तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के 19 भाजपा पार्षदों ने दोबारा ली शपथ, केरल हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट द्वारा पिछली शपथ को अमान्य घोषित किए जाने के बाद तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 19 भाजपा पार्षदों ने बुधवार, 24 जून को दोबारा शपथ ग्रहण की। कोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया था क्योंकि इन पार्षदों ने अपनी पहली शपथ में कई देवी-देवताओं और शहीदों के नाम का उल्लेख किया था, जो केरल नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं था। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजधानी में एक नए राजनीतिक और कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है।
शपथ ग्रहण समारोह का घटनाक्रम
मेयर वीवी राजेश ने कॉर्पोरेशन कार्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में पार्षदों को शपथ दिलाई। शपथ लेने वालों में डिप्टी मेयर आशा नाथ और अन्य निर्वाचित पार्षद शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि विपक्षी दल इस समारोह से पूरी तरह दूर रहे, जिससे समारोह का राजनीतिक स्वर और भी स्पष्ट हो गया।
केरल हाई कोर्ट का फैसला और कानूनी पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि केरल नगरपालिका अधिनियम में 'ईश्वर' शब्द की विस्तृत व्याख्या का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए, कई देवी-देवताओं के नाम पर ली गई शपथ को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचित प्रतिनिधि या तो ईश्वर के नाम पर शपथ ले सकते हैं या फिर सत्यनिष्ठ प्रतिज्ञान (solemn affirmation) कर सकते हैं — इसके अलावा कोई तीसरा विकल्प कानूनन मान्य नहीं है।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों के बाद 20 भाजपा पार्षदों द्वारा ली गई शपथ को अमान्य घोषित किया था और उन्हें निर्देश दिया था कि वे चार सप्ताह के भीतर अधिनियम के अनुसार पुनः शपथ लें। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि शपथ के वैध होने तक ये पार्षद निर्वाचित सदस्यों के अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते।
एलडीएफ की आपत्ति और नई शिकायत
बुधवार के शपथ ग्रहण समारोह के साथ यह विवाद समाप्त नहीं हुआ। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने स्थानीय स्व-शासन विभाग के प्रधान सचिव के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। एलडीएफ का आरोप है कि दोबारा शपथ लेने की प्रक्रिया में हाई कोर्ट की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और उसने इस प्रक्रिया की आधिकारिक जाँच की माँग की है।
यह ऐसे समय में आया है जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा और सत्तारूढ़ एलडीएफ के बीच पहले से ही तनातनी का माहौल है। आलोचकों का कहना है कि भाजपा ने पहली शपथ में धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया, जबकि भाजपा का कहना है कि उसने कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन किया है।
भाजपा का पक्ष
भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि उसने हाई कोर्ट के आदेश का पूर्णतः अनुपालन किया है और दोबारा शपथ ग्रहण समारोह विधिसम्मत तरीके से संपन्न हुआ। पार्टी ने एलडीएफ की शिकायत को राजनीति से प्रेरित बताया है।
आगे क्या होगा
एलडीएफ की शिकायत के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक जाँच के दायरे में आ सकता है। यदि प्रधान सचिव शिकायत को संज्ञान में लेते हैं, तो दोबारा शपथ की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और गहरा होने की संभावना है।