ईडी अधिकारियों पर हमले के आरोपी सीपीआई(एम) के 7 कार्यकर्ता केरल हाईकोर्ट पहुंचे, 60 दिन से जेल में बंद
सारांश
मुख्य बातें
केरल के कोच्चि में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर मई में हुए कथित हमले के आरोपी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के सात कार्यकर्ताओं ने 29 जुलाई 2026 को केरल उच्च न्यायालय में जमानत याचिकाएं दाखिल की हैं। सेशन कोर्ट द्वारा दो बार जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद ये आरोपी 60 दिन से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी इनकी रिहाई का पुरजोर विरोध कर रही है, जिससे यह मामला एक हाई-प्रोफाइल कानूनी संघर्ष का रूप ले चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
30 जुलाई से 4 अगस्त के बीच इन जमानत याचिकाओं पर सुनवाई निर्धारित है। हाईकोर्ट का रुख करने वालों में पाँचवें आरोपी श्रीजीत, सातवें आरोपी अनिल कुमार, शफीक, किरण और निषाद जीवन सहित दो अन्य आरोपी शामिल हैं। कुल मिलाकर सीपीआई(एम) के 24 कार्यकर्ता अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने इन याचिकाओं का विरोध करने के लिए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल को नियुक्त किया है। दूसरी ओर, आरोपियों ने भी वरिष्ठ आपराधिक वकीलों की एक सशक्त कानूनी टीम तैयार की है।
आरोपियों के तर्क
आरोपियों का कहना है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया है और उनमें से कई की पहचान केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर की गई, जबकि कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई।
उनके अधिवक्ताओं का तर्क है कि हत्या के प्रयास का आरोप तथ्यात्मक रूप से टिकाऊ नहीं है — न तो किसी हथियार का उपयोग हुआ और न ही किसी को गंभीर चोट आई। ईडी के ड्राइवर को मामूली चोटें आई थीं। आरोपी पक्ष का आरोप है कि हत्या के प्रयास की धारा केवल मामले को गंभीर दिखाने के लिए जोड़ी गई है।
अभियोजन पक्ष की रणनीति
रिपोर्टों के अनुसार, अभियोजन पक्ष आंशिक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। इस कदम से आरोपियों को वैधानिक जमानत (स्टैच्यूटरी बेल) का दावा करने से रोका जा सकता है। इसके अलावा, एक आरोपी को पहले दी गई जमानत रद्द करने के लिए राज्य सरकार की याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है। ईडी ने उस जमानत का विरोध तब किया जब सरकारी वकील ने कथित तौर पर पुलिस रिपोर्ट से अलग रुख अपनाया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद मई 2026 के अंतिम सप्ताह में उस समय शुरू हुआ जब ईडी अधिकारियों ने केरल के विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन के किराए के आवास पर छापेमारी की। यह तलाशी उनकी बेटी वीणा की बंद हो चुकी आईटी कंपनी सीएमआरएल-एक्सलॉजिक से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी।
तलाशी के बाद जब ईडी अधिकारी किराए की गाड़ियों से वापस लौट रहे थे, तो कथित तौर पर सीपीआई(एम) समर्थकों की भीड़ ने उनके काफिले पर हमला कर दिया। इस घटना में कई ईडी कर्मचारी घायल हुए और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। इस हफ्ते की शुरुआत में ईडी ने क्षतिग्रस्त किराए के वाहनों की मरम्मत के लिए ₹1.75 लाख का भुगतान किया।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य संबंधों में पहले से तनाव है और केरल में ईडी की जांच राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई है। 30 जुलाई से 4 अगस्त के बीच होने वाली सुनवाई तय करेगी कि क्या उच्च न्यायालय इन कार्यकर्ताओं को राहत देता है या ईडी का कड़ा रुख बरकरार रहता है। मामले का नतीजा केरल की राजनीति और केंद्रीय एजेंसियों की राज्य में कार्यवाही पर दूरगामी असर डाल सकता है।