पिनाराई विजयन पर ईडी की छापेमारी: केरल के अजेय 'सुप्रीमो' का राजनीतिक पतन
सारांश
मुख्य बातें
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित आवासों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की समन्वित छापेमारी ने केरल की राजनीति में एक ऐसा मोड़ ला दिया है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक असंभव मानी जाती थी। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले से जुड़ी वित्तीय जांच के सिलसिले में हुई यह कार्रवाई उस नेता के खिलाफ है, जिन्होंने लगभग तीन दशकों तक केरल की वाम राजनीति पर एकछत्र राज किया।
कन्नूर से 'सुप्रीमो' तक का सफर
पिनाराई विजयन ने अपनी राजनीतिक यात्रा कन्नूर जिले के एक प्रभावशाली जमीनी संगठक के रूप में शुरू की थी। धीरे-धीरे उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) के भीतर ऐसी पकड़ बनाई जो ईएमएस नंबूदरीपाद के युग के बाद से केरल में किसी नेता को हासिल नहीं हुई थी। 1998 के बाद से उन्होंने पार्टी संगठन और बाद में सरकार — दोनों पर अपना वर्चस्व कायम रखा।
पार्टी के भीतर जो भी उनके संभावित प्रतिद्वंद्वी थे, उन्हें या तो हाशिये पर धकेल दिया गया या राजनीतिक रूप से निष्क्रिय कर दिया गया। 2021 में उन्होंने केरल में चार दशक पुराने सत्ता-परिवर्तन के चक्र को तोड़ते हुए लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को लगातार दूसरे ऐतिहासिक कार्यकाल तक पहुंचाया — यह उपलब्धि उन्हें लगभग अजेय बनाती थी।
सत्ता का अंत और सुरक्षा-कवच का टूटना
पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों में सीपीआई(एम) को करारी हार का सामना करना पड़ा। सत्ता अब वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार के हाथों में है। विजयन के पास वह प्रशासनिक सुरक्षा-कवच नहीं रहा जिसने उन्हें वर्षों तक राजनीतिक रूप से सुरक्षित रखा था।
गौरतलब है कि सीपीआई(एम) के इतिहास में यह अत्यंत दुर्लभ है कि कोई मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य और दो बार मुख्यमंत्री रह चुका नेता अपने परिवार के सदस्यों से जुड़ी वित्तीय जांच के सिलसिले में ईडी की छापेमारी का सामना करे। एक ऐसी पार्टी के लिए जो अपनी वैचारिक शुचिता और संगठनात्मक नैतिकता को सर्वोपरि मानती है, यह घटनाक्रम गहरी राजनीतिक शर्मिंदगी का कारण है।
विडंबना: जब विजयन ने खुद ईडी का मुकाबला किया था
यह ऐसे समय में आया है जब इतिहास एक विचित्र पलटवार कर रहा है। विजयन के पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान केरल सोना तस्करी मामले की जांच में राज्य पुलिस और ईडी के बीच अभूतपूर्व टकराव देखा गया था। तब केरल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही मामला दर्ज किया था और उन पर प्रक्रियागत उल्लंघन का आरोप लगाया था। आलोचकों ने इसे केंद्रीय एजेंसियों का आक्रामक तरीके से राजनीतिक मुकाबला करने की कोशिश बताया था। आज समीकरण पूरी तरह पलट चुके हैं।
पार्टी की प्रतिक्रिया और राजनीतिक आरोप
सीपीआई(एम) पहले ही सड़कों पर उतर आई है। पार्टी का आरोप है कि विजयन को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच एक गुपचुप समझौता हुआ है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में ईडी की जांच जैसे-जैसे तेज हो रही है, विजयन के पास मुख्य रूप से कानूनी रास्ते और राजनीतिक लामबंदी का ही सहारा बचा है।
आगे क्या होगा
केरल की राजनीति के सामने आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह विजयन के लिए महज एक कठिन दौर है, या फिर राज्य के कभी अजेय माने जाने वाले वाम दिग्गज के दीर्घकालिक पतन की शुरुआत। मामले का कानूनी नतीजा चाहे जो भी हो, यह राजनीतिक प्रतीकवाद केरल के वाम आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है।