तिरुवनंतपुरम निगम परिषद में हंगामा: भाजपा पार्षद सुगाथन के इस्तीफे पर एलडीएफ-यूडीएफ से झड़प
सारांश
मुख्य बातें
तिरुवनंतपुरम निगम परिषद में सोमवार, 29 जून 2026 को उस समय अभूतपूर्व हंगामा हो गया, जब न्यायिक हिरासत में बंद भाजपा पार्षद आर. सुगाथन के इस्तीफे की मांग को लेकर एलडीएफ और यूडीएफ पार्षदों ने जोरदार विरोध शुरू किया। धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुँची इस झड़प ने परिषद की पूरी बैठक को ठप कर दिया और परिसर में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
विवाद की जड़: अटेंडेंस रजिस्टर
एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने आरोप लगाया कि अटेंडेंस रजिस्टर को जानबूझकर अलग रखा गया था, ताकि केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत जेल में बंद पार्षद सुगाथन बाद में उस पर हस्ताक्षर कर सकें। जब यूडीएफ पार्षद रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने लगे, तो भाजपा सदस्यों ने रजिस्टर छीन लिया। विपक्षी सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि इस झड़प के दौरान रजिस्टर को फाड़ने की कोशिश की गई।
मुख्य घटनाक्रम
रजिस्टर विवाद के बाद भाजपा, एलडीएफ और यूडीएफ पार्षदों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई, जिससे परिषद की बैठक पूरी तरह ठप हो गई। यूडीएफ पार्षदों ने नारेबाजी की, पोस्टर दिखाए और सदन के वेल में पहुँच गए।
हंगामे के बीच एलडीएफ परिषद दल के नेता एस.पी. दीपक ने मांग की कि सुगाथन के इस्तीफे के मुद्दे को तुरंत एजेंडा में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत हिरासत में लिए गए पार्षद का पद पर बने रहना उचित नहीं है।
महिला पार्षदों से हाथापाई का आरोप
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए यूडीएफ पार्षद के.एस. सबरीनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा पार्षद चेम्पाझांथी उदयन ने झड़प के दौरान कई विपक्षी सदस्यों के साथ हाथापाई की, जिनमें महिला पार्षद भी शामिल थीं। यह आरोप गंभीर हैं और इससे मामले ने राजनीतिक रूप से और अधिक तूल पकड़ लिया है।
सत्तापक्ष का रुख और विपक्ष की प्रतिक्रिया
लगातार विरोध के बावजूद भाजपा के नेतृत्व वाले प्रशासन ने एजेंडा की कार्यवाही पूरी की और जल्दबाजी में बैठक स्थगित कर दी। यूडीएफ और एलडीएफ ने इस कार्यवाही को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि सत्तापक्ष ने लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी की है।
गौरतलब है कि एक दिन पहले निगम कार्यालय में हुए विरोध प्रदर्शन में एलडीएफ पार्षदों के घायल होने की भी खबर आई थी, जिससे माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था। हालात को नियंत्रित रखने के लिए निगम परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
आगे क्या
यह विवाद केरल की स्थानीय निकाय राजनीति में एक नई तल्खी का संकेत है — जहाँ भाजपा, एलडीएफ और यूडीएफ तीनों दल एक-दूसरे के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए हैं। सुगाथन के इस्तीफे और उनकी न्यायिक हिरासत का मुद्दा आने वाले दिनों में परिषद की बैठकों में और गर्मागर्म बहस का कारण बन सकता है।