ऑनलाइन गेमिंग घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: मुंबई में राम यू. रामधनी गिरफ्तार, सैकड़ों करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने 6 अक्टूबर 2026 को राम यू. रामधनी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी ऑल पैनल एक्सचेंज (एपीएक्स) के माध्यम से संचालित कथित ऑनलाइन गेमिंग एवं सट्टेबाजी घोटाले तथा उससे जुड़ी साइबर धोखाधड़ी की चल रही जांच के क्रम में हुई है। मुंबई की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने आरोपी को पहले सात दिनों की ईडी हिरासत में भेजा, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में स्थानांतरित कर दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर
ईडी की जांच दो प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर आरंभ की गई, जिनमें शिकायतकर्ताओं के साथ ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर धोखाधड़ी के जरिए करोड़ों रुपयों की ठगी का आरोप था। जांच में पाया गया कि धोखाधड़ी से अर्जित धनराशि को कई फर्जी खातों के माध्यम से घुमाया गया और अंततः एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड में स्थानांतरित किया गया। यह कंपनी रामधनी द्वारा स्थापित की गई थी और जांच एजेंसी के अनुसार उसी के पूर्ण नियंत्रण में संचालित होती थी।
एडसम फिनटेक की भूमिका और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
ईडी के अनुसार, एडसम फिनटेक के बैंक खाते अनेक साइबर अपराध गतिविधियों से जुड़े पाए गए — इनमें ऑनलाइन गेमिंग, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टो/यूएसडीटी आधारित धोखाधड़ी शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार कंपनी के बैंक खातों के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए को कई परतों में घुमाया गया। इसके अतिरिक्त, एडसम फिनटेक ने ईजबज, कैशफ्री, पाइनलैब्स जैसे पेमेंट गेटवे और मुस्लिम कोऑपरेटिव बैंक जैसे बैंकों के भुगतान चैनलों के जरिए पे-इन/पे-आउट सेवाएं प्रदान की। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के मामले देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं।
तलाशी अभियान और जब्त संपत्ति
इस मामले में ईडी ने इससे पहले पुणे, मुंबई और बेंगलुरु में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को अहम दस्तावेज हाथ लगे और विभिन्न बैंक खातों में जमा लगभग ₹60 लाख की राशि को फ्रीज किया गया। रामधनी की गिरफ्तारी विस्तृत बैंक लेनदेन विश्लेषण, पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों और जांच के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजी व डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की गई।
आगे की जांच
गौरतलब है कि यह मामला देश में बढ़ते साइबर अपराध-संचालित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की एक कड़ी के रूप में सामने आया है, जहाँ फिनटेक कंपनियों का उपयोग अवैध धन को वैध दिखाने के लिए किया जाता है। ईडी के अनुसार इस मामले में आगे की जांच जारी है और नए पहलू सामने आने की संभावना है।