3 अगस्त 2026
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केरल हाईकोर्ट ने ईडी हमले के मामले में सीपीआई (एम) के 9 कार्यकर्ताओं को दी सशर्त जमानत

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केरल हाईकोर्ट ने ईडी हमले के मामले में सीपीआई (एम) के 9 कार्यकर्ताओं को दी सशर्त जमानत

सारांश

केरल हाईकोर्ट ने मसाप्पाडी ईडी हमले के मामले में सीपीआई (एम) के 9 कार्यकर्ताओं को 67 दिन की हिरासत के बाद सशर्त जमानत दी। अदालत ने हत्या के प्रयास के आरोप को प्रथम दृष्टया कमज़ोर पाया — जो अभियोजन पक्ष के लिए बड़ा झटका है।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को सीपीआई (एम) के 9 कार्यकर्ताओं को सशर्त जमानत दी।
सभी आरोपी 27 मई की हिंसा से जुड़े हैं, जिसमें ईडी अधिकारियों पर कथित हमला हुआ था।
आरोपी 67 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहे; किसी की भी पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं।
जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने कहा — अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया हत्या के प्रयास का आरोप साबित करने में विफल रहा।
ईडी ने हमले को पूर्व नियोजित और संगठित बताते हुए जमानत का विरोध किया था।
शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार, 3 अगस्त को मसाप्पाडी मामले की जाँच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर कथित हमले के आरोप में गिरफ्तार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] के 9 कार्यकर्ताओं को सशर्त जमानत प्रदान की। ये सभी आरोपी 67 दिनों से न्यायिक हिरासत में थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, फिर भी जाँच के लगभग पूर्ण होने और आरोपियों की साफ आपराधिक पृष्ठभूमि न होने के आधार पर जमानत दी गई।

किन्हें मिली जमानत

जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने किरण पी.एस., जीवन, अनिल कुमार, श्रीजीत, निशाद, सिद्दार्थ एस., शेफ़ीक, नंदू जी.आर. और राहुल ए. राजन की जमानत याचिकाएँ स्वीकार कीं। अदालत ने नोट किया कि इन सभी की कोई पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और जाँच भी अंतिम चरण में है। शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को विचार किए जाने की बात कही गई।

मुख्य घटनाक्रम: 27 मई की हिंसा

यह पूरा मामला 27 मई की उस हिंसा से जुड़ा है, जब ईडी अधिकारी मसाप्पाडी मामले में छापेमारी के बाद केरल के नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन और उनकी बेटी के आवास से लौट रहे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब 300 लोगों की भीड़ ने ईडी अधिकारियों को घेर लिया, उनके वाहन रोके और पत्थर, ईंटें, लाठियाँ व लोहे की रॉड से हमला किया। इस हिंसा में सीआरपीएफ और पुलिस अधिकारी भी घायल हुए तथा सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया।

ईडी का पक्ष: पूर्व नियोजित हमले का दावा

ईडी ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह घटना कोई स्वत:स्फूर्त प्रदर्शन नहीं, बल्कि केंद्रीय जाँच एजेंसी की कार्रवाई में बाधा डालने के उद्देश्य से किया गया पूर्व नियोजित और संगठित हमला था। ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर सनथ रेड्डी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि सभी आरोपी जानलेवा हथियारों के साथ एकत्रित हुए, अधिकारियों के वाहनों का रास्ता रोका और उन्हें जान से मारने की धमकियाँ दीं। ईडी ने दावा किया कि उसके पास आरोपियों की समन्वित गतिविधियों के वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं।

अदालत की अहम टिप्पणियाँ

हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए एक महत्त्वपूर्ण टिप्पणी की — अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया हत्या के प्रयास के आरोपों की पुष्टि करने में विफल रहा, जिसे अभियोजन के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपों की गंभीरता को किसी भी सूरत में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और शेष आरोपों की जाँच जारी रहेगी।

आगे क्या होगा

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने का अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है, जिसमें हत्या के प्रयास का आरोप भी शामिल है। शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत मंगलवार को सुनवाई करेगी, जबकि ईडी की जाँच अभी जारी है। यह मामला केरल की राजनीति और केंद्रीय जाँच एजेंसियों के बीच तनाव का एक नया अध्याय बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं — नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन के आवास से जुड़ी ईडी छापेमारी के ठीक बाद हुई इस हिंसा को महज़ संयोग नहीं माना जा सकता। अदालत का यह कहना कि हत्या के प्रयास का आरोप प्रथम दृष्टया टिकाऊ नहीं है, अभियोजन पक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े करता है — और यह भी कि क्या अति-गंभीर आरोप लगाने से मुकदमा कमज़ोर हुआ। केंद्रीय जाँच एजेंसियों और राज्य की सत्ताधारी पार्टी के बीच यह टकराव केरल में एक पुराने पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें जाँच और प्रतिरोध दोनों संस्थागत रूप ले चुके हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाईकोर्ट ने सीपीआई (एम) के 9 कार्यकर्ताओं को किस मामले में जमानत दी?
इन 9 कार्यकर्ताओं को 27 मई को हुई उस हिंसा के मामले में जमानत मिली, जिसमें ईडी अधिकारियों पर मसाप्पाडी मामले की छापेमारी के बाद कथित तौर पर हमला किया गया था। ये सभी 67 दिनों से न्यायिक हिरासत में थे।
27 मई को क्या हुआ था और ईडी हमले का मामला क्या है?
27 मई को ईडी अधिकारी मसाप्पाडी मामले में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन और उनकी बेटी के आवास पर छापेमारी करके लौट रहे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब 300 लोगों की भीड़ ने अधिकारियों को घेरकर पत्थर, ईंटें और लोहे की रॉड से हमला किया तथा सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया।
हत्या के प्रयास का आरोप क्यों कमज़ोर पड़ा?
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया हत्या के प्रयास के आरोपों की पुष्टि करने में विफल रहा। यह टिप्पणी अभियोजन के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, हालाँकि शेष आरोपों की जाँच जारी रहेगी।
ईडी ने जमानत का विरोध किस आधार पर किया?
ईडी ने तर्क दिया कि यह हमला स्वत:स्फूर्त नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित और संगठित था। ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर सनथ रेड्डी के हलफनामे में कहा गया कि आरोपी जानलेवा हथियारों के साथ एकत्रित थे और एजेंसी के पास समन्वित गतिविधियों के वीडियो साक्ष्य हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होनी है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है और ईडी की जाँच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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