12 जुलाई 2026
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पिनाराई विजयन पर ईडी की छापेमारी: केरल के अजेय 'सुप्रीमो' का राजनीतिक पतन

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पिनाराई विजयन पर ईडी की छापेमारी: केरल के अजेय 'सुप्रीमो' का राजनीतिक पतन

सारांश

लगभग तीन दशकों तक केरल की वाम राजनीति के निर्विवाद 'सुप्रीमो' रहे पिनाराई विजयन के आवासों पर ईडी की छापेमारी ने एक ऐतिहासिक राजनीतिक पलटवार की तस्वीर खींची है। सत्ता जाने के बाद सुरक्षा-कवच भी हट गया — अब सवाल यह है कि यह एक दौर है या पतन की शुरुआत।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित आवासों पर सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में समन्वित छापेमारी की।
विजयन सीपीआई(एम) के मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य और दो बार केरल के मुख्यमंत्री रह चुके हैं — पार्टी इतिहास में ऐसी कार्रवाई अत्यंत दुर्लभ।
2021 में केरल में चार दशक पुराने सत्ता-परिवर्तन के चक्र को तोड़ने वाले विजयन की पार्टी को हाल के विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा।
सत्ता अब वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार के पास है; विजयन का प्रशासनिक सुरक्षा-कवच समाप्त।
सीपीआई(एम) ने BJP और कांग्रेस पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।
विजयन के पहले कार्यकाल में केरल पुलिस ने खुद ईडी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था — आज स्थिति पूरी तरह पलट चुकी है।

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित आवासों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की समन्वित छापेमारी ने केरल की राजनीति में एक ऐसा मोड़ ला दिया है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक असंभव मानी जाती थी। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले से जुड़ी वित्तीय जांच के सिलसिले में हुई यह कार्रवाई उस नेता के खिलाफ है, जिन्होंने लगभग तीन दशकों तक केरल की वाम राजनीति पर एकछत्र राज किया।

कन्नूर से 'सुप्रीमो' तक का सफर

पिनाराई विजयन ने अपनी राजनीतिक यात्रा कन्नूर जिले के एक प्रभावशाली जमीनी संगठक के रूप में शुरू की थी। धीरे-धीरे उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) के भीतर ऐसी पकड़ बनाई जो ईएमएस नंबूदरीपाद के युग के बाद से केरल में किसी नेता को हासिल नहीं हुई थी। 1998 के बाद से उन्होंने पार्टी संगठन और बाद में सरकार — दोनों पर अपना वर्चस्व कायम रखा।

पार्टी के भीतर जो भी उनके संभावित प्रतिद्वंद्वी थे, उन्हें या तो हाशिये पर धकेल दिया गया या राजनीतिक रूप से निष्क्रिय कर दिया गया। 2021 में उन्होंने केरल में चार दशक पुराने सत्ता-परिवर्तन के चक्र को तोड़ते हुए लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को लगातार दूसरे ऐतिहासिक कार्यकाल तक पहुंचाया — यह उपलब्धि उन्हें लगभग अजेय बनाती थी।

सत्ता का अंत और सुरक्षा-कवच का टूटना

पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों में सीपीआई(एम) को करारी हार का सामना करना पड़ा। सत्ता अब वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार के हाथों में है। विजयन के पास वह प्रशासनिक सुरक्षा-कवच नहीं रहा जिसने उन्हें वर्षों तक राजनीतिक रूप से सुरक्षित रखा था।

गौरतलब है कि सीपीआई(एम) के इतिहास में यह अत्यंत दुर्लभ है कि कोई मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य और दो बार मुख्यमंत्री रह चुका नेता अपने परिवार के सदस्यों से जुड़ी वित्तीय जांच के सिलसिले में ईडी की छापेमारी का सामना करे। एक ऐसी पार्टी के लिए जो अपनी वैचारिक शुचिता और संगठनात्मक नैतिकता को सर्वोपरि मानती है, यह घटनाक्रम गहरी राजनीतिक शर्मिंदगी का कारण है।

