दिल्ली BS-6 वाहन प्रतिबंध: 1 नवंबर से पहले बार एसोसिएशन ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र, छूट की मांग
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने 30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर 1 नवंबर 2026 से प्रस्तावित BS-6 वाहन प्रतिबंध के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मचारियों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाए ताकि न्यायिक कार्य बाधित न हो।
प्रतिबंध का स्वरूप और दायरा
पत्र के अनुसार, दिल्ली सरकार ने BS-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा न करने वाले वाहनों को 1 नवंबर 2026 से दिल्ली की सड़कों पर चलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया है। इस प्रस्ताव के तहत दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को ऐसे वाहनों को जब्त करने का अधिकार भी दिया जाना है।
गौरतलब है कि BS-6 उत्सर्जन मानक वर्ष 2020 में लागू किए गए थे। परिवहन विभाग और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों के अनुसार, डीज़ल वाहनों को 10 वर्ष तथा पेट्रोल वाहनों को 15 वर्ष की निर्धारित अवधि तक चलाने की अनुमति पहले से दी गई है।
न्यायिक समुदाय पर असर
DHCBA अध्यक्ष हरिहरन ने पत्र में उल्लेख किया कि बड़ी संख्या में वकील प्रतिदिन नोएडा, गुरुग्राम, गाज़ियाबाद और आसपास के अन्य शहरों से नई दिल्ली स्थित अदालतों में आते-जाते हैं। दिल्ली में आवास की ऊँची लागत के चलते अनेक वकील, न्यायाधीश और न्यायालय कर्मचारी पड़ोसी शहरों में रहने को विवश हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-NCR में शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपायों की गति तेज़ हो रही है और हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में वाहन-संबंधी पाबंदियाँ न्यायिक व सरकारी कार्यालयों के दैनिक कामकाज को प्रभावित करती रही हैं।
पत्र में उठाए गए मुख्य तर्क
हरिहरन ने तर्क दिया कि न्यायाधीश, अधिवक्ता और न्यायालय कर्मचारी न्याय वितरण जैसी अनिवार्य सेवा से सीधे जुड़े हैं। उनका कहना है कि इस वर्ग को प्रस्तावित प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखना इसलिए ज़रूरी है ताकि अदालतों का नियमित कामकाज बिना व्यवधान के चलता रहे।
पत्र में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया गया है कि वे दिल्ली सरकार के समक्ष यह मामला उठाएँ और न्यायपालिका से जुड़े व्यक्तियों के लिए उचित छूट सुनिश्चित कराएँ।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या हर सर्दी में गंभीर रूप लेती है। सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) समय-समय पर पुराने वाहनों पर अंकुश लगाने के निर्देश दे चुके हैं। वर्तमान प्रस्ताव उन्हीं दिशानिर्देशों की अगली कड़ी माना जा रहा है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसी नीतियाँ लागू करते समय उन लोगों की व्यावहारिक कठिनाइयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता जो NCR के विस्तृत भूगोल में काम करते हैं।
आगे क्या होगा
अब यह देखना होगा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश इस पत्र पर क्या रुख अपनाते हैं और दिल्ली सरकार न्यायिक समुदाय की माँग पर किस प्रकार विचार करती है। 1 नवंबर 2026 की समयसीमा अत्यंत निकट होने के कारण, अगले कुछ दिन इस मसले पर निर्णायक साबित हो सकते हैं।