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ई-कॉमर्स में मुनाफे का लालच देकर ₹5.88 लाख की ठगी, वाराणसी का जिम ट्रेनर सूरत पुलिस की गिरफ्त में

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ई-कॉमर्स में मुनाफे का लालच देकर ₹5.88 लाख की ठगी, वाराणसी का जिम ट्रेनर सूरत पुलिस की गिरफ्त में

सारांश

डेटिंग ऐप से शुरू हुई एक ऑनलाइन ठगी, फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट और अंत में क्रिप्टो के ज़रिए दुबई तक पहुँचा पैसा — सूरत पुलिस ने वाराणसी से जिम ट्रेनर को दबोचा, पर मुख्य आरोपी अभी भी दुबई में फरार।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम ब्रांच ने वाराणसी से 32 वर्षीय जिम ट्रेनर अब्दुल्ला उर्फ सोनू मजीद को गिरफ्तार किया।
शिकायतकर्ता से ई-कॉमर्स निवेश का झांसा देकर ₹5,88,909 रुपए की ठगी की गई।
मजीद पर आरोप है कि उसने कमीशन के बदले बैंक खाते उपलब्ध कराए और ₹1.65 लाख से USDT क्रिप्टोकरेंसी खरीदकर दुबई भेजी।
मुंबई के व्यवसायी इमरान यूसुफ खिलची (46) को इससे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्य आरोपी अभी दुबई में फरार है; मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और IT अधिनियम के तहत दर्ज।

सूरत शहर पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी से 32 वर्षीय जिम ट्रेनर अब्दुल्ला उर्फ सोनू मजीद को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने एक गुजरात निवासी से ई-कॉमर्स निवेश में अधिक रिटर्न का झांसा देकर की गई ₹5,88,909 रुपए की ऑनलाइन ठगी की रकम को बैंक खातों के ज़रिए इधर-उधर करने में मदद की। पुलिस के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र की डोर दुबई में छिपे एक अन्य आरोपी के हाथ में थी।

ठगी का तरीका

पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता से पहले एक डेटिंग ऐप के ज़रिए संपर्क किया गया। इसके बाद उसे एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा गया और उस पर अकाउंट बनाने के लिए राजी किया गया। वेबसाइट पर दावा किया गया कि ई-कॉमर्स गतिविधियों में पैसे लगाने पर अच्छा रिटर्न मिलेगा।

इस विश्वास में आकर शिकायतकर्ता ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹5,88,909 रुपए ट्रांसफर किए, जो वापस नहीं मिले। यह रकम कई खातों में बंटवाई गई — जिनमें से एक खाता पहले से गिरफ्तार आरोपी इमरान यूसुफ खिलची के नाम से जुड़ा HDFC बैंक खाता था, जिसमें ₹1,77,590 रुपए स्थानांतरित किए गए थे।

मजीद की भूमिका और क्रिप्टो कनेक्शन

जाँच में सामने आया कि अब्दुल्ला मजीद ने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते धोखाधड़ी के लिए उपलब्ध कराए। कैश डिपॉजिट मशीनों (CDM) के ज़रिए इन खातों में पैसे जमा कराए गए। इसके बाद मजीद ने एटीएम और चेक से रकम निकाली।

आरोप है कि मजीद ने ₹12,590 रुपए अपने कमीशन के रूप में रखे और शेष ₹1.65 लाख से यूएसडीटी (USDT) — अमेरिकी डॉलर से जुड़ी एक क्रिप्टोकरेंसी — खरीदकर दुबई में बैठे मुख्य आरोपी को ट्रांसफर कर दी। यह कथित तौर पर साइबर ठगों का वह तरीका है जिससे वे धन के स्रोत को छिपाने के लिए क्रिप्टो माध्यम का उपयोग करते हैं।

गिरफ्तारी और जाँच

पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. मोरी के नेतृत्व में साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी पड़ताल के ज़रिए मजीद की वाराणसी में मौजूदगी का पता लगाया और उसे वहाँ से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई।

इस मामले में पहले से गिरफ्तार 46 वर्षीय इमरान यूसुफ खिलची, मुंबई, महाराष्ट्र के रहने वाले एक व्यवसायी हैं। मुख्य साजिशकर्ता अभी दुबई में फरार बताया जा रहा है और उसकी पहचान का खुलासा पुलिस ने अभी तक नहीं किया है।

मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, सूरत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (2008 में संशोधित) की संगत धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

पुलिस की नागरिकों से अपील

सूरत शहर पुलिस ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रकार के कमीशन या लालच के बदले अपने बैंक खाते किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें। पुलिस का कहना है कि ऐसा करना न केवल अपराध में सहयोग है, बल्कि कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकता है।

गौरतलब है कि यह मामला उस बड़े पैटर्न का हिस्सा है जिसमें साइबर ठग डेटिंग ऐप्स के ज़रिए पीड़ितों को निशाना बनाते हैं और फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के ज़रिए उनसे पैसे ऐंठते हैं। आने वाले दिनों में दुबई के मुख्य आरोपी तक पहुँचने के लिए जाँच जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बढ़ते संजाल की एक कड़ी है जिसमें डेटिंग ऐप, फर्जी निवेश साइटें और क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग — तीनों मिलकर काम करते हैं। चिंताजनक यह है कि मुख्य साजिशकर्ता विदेश से संचालन कर रहा है, जो प्रत्यर्पण की जटिलताओं को देखते हुए जाँच को लंबा खींच सकता है। खाते 'किराए पर' देने वाले स्थानीय मध्यस्थों का नेटवर्क भारत में साइबर अपराध की असली कमज़ोर कड़ी बनता जा रहा है — और इस पर जागरूकता तथा कानूनी सख्ती दोनों की आवश्यकता है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत में ई-कॉमर्स ठगी का मामला क्या है?
यह एक साइबर ठगी का मामला है जिसमें गुजरात के एक निवासी को डेटिंग ऐप के ज़रिए संपर्क कर एक फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर निवेश के नाम पर ₹5,88,909 रुपए ठग लिए गए। पैसे वापस नहीं मिले और रकम को क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए दुबई भेजा गया।
अब्दुल्ला मजीद कौन है और उसकी क्या भूमिका थी?
अब्दुल्ला उर्फ सोनू मजीद वाराणसी का 32 वर्षीय जिम ट्रेनर है। आरोप है कि उसने कमीशन के बदले ठगी की रकम को बैंक खातों के ज़रिए इधर-उधर किया और ₹1.65 लाख से USDT क्रिप्टोकरेंसी खरीदकर दुबई में बैठे मुख्य आरोपी को ट्रांसफर की।
क्या इस मामले में और भी आरोपी हैं?
हाँ, मुंबई के 46 वर्षीय व्यवसायी इमरान यूसुफ खिलची को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य साजिशकर्ता अभी दुबई में फरार है और उसकी पहचान का खुलासा पुलिस ने अभी तक नहीं किया है।
पुलिस ने किन कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है?
सूरत के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (2008 में संशोधित) की संगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बैंक खाते किराए पर देने वालों को पुलिस ने क्या चेतावनी दी है?
सूरत शहर पुलिस ने अपील की है कि नागरिक कमीशन या किसी भी लालच के बदले अपने बैंक खाते किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें। ऐसा करना अपराध में सहयोग माना जाता है और कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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