विडंबना: जब विजयन ने खुद ईडी का मुकाबला किया था

यह ऐसे समय में आया है जब इतिहास एक विचित्र पलटवार कर रहा है। विजयन के पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान केरल सोना तस्करी मामले की जांच में राज्य पुलिस और ईडी के बीच अभूतपूर्व टकराव देखा गया था। तब केरल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही मामला दर्ज किया था और उन पर प्रक्रियागत उल्लंघन का आरोप लगाया था। आलोचकों ने इसे केंद्रीय एजेंसियों का आक्रामक तरीके से राजनीतिक मुकाबला करने की कोशिश बताया था। आज समीकरण पूरी तरह पलट चुके हैं।

पार्टी की प्रतिक्रिया और राजनीतिक आरोप

सीपीआई(एम) पहले ही सड़कों पर उतर आई है। पार्टी का आरोप है कि विजयन को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच एक गुपचुप समझौता हुआ है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में ईडी की जांच जैसे-जैसे तेज हो रही है, विजयन के पास मुख्य रूप से कानूनी रास्ते और राजनीतिक लामबंदी का ही सहारा बचा है।

आगे क्या होगा

केरल की राजनीति के सामने आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह विजयन के लिए महज एक कठिन दौर है, या फिर राज्य के कभी अजेय माने जाने वाले वाम दिग्गज के दीर्घकालिक पतन की शुरुआत। मामले का कानूनी नतीजा चाहे जो भी हो, यह राजनीतिक प्रतीकवाद केरल के वाम आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आज वही एजेंसी उनके दरवाजे पर है। सत्ता खोने के साथ प्रशासनिक सुरक्षा-कवच का भी हट जाना यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति में संस्थागत स्वायत्तता अभी भी सत्ता-समीकरणों से कितनी प्रभावित है। सीपीआई(एम) का 'राजनीतिक साजिश' का आख्यान पार्टी के लिए तात्कालिक राहत दे सकता है, लेकिन दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए पार्टी को ठोस कानूनी और नैतिक जवाब देना होगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिनाराई विजयन के घर ईडी की छापेमारी क्यों हुई?
ईडी ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले से जुड़ी वित्तीय जांच के सिलसिले में विजयन के परिवार के सदस्यों से संबंधित आरोपों की जांच के तहत यह कार्रवाई की। यह छापेमारी तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित उनके आवासों पर एक साथ की गई।
पिनाराई विजयन केरल की राजनीति में इतने ताकतवर कैसे बने?
विजयन ने 1998 के बाद से सीपीआई(एम) के संगठन और सरकार दोनों पर मजबूत पकड़ बनाई। 2021 में उन्होंने केरल में चार दशक पुराने सत्ता-परिवर्तन के चक्र को तोड़ते हुए एलडीएफ को लगातार दूसरे कार्यकाल तक पहुंचाया, जिससे वे ईएमएस नंबूदरीपाद के बाद राज्य के सबसे प्रभावशाली वाम नेता बन गए।
क्या सीपीआई(एम) ने ईडी की कार्रवाई पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
हाँ, सीपीआई(एम) सड़कों पर उतर आई है और आरोप लगा रही है कि BJP और कांग्रेस के बीच एक गुपचुप राजनीतिक समझौते के तहत विजयन को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
केरल में सत्ता परिवर्तन का विजयन की स्थिति पर क्या असर पड़ा?
हाल के विधानसभा चुनावों में सीपीआई(एम) की हार के बाद सत्ता वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार के पास चली गई। इससे विजयन का वह प्रशासनिक सुरक्षा-कवच समाप्त हो गया जिसने उन्हें वर्षों तक राजनीतिक रूप से सुरक्षित रखा था।
विजयन के मुख्यमंत्री काल में ईडी के साथ क्या हुआ था?
विजयन के पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल में केरल सोना तस्करी मामले की जांच के दौरान केरल पुलिस ने खुद ईडी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और उन पर प्रक्रियागत उल्लंघन का आरोप लगाया था। आलोचकों ने इसे केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक मुकाबला करने की कोशिश बताया था।
राष्ट्र प्रेस
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