केरल RTI विवाद: भाजपा के सुरेंद्रन का सतीशन सरकार पर आरोप, सतर्कता फाइलें छुपाने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय सचिव के. सुरेंद्रन ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली केरल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सतर्कता विभाग के टी-1 और टी-2 अनुभागों को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम से छूट देकर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। सुरेंद्रन ने इस नवीनतम अधिसूचना को 'अलोकतांत्रिक' और 'भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का प्रयास' करार दिया।
टी अनुभाग और उनकी संवेदनशीलता
सतर्कता विभाग के टी अनुभागों में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़ी गोपनीय फाइलें रखी जाती हैं। इन्हीं अनुभागों को RTI के दायरे से बाहर करने की अधिसूचना विवाद का केंद्र बन गई है। सुरेंद्रन ने चेतावनी दी कि सतर्कता निदेशक को यह तय करने का पूर्ण विवेकाधिकार देना कि कौन सी फाइलें टी अनुभागों के तहत रखी जाएँ, इस अधिकार के दुरुपयोग का रास्ता खोलता है।
सरकार का बचाव
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि सतर्कता विभाग की जाँच गोपनीय प्रकृति की होती है और उसके प्रभावी संचालन के लिए गोपनीयता आवश्यक है। उनका तर्क था कि पिछली सरकार ने टी अनुभागों को RTI अधिनियम के तहत लाया था, जबकि ये अनुभाग वास्तव में इसके दायरे में नहीं आते। सरकार ने इस कदम को प्रशासनिक स्पष्टता के रूप में प्रस्तुत किया है।
राजनीतिक आरोप और पूर्व मिसालें
सुरेंद्रन ने इस निर्णय के समय पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या इस कदम का उद्देश्य पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) नेता पिनाराई विजयन — जो अब विपक्ष के नेता हैं — के खिलाफ चल रही सतर्कता जाँच को कमज़ोर करना है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार के कुछ मंत्री भी जाँच का सामना कर रहे हैं और इस छूट से उन्हें राहत मिल सकती है।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है। सुरेंद्रन के अनुसार, 2016 में ओमन चांडी के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने इसी तरह की RTI छूट पाने का प्रयास किया था, जिस पर केरल उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप कर सरकारी आदेश पर रोक लगानी पड़ी थी। इसके बाद 2025 में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने भी यही प्रयास किया था।
विपक्ष का व्यापक आरोप
सुरेंद्रन ने तर्क दिया कि यूडीएफ और एलडीएफ, दोनों ही राजनीतिक खेमे, सतर्कता विभाग को RTI के दायरे से बाहर रखने के मामले में एकजुट रहे हैं। उनके अनुसार दोनों मोर्चों ने बार-बार यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे लोगों को बचाने और संवेदनशील मामलों को जनता की नज़रों से दूर रखने में उनकी नीयत एक जैसी है। उन्होंने कहा कि नवीनतम अधिसूचना सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता को गंभीर रूप से कमज़ोर करेगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सतर्कता जाँच की प्रक्रिया पहले से ही राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। 2016 की हाईकोर्ट की रोक को देखते हुए, विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस अधिसूचना को भी न्यायिक चुनौती मिल सकती है। भाजपा ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को संसद और अदालत दोनों स्तरों पर उठाएगी।