ अधिकारियों के समग्र पर्यवेक्षण में की गई। टीम में एएसआई ऋषि, कप्तान उमेश, मनोज त्यागी, हेड कांस्टेबल शमशेर, विजय और कांस्टेबल दिनेश शामिल थे। पुलिस ने मौके से शिवमूरत सिंह (40), रघुराज (26), अरविंद सिंह (27) और ओमपाल (37) को गिरफ्तार किया।
प्रारंभिक जांच के दौरान पता चला है कि आरोपी विभिन्न नाम और पहचान का उपयोग कर गैस एजेंसियों से एलपीजी सिलेंडर प्राप्त करते थे। उन्होंने खुलासा किया कि कुछ सिलेंडर पश्चिम विहार स्थित सनी गैस एजेंसी और राजौरी गार्डन के पास आशु गैस एजेंसी से प्राप्त किए गए थे। इन एजेंसियों और उनके कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में किराए के कमरों और अस्थायी शेडों में सिलेंडर छिपाकर रखते थे ताकि संदेह से बचा जा सके। इसके बाद वे भरे हुए सिलेंडरों से अवैध तरीके से थोड़ी-थोड़ी गैस निकालकर खाली सिलेंडरों में भरते थे, जिससे अतिरिक्त सिलेंडर तैयार कर ब्लैक मार्केट में बेचे जा सकें। ये सिलेंडर सामान्य कीमत लगभग ₹900 के बजाय ₹3,000 तक बेचे जाते थे, जिससे आरोपी भारी मुनाफा कमा रहे थे और सरकारी राजस्व को हानि पहुँचा रहे थे।
इस मामले में थाना ख्याला में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 और बीएनएस की धारा 125, 287 और 61(2) के तहत तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस अब इस पूरे रैकेट की सप्लाई चेन, इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों और गैस एजेंसियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।