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क्या दिल्ली ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए गैर-बीएस-6 मालवाहक वाहनों पर प्रतिबंध लगाया?

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क्या दिल्ली ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए गैर-बीएस-6 मालवाहक वाहनों पर प्रतिबंध लगाया?

सारांश

दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 1 नवंबर से गैर-बीएस-6 मालवाहक वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। इस फैसले का उद्देश्य वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। जानें इस निर्णय के पीछे का तर्क और क्या हैं इसके प्रभाव।

मुख्य बातें

गैर-बीएस-6 वाहनों पर प्रतिबंध का उद्देश्य वायु गुणवत्ता में सुधार करना है।
बीएस-4 वाहनों को सीमित अवधि के लिए अनुमति है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह निर्णय लिया गया है।
लंबी कतारों को खत्म करने का प्रयास किया जाएगा।
सभी संबंधित विभागों को सख्ती से पालन कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।

नई दिल्ली, 28 अक्तूबर (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 1 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गैर-बीएस-6 वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

यह आदेश वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की निर्देशों के तहत जारी किया गया है और इसे दिल्ली परिवहन विभाग ने अधिसूचित किया है।

इस आदेश के अनुसार, अब केवल बीएस-6, सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। वहीं, बीएस-4 वाहनों को सीमित अवधि के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली में आने की छूट दी गई है।

यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश (26 सितंबर 2025) के बाद लिया गया है। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की उस याचिका को मंजूरी दी जिसमें पुराने आदेश के तहत आवश्यक वस्तुएं जैसे सब्जी, दूध, अनाज, अंडे, बर्फ, नमक आदि ढोने वाले पुराने वाहनों को दी गई छूट को हटाने की मांग की गई थी।

एमसीडी ने अदालत में कहा था कि इन छूटों के कारण चेक पोस्ट पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, क्योंकि पुलिस को हर वाहन की भौतिक जांच करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया के चलते वाहनों का इंजन चालू रहता है और वे लगातार धुआं छोड़ते हैं, जिससे प्रदूषण और बढ़ता है।

अदालत ने कहा था, "हर वाहन को बाहर से देखकर यह पहचानना मुश्किल है कि वह क्या सामान ले जा रहा है। ऐसे में सभी वाहनों को रोककर जांच करनी पड़ती है, जिससे लंबी देरी होती है और प्रदूषण बढ़ता है।"

अदालत ने यह भी कहा था कि आवश्यक वस्तुओं पर लगने वाला शुल्क आम उपभोक्ताओं को अधिक प्रभावित नहीं करेगा, इसलिए छूट हटाई जा सकती है।

सीएक्यूएम ने अपनी बैठक में माना कि दिल्ली की सीमाओं पर पुराने मालवाहक वाहनों की लंबी कतारें और बार-बार रुकना, वायु गुणवत्ता को बेहद खराब बना रहा है। आयोग ने कहा कि यह निर्णय राजधानी में वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम दोनों को कम करने में मदद करेगा।

आयोग ने स्पष्ट किया कि बीएस-3 और उससे नीचे के सभी वाणिज्यिक वाहन (ट्रक, मीडियम और लाइट गुड्स व्हीकल) अब किसी भी हालत में दिल्ली में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इससे उच्च प्रदूषण उत्सर्जन पर काफी हद तक रोक लगेगी।

सभी संबंधित विभागों (दिल्ली परिवहन विभाग, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, एनएचएआई, और एनसीआर राज्यों के परिवहन विभागों) को निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश का सख्ती से पालन कराएं। साथ ही, हर तीन महीने में निगरानी रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गैर-बीएस-6 वाहनों पर प्रतिबंध कब से लागू होगा?
यह प्रतिबंध 1 नवंबर से लागू होगा।
क्या बीएस-4 वाहनों को दिल्ली में आने की अनुमति है?
हाँ, बीएस-4 वाहनों को सीमित अवधि के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक आने की छूट दी गई है।
क्या सभी मालवाहक वाहनों को प्रतिबंधित किया गया है?
हाँ, बीएस-3 और उससे नीचे के सभी वाणिज्यिक वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
इस निर्णय का उद्देश्य क्या है?
इस निर्णय का उद्देश्य दिल्ली में वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को कम करना है।
क्या इस आदेश का पालन नहीं करने पर क्या होगा?
सभी संबंधित विभागों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के लिए निर्देशित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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