ईडी अधिकारियों पर हमला: केरल पुलिस की जांच टीम का विस्तार, CPIM के वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
केरल पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हुए कथित हमले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। 27 मई को तिरुवनंतपुरम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआईएम — के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के किराए के आवास पर छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारियों को कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा था। अब स्पेशल जांच टीम में सब-इंस्पेक्टर और सिविल पुलिस अधिकारियों को शामिल कर उसे और सशक्त किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की टीम 27 मई को विजयन के उस किराए के आवास पर पहुंची थी, जहाँ उनकी बेटी वीना विजयन भी निवास करती हैं। यह छापेमारी वीना विजयन की आईटी कंपनी 'एक्सलॉजिक' और कोच्चि स्थित खनन कंपनी सीएमआरएल के बीच हुए कथित वित्तीय लेनदेन की जांच के सिलसिले में की गई थी। उस दिन घटनास्थल पर जमा हुए प्रदर्शनकारियों में से 25 लोगों को मई के अंतिम सप्ताह से लेकर अगस्त की शुरुआत तक जेल में रखा गया। फिलहाल, एक व्यक्ति अभी भी न्यायिक हिरासत में है, जबकि एक अन्य अभी भी फरार बताया जा रहा है।
जांच का विस्तार क्यों
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम के विस्तार के पीछे प्रमुख कारण यह है कि पुलिस अब सीपीआईएम के वरिष्ठ नेताओं से सीधे पूछताछ करने की स्थिति में आना चाहती है। इनमें सीपीआईएम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन और घटनास्थल पर उपस्थित रहे अन्य पदाधिकारी शामिल हैं। जांचकर्ता यह जानना चाहते हैं कि हमला किसी पूर्व-नियोजित राजनीतिक हस्तक्षेप का परिणाम था अथवा घटना के दौरान किसी ने भीड़ को उकसाया था। यह ऐसे समय में आया है जब मामले की गंभीरता और किसी बड़ी साजिश की संभावना को लेकर जांच एजेंसियों की चिंताएँ बढ़ी हैं।
पूछताछ के नोटिस की तैयारी
रिपोर्टों के अनुसार, अगले सप्ताह सीपीआईएम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन, तिरुवनंतपुरम जिला सचिव वी. जॉय और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी को पूछताछ के लिए पेश होने के नोटिस जारी किए जाने की उम्मीद है। पुलिस विशेष रूप से यह जांच कर रही है कि क्या लोगों को संगठित रूप से एकत्र किया गया था और क्या ईडी अधिकारियों के दौरे को प्रभावित करने की कोई सुनियोजित कोशिश की गई थी।
साइबर फोरेंसिक जांच पर ज़ोर
जांचकर्ता सीपीआईएम के वरिष्ठ नेताओं के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की साइबर फोरेंसिक जांच पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। घटना से ठीक पहले और घटना के दौरान हुई बातचीत की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। ये डिजिटल साक्ष्य घटनाओं का कालक्रम तय करने और कथित हमले से पूर्व हुई किसी भी संभावित समन्वय की पहचान करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
जांच का व्यापक दायरा
पुलिस की मंशा जांच को केवल घटनास्थल पर मौजूद लोगों तक सीमित न रखकर यह भी पता लगाना है कि क्या कहीं और से निर्देश या आदेश दिए गए थे। टीम का विस्तार यह स्पष्ट संकेत देता है कि पुलिस इस मामले को राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जांच अधिकारियों के बीच की सामान्य झड़प से कहीं अधिक गंभीर मान रही है। आने वाले दिनों में वरिष्ठ नेताओं की पूछताछ और फोरेंसिक रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करेंगी।