एस. जानकी अम्मा के निधन पर PM मोदी ने जताया शोक, बोले — 'संगीत जगत की अपूरणीय क्षति'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रख्यात पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और इसे संगीत एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया है। 88 वर्ष की आयु में 12 जुलाई को मैसूर, कर्नाटक के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हुआ। उनकी पोती अप्सरा वैदुला ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह दुखद सूचना साझा की।
PM मोदी का शोक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार की सुबह एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'प्रसिद्ध पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा का निधन संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। अलग-अलग भाषाओं में उनके गाने कई पीढ़ियों तक लोकप्रिय रहे। उन्होंने बेमिसाल खूबसूरती और विविधता के साथ हर भावना को स्वर दिया। उनकी मधुर आवाज आने वाले सालों में भी सुनने वालों को मंत्रमुग्ध करती रहेगी। दुख की इस घड़ी में उनके परिवार, अनगिनत प्रशंसकों और पूरे संगीत जगत के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।'
एस. जानकी का असाधारण करियर
'दक्षिण की कोकिला' के नाम से विख्यात एस. जानकी ने 1957 में तमिल फिल्म 'विधियिन विलायट्टू' से पार्श्व गायन की दुनिया में कदम रखा था। उसी वर्ष उन्होंने छह अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए — भारतीय संगीत इतिहास में किसी नवोदित गायिका के लिए यह एक दुर्लभ उपलब्धि थी। उनका मलयालम सिनेमा से जुड़ाव भी इसी वर्ष शुरू हुआ।
1970 के दशक से वह मलयालम सिनेमा की सबसे प्रमुख महिला आवाज बन गईं और उस दौर के लगभग सभी दिग्गज संगीत निर्देशकों के साथ काम किया। 1957 से 2017 तक फैले अपने 60 वर्षों के करियर में उन्होंने कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी समेत 20 भाषाओं में 48,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जो उन्हें इतिहास की सर्वाधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली पार्श्व गायिकाओं में शामिल करता है।
पुरस्कार और सम्मान
जानकी ने 1970 में सर्वश्रेष्ठ गायिका के रूप में अपना पहला केरल राज्य फिल्म पुरस्कार जीता और अगले करीब 15 वर्षों तक इस श्रेणी में उनका एकछत्र राज रहा। उन्होंने अपने करियर में कुल चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 33 राज्य फिल्म पुरस्कार अर्जित किए। उन्होंने सर्वाधिक गाने कन्नड़ भाषा में और उसके बाद मलयालम भाषा में गाए।
संगीत जगत की प्रतिक्रिया
उनके निधन की खबर फैलते ही दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनकी पोती अप्सरा वैदुला द्वारा साझा की गई सूचना के बाद अनेक कलाकारों, निर्देशकों और राजनेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी आवाज़ में रची-बसी धुनें आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर बनी रहेंगी।