ईडी छापे पर सीपीआई(एम) का पलटवार: पथानामथिट्टा में 28 मई को बड़ा विरोध मार्च
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार, 28 मई को तड़के सुबह 6 बजे सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित आवासों सहित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस आठ घंटे तक चली कार्रवाई के विरोध में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने 28 मई की शाम 4 बजे पथानामथिट्टा में बड़े विरोध मार्च का आह्वान किया है।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी ने एक साथ कई स्थानों पर छापे मारे — तिरुवनंतपुरम और कन्नूर में विजयन के आवास, कोझिकोड में पूर्व मंत्री पीए मोहम्मद रियास के घर, तथा कोचिन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े परिसर। गौरतलब है कि मोहम्मद रियास, विजयन की पुत्री वीणा विजयन के पति हैं और बेपोर से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक भी हैं।
ईडी की इस कार्रवाई का आधार केरल उच्च न्यायालय का वह आदेश बताया जा रहा है जिसमें जाँच जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
सीपीआई(एम) की तीखी प्रतिक्रिया
माकपा महासचिव एमए बेबी ने इस छापेमारी को 'पिनाराई विजयन के खिलाफ जघन्य अपराध' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग कर माकपा और केरल में उसके सबसे बड़े नेता को राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है।
बेबी ने यह भी कहा कि वीणा विजयन हर बार जाँच में सहयोग करती रही हैं और बुलाए जाने पर अधिकारियों के सामने पेश हुई हैं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर भी निशाना साधते हुए राज्य स्तर पर कांग्रेस और BJP के बीच कथित गठजोड़ का आरोप लगाया।
विरोध प्रदर्शन की तैयारी
एलडीएफ के राज्य स्तरीय नेता 28 मई, गुरुवार की शाम 4 बजे पथानामथिट्टा तक विरोध मार्च में भाग लेंगे। एलडीएफ के पथानामथिट्टा जिला संयोजक एलेक्स कन्नमाला ने कहा कि यह प्रदर्शन उन लोगों के लिए कड़ा संदेश होगा जो मानते हैं कि वामपंथ की ताकत कम हो गई है।
माकपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि केरल के मुख्यमंत्री हाल ही में प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली गए थे और यह छापेमारी उसी के बाद हुई — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब केरल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और माकपा तथा कांग्रेस के बीच सत्ता संघर्ष तेज है। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला पहले से ही राज्य की राजनीति में विवाद का केंद्र रहा है। आलोचकों का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्षी नेताओं के खिलाफ एक बड़े राष्ट्रीय पैटर्न का हिस्सा है, जबकि सरकार समर्थकों का तर्क है कि जाँच न्यायालय के आदेश पर आधारित है।
आगे क्या होगा
पथानामथिट्टा में होने वाला विरोध मार्च वामपंथी गोलबंदी की तात्कालिक परीक्षा होगी। ईडी की जाँच केरल उच्च न्यायालय की निगरानी में जारी है और अगली सुनवाई में इस छापेमारी के निष्कर्षों पर नज़र रहेगी।