केरल: BJP पार्षद सुगाथन KAAPA के तहत सेंट्रल जेल भेजे गए, मेयर ने पुलिस पर ज़्यादती का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
तिरुवनंतपुरम के वजूट्टुकोनम वार्ड के भारतीय जनता पार्टी (BJP) पार्षद आर. सुगाथन को 10 जून 2026 को केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (KAAPA) के तहत एहतियाती हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। वह KAAPA के अंतर्गत जेल भेजे जाने वाले केरल के पहले मौजूदा पार्षद बन गए हैं। इस गिरफ्तारी के बाद तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर वी.वी. राजेश ने पुलिस की कार्रवाई को अनावश्यक रूप से आक्रामक बताते हुए राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ने की घोषणा की।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
यह गिरफ्तारी लगभग दो महीने पहले एक मंदिर उत्सव के दौरान हुए झगड़े से जुड़े हत्या के प्रयास के मामले के सिलसिले में की गई। जिला कलेक्टर ने KAAPA के तहत सुगाथन को एहतियाती हिरासत में रखने का आदेश पहले ही जारी कर दिया था। सुगाथन ने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका ख़ारिज कर दी और उन्हें 7 जून तक जाँच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। सुगाथन तय समय सीमा के भीतर पेश नहीं हुए।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि सुगाथन वजूट्टुकोनम स्थित अपने घर लौट आए हैं। इसके बाद वट्टियूरकावु सीआई विपिन के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुँची। हालाँकि सुगाथन के समर्थक घर के बाहर जमा हो गए और पुलिस टीम को घेर लिया, जिससे प्रारंभिक गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब भीड़ का विरोध बढ़ने लगा। पुलिस के अनुसार, सीआई विपिन और एसआई अभिजीत पर सुगाथन और उनके भाई ने हमला किया, जिसमें दोनों अधिकारी घायल हो गए। अंततः सीआई ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोली चलाई, जिसके बाद सुगाथन को हिरासत में लिया जा सका। पुलिस ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी में बाधा डालने और अधिकारियों पर हमले का एक नया मामला भी दर्ज किया है।
BJP और सुगाथन के परिवार के आरोप
मेयर राजेश ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई जरूरत से ज़्यादा आक्रामक थी और इसे टाला जा सकता था। उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने सिर्फ हंगामा खड़ा करने के लिए हवा में गोली चलाई और KAAPA मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
सुगाथन ने पुलिस के आरोपों को सिरे से नकारते हुए दावा किया कि वह चिकनपॉक्स का इलाज करवा रहे थे और फरार नहीं थे। उनकी पत्नी अश्वथी ने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी महिला अधिकारी के घर में घुसी, उनके साथ और बच्चों के साथ मारपीट की, और घर के अंदर दहशत का माहौल बना दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब उनका आठ साल का बच्चा रोने लगा तो उसे धक्का देकर हटा दिया गया।
पुलिस का पक्ष
पुलिस ने परिवार के सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि बल का इस्तेमाल केवल तब किया गया जब पार्षद और उनके भाई ने अधिकारियों पर हमला किया। पुलिस के अनुसार, हवाई फायरिंग स्थिति को काबू में करने के लिए आत्मरक्षा में की गई, न कि उकसावे के तौर पर।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह मामला केरल में सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार और विपक्षी BJP के बीच बढ़ते टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। BJP ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ाई जारी रखने की घोषणा की है। सुगाथन का मामला अब अदालत में है और अगली सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।