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सूरत में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹27 लाख की ठगी, अहमदाबाद से दो गिरफ्तार; एक खाते से ₹8.93 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर

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सूरत में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹27 लाख की ठगी, अहमदाबाद से दो गिरफ्तार; एक खाते से ₹8.93 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर

सारांश

शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झाँसा देकर सूरत के एक व्यक्ति से ₹27 लाख ठगे गए। अहमदाबाद से दो गिरफ्तार — दोनों ने महज ₹8,000 और ₹15,000 के कमीशन पर अपना बैंक खाता साइबर ठगों को दिया। वही खाता 14 राज्यों में ₹8.93 करोड़ की धोखाधड़ी का केंद्र निकला।

मुख्य बातें

सूरत सिटी पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने अहमदाबाद के जमालपुर से समीरखान पठान (30) और मोहम्मद शेख (31) को गिरफ्तार किया।
पीड़ित से व्हाट्सऐप और एक फर्जी वेबसाइट के ज़रिये ₹27 लाख की ठगी की गई।
आरोपी पठान ने ₹8,000 कमीशन पर अपना बैंक ऑफ महाराष्ट्र खाता शेख को दिया; शेख ने ₹15,000 लेकर फरार आरोपी को सौंपा।
उस खाते से 3 मई से 7 जून 2025 के बीच ₹30,09,057 का लेन-देन हुआ।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उसी खाते से जुड़ी 14 शिकायतें मिलीं, जिनमें कुल ₹8,93,80,922 की धोखाधड़ी का आरोप है।
साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया गया है।

सूरत सिटी पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने शेयर ट्रेडिंग में अधिक मुनाफे का झाँसा देकर सूरत के एक व्यक्ति से ₹27 लाख की साइबर ठगी करने के मामले में अहमदाबाद के जमालपुर इलाके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तकनीकी जाँच में जो बैंक खाता उपयोग में आया, वह 14 अलग-अलग ऑनलाइन ठगी की शिकायतों से जुड़ा निकला, जिनमें देशभर में कुल ₹8.93 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।

कैसे हुई ठगी

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने व्हाट्सऐप के ज़रिये पीड़ित से संपर्क किया और एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा, जहाँ उनके नाम से एक खाता बनाया गया। शेयर ट्रेडिंग में आकर्षक रिटर्न का वादा कर पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹27 लाख हस्तांतरित करवाए गए। जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उसे रोक दिया गया और तब उसे ठगी का एहसास हुआ।

यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत दर्ज किया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों का परिचय

पकड़े गए दोनों आरोपी अहमदाबाद के जमालपुर इलाके के रहने वाले हैं। पहले आरोपी समीरखान पठान (30 वर्ष) दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं और 10वीं तक पढ़े हैं। दूसरे आरोपी मोहम्मद शेख (31 वर्ष) भी मज़दूरी करते हैं और बीकॉम उत्तीर्ण हैं।

पुलिस के अनुसार, पठान ने ₹8,000 के कमीशन के बदले बैंक ऑफ महाराष्ट्र में अपने नाम का बचत खाता शेख को सौंपा था। शेख ने यह खाता एक फरार आरोपी को साइबर ठगी के लिए उपलब्ध करवाया और इसके एवज़ में ₹15,000 का कमीशन लिया। इस प्रकार दोनों साइबर ठगी के व्यापक नेटवर्क की कड़ी बने।

बैंक खाते से बड़े नेटवर्क का खुलासा

जाँच में यह तथ्य सामने आया कि 3 मई से 7 जून 2025 के बीच इस बैंक खाते में कुल ₹30,09,057 का लेन-देन हुआ। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर खाते की जाँच करने पर पुलिस को 14 शिकायतें मिलीं, जो अलग-अलग राज्यों से दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों में कुल ₹8,93,80,922 की ऑनलाइन ठगी का आरोप है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि 'खाता किराये पर देना' — जहाँ व्यक्ति अपना बैंक खाता कमीशन पर किसी और को देते हैं — साइबर अपराध के नए और चिंताजनक रुझान के रूप में उभर रहा है।

पुलिस की अपील और सावधानियाँ

सूरत सिटी पुलिस ने आम जनता से आग्रह किया है कि अधिक मुनाफे का वादा करने वाली किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना पर आँख मूँदकर भरोसा न करें। पैसा ट्रांसफर करने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की पहचान अवश्य सत्यापित करें।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्तीय साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें, ताकि धन की त्वरित रोकथाम की कोशिश की जा सके। इस मामले में फरार आरोपी की तलाश जारी है और जाँच अभी भी चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि गिरफ्तार दोनों व्यक्ति निचले स्तर के मोहरे हैं। पुलिस को इस मामले में फरार मास्टरमाइंड तक पहुँचना असली चुनौती होगी, अन्यथा ऐसे गिरफ्तारियाँ महज ऊपरी सतह को खरोंचने से ज़्यादा कुछ नहीं।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत शेयर ट्रेडिंग ठगी का मामला क्या है?
सूरत के एक व्यक्ति को व्हाट्सऐप पर संपर्क कर एक फर्जी शेयर ट्रेडिंग वेबसाइट के ज़रिये ₹27 लाख ठग लिए गए। पीड़ित को अधिक मुनाफे का वादा कर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई और बाद में पैसे निकालने से रोक दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों ने क्या किया था?
आरोपी समीरखान पठान ने ₹8,000 के कमीशन पर अपना बैंक ऑफ महाराष्ट्र का बचत खाता मोहम्मद शेख को दिया। शेख ने ₹15,000 लेकर यही खाता एक फरार साइबर ठग को उपलब्ध करवाया, जिसने इसे ठगी की रकम एकत्र करने के लिए इस्तेमाल किया।
एक ही बैंक खाते से ₹8.93 करोड़ की ठगी कैसे जुड़ी?
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाँच में पता चला कि इस खाते से जुड़ी 14 शिकायतें अलग-अलग राज्यों से दर्ज हैं, जिनमें कुल ₹8,93,80,922 की ऑनलाइन ठगी का आरोप है। खाते में 3 मई से 7 जून 2025 के बीच ₹30 लाख से अधिक का लेन-देन हुआ था।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन निवेश योजनाओं में पैसा न लगाएँ, खासकर जब वादा किया जाने वाला मुनाफा असामान्य रूप से अधिक हो। पैसा ट्रांसफर करने से पहले संस्था की सत्यापित पहचान जाँचें और ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।
क्या अपना बैंक खाता किसी को देना अपराध है?
हाँ, यदि बैंक खाता साइबर ठगी जैसे अवैध कार्यों के लिए कमीशन लेकर दिया जाए, तो यह भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इस मामले में दोनों आरोपियों को कमीशन लेकर खाता उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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