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तिरुवनंतपुरम नगर निगम शपथ विवाद: मेयर कार्यालय में झड़प, सीपीआई(एम) पार्षद घायल

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तिरुवनंतपुरम नगर निगम शपथ विवाद: मेयर कार्यालय में झड़प, सीपीआई(एम) पार्षद घायल

सारांश

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में शपथ का विवाद अब सड़क पर आ गया है — केरल हाईकोर्ट द्वारा 20 भाजपा पार्षदों की शपथ रद्द किए जाने के बाद दोबारा शपथ की प्रक्रिया पर एलडीएफ ने सवाल उठाए और मेयर कार्यालय में झड़प हो गई। मेयर व डिप्टी मेयर चुनाव की वैधता अब दाँव पर है।

मुख्य बातें

केरल उच्च न्यायालय ने 20 भाजपा पार्षदों की शपथ को वैधानिक प्रारूप न अपनाने के कारण बुधवार को निरस्त कर दिया।
पार्षदों ने कुछ ही घंटों में दोबारा शपथ ली, लेकिन एलडीएफ और यूडीएफ ने इस प्रक्रिया को भी अनियमित बताया।
25 जून को निगम कार्यालय में धक्का-मुक्की में सीपीआई(एम) पार्षद सिंधु ससी के सिर में चोट आई, उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
राजेश ने विपक्ष पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया; भाजपा का दावा है कि कई पार्षद और मेयर भी घायल हुए।
विपक्ष ने मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव को अमान्य घोषित कर नए सिरे से मतदान कराने की माँग की है।
एलडीएफ पार्षद निगम कार्यालय में क्रमिक भूख हड़ताल और धरना जारी रखे हुए हैं।

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा पार्षदों के शपथ ग्रहण को लेकर उपजा कानूनी और राजनीतिक टकराव गुरुवार, 25 जून को उस वक्त हिंसक रूप ले गया, जब निगम कार्यालय परिसर में सत्तापक्ष और विपक्षी पार्षदों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हो गई। इस झड़प में कट्टायिकोनम वार्ड की सीपीआई(एम) पार्षद सिंधु ससी के सिर में चोट आई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

विवाद तब और भड़का जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर वी.वी. राजेश कार्यालय पहुँचे। उस समय वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पार्षद भाजपा पार्षदों के इस्तीफे की माँग को लेकर मेयर कार्यालय का घेराव किए हुए थे। एलडीएफ पार्षदों ने मेयर राजेश को प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद भाजपा पार्षद बीच में आ गए और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने में पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।

भाजपा नेताओं का दावा है कि झड़प में उनके कई पार्षदों और स्वयं मेयर को भी चोटें आई हैं, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

विवाद की जड़: केरल हाईकोर्ट का फैसला

यह संकट बुधवार को केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद और गहरा गया, जिसमें 20 भाजपा पार्षदों की शपथ को निरस्त कर दिया गया था। अदालत ने पाया कि इन पार्षदों ने निर्धारित वैधानिक प्रारूप के अनुसार शपथ लेने के बजाय अपने-अपने आराध्य देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी, जो नियमसम्मत नहीं थी। अदालत के निर्देश के कुछ ही घंटों के भीतर इन पार्षदों ने दोबारा 'ईश्वर के नाम पर' शपथ ग्रहण कर ली।

गौरतलब है कि एलडीएफ और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) दोनों का आरोप है कि यह दूसरी शपथ प्रक्रिया भी उचित सूचना दिए बिना और विपक्षी पार्षदों की अनुपस्थिति में पूरी की गई, इसलिए यह भी नियमों के अनुरूप नहीं है।

विपक्ष की माँग और तर्क

विपक्षी दलों का तर्क है कि 20 पार्षदों की नई पात्रता का सीधा असर मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के समय निगम परिषद की संरचना पर पड़ता है। इसलिए, उनके अनुसार, दोनों पदों के चुनाव भी अमान्य घोषित किए जाने चाहिए और नए सिरे से मतदान कराया जाना चाहिए। एलडीएफ पार्षद अपनी माँगों को लेकर निगम कार्यालय में क्रमिक भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

मेयर की प्रतिक्रिया

कार्यालय में प्रवेश के बाद मेयर वी.वी. राजेश ने विपक्ष पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'सामान्य नागरिकों को भी कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया गया। किसी लोकतांत्रिक संस्था में इस तरह की हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि किसी निर्वाचित मेयर को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने का अधिकार विपक्ष को नहीं है।

आगे क्या होगा

यह मामला अब कानूनी दायरे से निकलकर व्यापक राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव की वैधता का प्रश्न अभी अनुत्तरित है और संभावना है कि विपक्ष इसे अदालत में चुनौती देगा। तिरुवनंतपुरम नगर निगम की कार्यप्रणाली तब तक अनिश्चितता में बनी रह सकती है जब तक इस विवाद का कानूनी या राजनीतिक हल नहीं निकलता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह केरल में भाजपा की बढ़ती नगरीय उपस्थिति और एलडीएफ की उसे संस्थागत स्तर पर रोकने की कोशिश के बीच की लड़ाई है। हाईकोर्ट ने शपथ रद्द कर एक स्पष्ट संदेश दिया, लेकिन दोबारा शपथ की प्रक्रिया में पारदर्शिता न बरतकर भाजपा ने विपक्ष को नया हथियार थमा दिया। मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव की वैधता पर उठे सवाल अब अदालत तक जाएंगे, और तब तक निगम की प्रशासनिक कार्यप्रणाली ठप रहने का जोखिम बना रहेगा — जिसका खामियाजा अंततः तिरुवनंतपुरम के नागरिकों को उठाना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में शपथ विवाद क्या है?
केरल उच्च न्यायालय ने 20 भाजपा पार्षदों की शपथ इसलिए रद्द कर दी क्योंकि उन्होंने निर्धारित वैधानिक प्रारूप के बजाय अपने आराध्य देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी। अदालत के आदेश के बाद पार्षदों ने दोबारा शपथ ली, लेकिन विपक्ष ने इस प्रक्रिया को भी अनियमित बताया।
25 जून को निगम कार्यालय में क्या हुआ?
मेयर वी.वी. राजेश के कार्यालय पहुँचने पर एलडीएफ पार्षदों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की हो गई। इस झड़प में सीपीआई(एम) पार्षद सिंधु ससी के सिर में चोट आई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
एलडीएफ और यूडीएफ मेयर चुनाव को अमान्य क्यों मान रहे हैं?
विपक्ष का तर्क है कि 20 पार्षदों की पात्रता मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के समय अनिश्चित थी, इसलिए उस समय निगम परिषद की संरचना सही नहीं थी। उनकी माँग है कि दोनों पदों के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जाएँ।
दोबारा शपथ को विपक्ष ने अनियमित क्यों बताया?
एलडीएफ और यूडीएफ दोनों का कहना है कि दोबारा शपथ की प्रक्रिया बिना उचित सूचना और विपक्षी पार्षदों की अनुपस्थिति में पूरी की गई। उनके अनुसार, इस प्रकार की प्रक्रिया नियमसम्मत नहीं मानी जा सकती।
अब इस विवाद का क्या होगा?
फिलहाल एलडीएफ पार्षद निगम कार्यालय में क्रमिक भूख हड़ताल और धरना जारी रखे हुए हैं। मेयर व डिप्टी मेयर चुनाव की वैधता का मामला अदालत में जाने की संभावना है, जिससे निगम की कार्यप्रणाली अनिश्चितता में बनी रह सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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