तिरुवनंतपुरम नगर निगम: भाजपा का आरोप — सुगाथन के खिलाफ एलडीएफ-यूडीएफ की साझा साजिश
सारांश
मुख्य बातें
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में राजनीतिक तनाव उस समय और गहरा गया जब 13 अक्टूबर 2026 को केरल विधानसभा के बाहर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षदों और पार्षद आर. सुगाथन के परिजनों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा का आरोप है कि वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने मिलकर सुगाथन के विरुद्ध कथित झूठे मामले दर्ज कराए और केरल असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम (कापा) का दुरुपयोग कर तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा के नेतृत्व वाले प्रशासन को अस्थिर करने की कोशिश की है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष आर. श्रीलेखा (आईपीएस) ने किया। उन्होंने कहा कि कापा कानून लगाकर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को लगभग चार महीने तक हिरासत में रखना केरल के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है।
श्रीलेखा ने आरोप लगाया कि एलडीएफ और यूडीएफ ने निगम चुनावों में भाजपा की सफलता के बाद उभरे युवा नेता सुगाथन के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से हाथ मिलाया है। उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर अपराधों को रोकने के लिए बनाए गए कानून का एक जनप्रतिनिधि के विरुद्ध प्रयोग बेहद निंदनीय है।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा विधायक वी. मुरलीधरन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुगाथन के खिलाफ मामलों के जरिए भाजपा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व एक पार्षद की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर नगर निगम में भाजपा के नेतृत्व वाले प्रशासन को गिराने की योजना बना रहे हैं।
मुरलीधरन ने कहा कि जनता के जनादेश को स्वीकार न करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करना संविधान के प्रति अनास्था को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केरल में वामपंथी दलों का रवैया एक जैसा है।
मुरलीधरन ने विश्वास जताया कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम का वर्तमान भाजपा प्रशासन अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा करेगा और शहर के नागरिकों के हित में काम जारी रखेगा।
कापा कानून और विवाद
केरल असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम (कापा) मूल रूप से संगठित अपराध और गंभीर असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया था। भाजपा का आरोप है कि इस कानून का उपयोग एक निर्वाचित पार्षद के विरुद्ध राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है, जो कानून की मूल भावना के विपरीत है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब केरल में किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस अधिनियम के तहत कार्रवाई पर विवाद उठा हो।
प्रदर्शन में प्रमुख उपस्थिति
विरोध प्रदर्शन में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक राजीव चंद्रशेखर, प्रदेश महासचिव शोभा सुरेंद्रन, अधिवक्ता एस. सुरेश, प्रदेश उपाध्यक्ष के. सोमन, प्रदेश सचिव पूंथुरा श्रीकुमार, नगर निगम की उपमहापौर आशा नाथ, शहर जिला अध्यक्ष करमना जयन, पार्षद आर. सुगाथन, अन्य पार्षद और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आगे की राह
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता-संघर्ष का यह विवाद केरल की नगर निकाय राजनीति में नई जटिलताएँ जोड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं। भाजपा की आक्रामक प्रतिक्रिया यह भी संकेत देती है कि पार्टी केरल में अपनी नगर निकाय-स्तर की उपस्थिति को किसी भी कीमत पर बचाए रखना चाहती है।