11 अगस्त 2026
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तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के 19 भाजपा पार्षदों ने दोबारा ली शपथ, केरल हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुआ विशेष समारोह

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तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के 19 भाजपा पार्षदों ने दोबारा ली शपथ, केरल हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुआ विशेष समारोह

सारांश

केरल हाई कोर्ट ने देवी-देवताओं के नाम पर शपथ को अमान्य ठहराया, तो तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 19 भाजपा पार्षदों को 24 जून को दोबारा शपथ लेनी पड़ी। लेकिन एलडीएफ ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रधान सचिव से जाँच माँगी — विवाद अभी खत्म नहीं हुआ।

मुख्य बातें

तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 19 भाजपा पार्षदों ने 24 जून को मेयर वीवी राजेश की उपस्थिति में दोबारा शपथ ग्रहण की।
केरल हाई कोर्ट ने पाया कि पार्षदों ने अनेक देवी-देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी, जो केरल नगरपालिका अधिनियम के तहत अमान्य है।
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने स्पष्ट किया कि शपथ केवल 'ईश्वर के नाम' या 'सत्यनिष्ठ प्रतिज्ञान' के रूप में ही ली जा सकती है।
कोर्ट ने पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर पुनः शपथ लेने और तब तक निर्वाचित अधिकार न उपयोग करने का निर्देश दिया था।
एलडीएफ ने स्थानीय स्व-शासन विभाग के प्रधान सचिव से शिकायत कर दोबारा शपथ की प्रक्रिया की आधिकारिक जाँच माँगी।

केरल हाई कोर्ट द्वारा पिछली शपथ को अमान्य घोषित किए जाने के बाद तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 19 भाजपा पार्षदों ने बुधवार, 24 जून को एक विशेष समारोह में दोबारा शपथ ग्रहण की। कोर्ट ने पाया था कि पार्षदों ने अनेक देवी-देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी, जो केरल नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजधानी में एक नए राजनीतिक और कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है।

शपथ ग्रहण समारोह का विवरण

मेयर वीवी राजेश ने कॉर्पोरेशन कार्यालय में आयोजित विशेष समारोह में पार्षदों को शपथ दिलाई। शपथ लेने वालों में डिप्टी मेयर आशा नाथ सहित अन्य निर्वाचित पार्षद शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि विपक्षी दल इस समारोह से पूरी तरह दूर रहे और उन्होंने इसमें भाग नहीं लिया।

यह दोबारा शपथ ग्रहण स्थानीय निकाय चुनावों के बाद 20 भाजपा पार्षदों द्वारा ली गई मूल शपथ को हाई कोर्ट द्वारा अमान्य ठहराए जाने के सीधे परिणामस्वरूप हुआ। कोर्ट ने पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर अधिनियम के अनुसार पुनः शपथ लेने का निर्देश दिया था और यह भी स्पष्ट किया था कि तब तक वे निर्वाचित सदस्यों के अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते।

केरल हाई कोर्ट का अहम फैसला

न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केरल नगरपालिका अधिनियम में 'ईश्वर' शब्द की विस्तृत व्याख्या का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए अनेक देवी-देवताओं के नाम पर ली गई शपथ को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि चुने हुए प्रतिनिधि केवल दो विकल्पों में से एक चुन सकते हैं — या तो ईश्वर के नाम पर शपथ लें, या फिर सत्यनिष्ठ प्रतिज्ञान (solemn affirmation) करें। कानूनी प्रारूप में बहुदेवीय संदर्भों को शामिल करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

एलडीएफ की आपत्ति और शिकायत

शपथ ग्रहण समारोह के बाद भी विवाद थमा नहीं। वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने स्थानीय स्व-शासन विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। एलडीएफ का आरोप है कि दोबारा शपथ लेने की प्रक्रिया में हाई कोर्ट की शर्तों का पूर्णतः पालन नहीं किया गया और उसने इस पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक जाँच की माँग की है।

गौरतलब है कि यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब केरल में स्थानीय निकाय राजनीति पहले से ही सत्तारूढ़ एलडीएफ और भाजपा के बीच तनावपूर्ण है। यह पहली बार नहीं है जब शपथ ग्रहण की प्रक्रिया किसी राज्य में कानूनी विवाद का केंद्र बनी हो।

भाजपा का पक्ष

भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि उसने हाई कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया है और दोबारा शपथ ग्रहण समारोह कोर्ट के आदेश के अनुसार ही संपन्न हुआ। पार्टी ने एलडीएफ की शिकायत को राजनीति से प्रेरित बताया है।

आगे क्या होगा

एलडीएफ की शिकायत और भाजपा के पलटवार के साथ यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक जाँच के एक नए दौर की ओर बढ़ता दिख रहा है। स्थानीय स्व-शासन विभाग के प्रधान सचिव की प्रतिक्रिया और संभावित अदालती कार्यवाही यह तय करेगी कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा पार्षदों की स्थिति कानूनी रूप से कितनी मज़बूत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल वैध है कि क्या दोबारा शपथ की प्रक्रिया कोर्ट के निर्देशों की भावना के अनुरूप थी। यह मामला आगे चलकर स्थानीय निकायों में शपथ प्रारूप को लेकर राष्ट्रीय बहस का आधार बन सकता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने तिरुवनंतपुरम के भाजपा पार्षदों की शपथ क्यों अमान्य की?
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने पाया कि पार्षदों ने अनेक देवी-देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी, जो केरल नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अधिनियम केवल 'ईश्वर के नाम पर शपथ' या 'सत्यनिष्ठ प्रतिज्ञान' की अनुमति देता है।
दोबारा शपथ ग्रहण समारोह कब और कहाँ हुआ?
यह समारोह 24 जून को तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन कार्यालय में हुआ, जिसमें मेयर वीवी राजेश ने 19 भाजपा पार्षदों को शपथ दिलाई। डिप्टी मेयर आशा नाथ भी इनमें शामिल रहीं।
एलडीएफ ने दोबारा शपथ ग्रहण पर क्या आपत्ति जताई?
एलडीएफ ने स्थानीय स्व-शासन विभाग के प्रधान सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि दोबारा शपथ की प्रक्रिया में हाई कोर्ट की शर्तों का पूर्णतः पालन नहीं हुआ। उसने इस पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक जाँच की माँग की है।
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार पार्षदों के पास कितना समय था?
कोर्ट ने पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर केरल नगरपालिका अधिनियम के अनुसार पुनः शपथ लेने का निर्देश दिया था। इस अवधि के दौरान वे निर्वाचित सदस्यों के अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते थे।
इस विवाद का आगे क्या होगा?
एलडीएफ की शिकायत के बाद स्थानीय स्व-शासन विभाग की प्रतिक्रिया और संभावित अदालती कार्यवाही यह तय करेगी कि भाजपा पार्षदों की स्थिति कानूनी रूप से वैध है या नहीं। भाजपा का कहना है कि उसने कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया है।
राष्ट्र प्रेस
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