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केरल: BJP पार्षद सुगाथन KAAPA के तहत सेंट्रल जेल भेजे गए, मेयर ने पुलिस पर ज़्यादती का आरोप लगाया

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केरल: BJP पार्षद सुगाथन KAAPA के तहत सेंट्रल जेल भेजे गए, मेयर ने पुलिस पर ज़्यादती का आरोप लगाया

सारांश

केरल में एक मौजूदा BJP पार्षद पहली बार KAAPA के तहत सेंट्रल जेल भेजे गए — गिरफ्तारी के दौरान हवाई फायरिंग, पुलिस पर परिवार की मारपीट के आरोप, और BJP का पलटवार। यह मामला केरल में सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव की नई कड़ी बन गया है।

मुख्य बातें

सुगाथन KAAPA के तहत सेंट्रल जेल भेजे जाने वाले केरल के पहले मौजूदा पार्षद बने।
गिरफ्तारी मंदिर उत्सव के दौरान हुए झगड़े से जुड़े हत्या के प्रयास के मामले से संबंधित है।
हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज की; 7 जून की समय सीमा तक पेश न होने पर गिरफ्तारी हुई।
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोली चलाई; सीआई विपिन और एसआई अभिजीत घायल हुए।
पत्नी अश्वथी ने आरोप लगाया — बिना महिला अधिकारी के घर में प्रवेश, आठ साल के बच्चे को धक्का; पुलिस ने आरोप नकारे।
राजेश ने BJP की ओर से राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ने की घोषणा की।

तिरुवनंतपुरम के वजूट्टुकोनम वार्ड के भारतीय जनता पार्टी (BJP) पार्षद आर. सुगाथन को 10 जून 2026 को केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (KAAPA) के तहत एहतियाती हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। वह KAAPA के अंतर्गत जेल भेजे जाने वाले केरल के पहले मौजूदा पार्षद बन गए हैं। इस गिरफ्तारी के बाद तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर वी.वी. राजेश ने पुलिस की कार्रवाई को अनावश्यक रूप से आक्रामक बताते हुए राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ने की घोषणा की।

गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

यह गिरफ्तारी लगभग दो महीने पहले एक मंदिर उत्सव के दौरान हुए झगड़े से जुड़े हत्या के प्रयास के मामले के सिलसिले में की गई। जिला कलेक्टर ने KAAPA के तहत सुगाथन को एहतियाती हिरासत में रखने का आदेश पहले ही जारी कर दिया था। सुगाथन ने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका ख़ारिज कर दी और उन्हें 7 जून तक जाँच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। सुगाथन तय समय सीमा के भीतर पेश नहीं हुए।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि सुगाथन वजूट्टुकोनम स्थित अपने घर लौट आए हैं। इसके बाद वट्टियूरकावु सीआई विपिन के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुँची। हालाँकि सुगाथन के समर्थक घर के बाहर जमा हो गए और पुलिस टीम को घेर लिया, जिससे प्रारंभिक गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब भीड़ का विरोध बढ़ने लगा। पुलिस के अनुसार, सीआई विपिन और एसआई अभिजीत पर सुगाथन और उनके भाई ने हमला किया, जिसमें दोनों अधिकारी घायल हो गए। अंततः सीआई ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोली चलाई, जिसके बाद सुगाथन को हिरासत में लिया जा सका। पुलिस ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी में बाधा डालने और अधिकारियों पर हमले का एक नया मामला भी दर्ज किया है।

BJP और सुगाथन के परिवार के आरोप

मेयर राजेश ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई जरूरत से ज़्यादा आक्रामक थी और इसे टाला जा सकता था। उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने सिर्फ हंगामा खड़ा करने के लिए हवा में गोली चलाई और KAAPA मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।

सुगाथन ने पुलिस के आरोपों को सिरे से नकारते हुए दावा किया कि वह चिकनपॉक्स का इलाज करवा रहे थे और फरार नहीं थे। उनकी पत्नी अश्वथी ने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी महिला अधिकारी के घर में घुसी, उनके साथ और बच्चों के साथ मारपीट की, और घर के अंदर दहशत का माहौल बना दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब उनका आठ साल का बच्चा रोने लगा तो उसे धक्का देकर हटा दिया गया।

पुलिस का पक्ष

पुलिस ने परिवार के सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि बल का इस्तेमाल केवल तब किया गया जब पार्षद और उनके भाई ने अधिकारियों पर हमला किया। पुलिस के अनुसार, हवाई फायरिंग स्थिति को काबू में करने के लिए आत्मरक्षा में की गई, न कि उकसावे के तौर पर।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह मामला केरल में सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार और विपक्षी BJP के बीच बढ़ते टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। BJP ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ाई जारी रखने की घोषणा की है। सुगाथन का मामला अब अदालत में है और अगली सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल में BJP और वामपंथी सरकार के बीच गहराते टकराव का प्रतीक है। KAAPA — एक कानून जो मूलतः गुंडागर्दी रोकने के लिए बना था — का एक निर्वाचित पार्षद पर पहली बार इस्तेमाल, विपक्ष को राजनीतिक उत्पीड़न का आख्यान गढ़ने का मौका देता है। दूसरी तरफ, हाई कोर्ट का अग्रिम जमानत नामंज़ूर करना और समन की अनदेखी यह भी दर्शाती है कि मामला कानूनी दृष्टि से कमज़ोर नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी में इस्तेमाल बल — हवाई फायरिंग, परिवार के आरोप — आनुपातिक थे, और इसकी स्वतंत्र जाँच होगी या नहीं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP पार्षद आर. सुगाथन को किस कानून के तहत जेल भेजा गया?
सुगाथन को केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (KAAPA) के तहत एहतियाती हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेजा गया। जिला कलेक्टर ने यह आदेश पहले ही जारी कर दिया था। वह इस कानून के तहत जेल भेजे जाने वाले केरल के पहले मौजूदा पार्षद हैं।
सुगाथन के खिलाफ मूल मामला क्या है?
सुगाथन के खिलाफ मूल मामला लगभग दो महीने पहले एक मंदिर उत्सव के दौरान हुए झगड़े से जुड़े हत्या के प्रयास का है। इसके अलावा गिरफ्तारी के दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमले का एक नया मामला भी दर्ज किया गया है।
हाई कोर्ट ने सुगाथन की अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?
हाई कोर्ट ने सुगाथन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर उन्हें 7 जून तक जाँच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। सुगाथन तय समय सीमा तक पेश नहीं हुए, जिसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
मेयर वी.वी. राजेश ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
मेयर वी.वी. राजेश ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई जरूरत से ज़्यादा आक्रामक थी और इसे टाला जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी ने सिर्फ हंगामा खड़ा करने के लिए हवा में गोली चलाई और KAAPA के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
सुगाथन की पत्नी ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए और पुलिस का क्या कहना है?
पत्नी अश्वथी ने आरोप लगाया कि पुलिस बिना महिला अधिकारी के घर में घुसी, बच्चों को डराया और आठ साल के बच्चे को धक्का दिया। पुलिस ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बल का इस्तेमाल केवल तब किया गया जब सुगाथन और उनके भाई ने अधिकारियों पर हमला किया।
राष्ट्र प्रेस
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