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तिरुवनंतपुरम नगर निगम: पार्षद सुगथन की रिहाई पर टिका भाजपा का बहुमत, 24 जुलाई है आखिरी तारीख

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तिरुवनंतपुरम नगर निगम: पार्षद सुगथन की रिहाई पर टिका भाजपा का बहुमत, 24 जुलाई है आखिरी तारीख

सारांश

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा का पहला शासन एक पार्षद की जेल से रिहाई पर टिका है। KAAPA में बंद सुगथन यदि 24 जुलाई तक शपथ नहीं ले पाए, तो पार्टी की संख्या 50 से घटकर 49 हो जाएगी और केरल के सबसे बड़े नगर निकाय में भाजपा का बहुमत खत्म हो जाएगा।

मुख्य बातें

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा के पास 101 में से 50 पार्षद और एक निर्दलीय का समर्थन है — यही उसका बहुमत है।
सुगथन KAAPA के तहत न्यायिक हिरासत में हैं; 24 जुलाई तक शपथ न ली तो सीट स्थायी रूप से जाएगी।
KAAPA सलाहकार बोर्ड ने 29 जून को सुनवाई की, लेकिन जमानत पर अभी तक कोई निर्णय नहीं।
सुगथन की सीट जाने पर भाजपा की संख्या 49 रह जाएगी — साधारण बहुमत से एक कम।
LDF के पास 29 और UDF के पास 20 पार्षद हैं; विपक्ष को तत्काल सत्ता नहीं मिलेगी, लेकिन भाजपा की स्थिति कमज़ोर होगी।

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का बहुमत एक जेल में बंद पार्षद की रिहाई पर टिका है। केरल असामाजिक गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (KAAPA) के तहत हिरासत में लिए गए पार्षद आर. सुगथन यदि 24 जुलाई से पहले रिहा होकर पुनः शपथ नहीं ले पाते, तो भाजपा 101 सदस्यीय निगम में अपना साधारण बहुमत गँवा देगी। यह केरल के सबसे बड़े नगर निकाय में पार्टी के ऐतिहासिक पहले शासन के लिए सबसे बड़ा संकट बन गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों को पद की शपथ का उल्लंघन करने के आधार पर अयोग्य घोषित किया था और उन्हें चार सप्ताह के भीतर पुनः शपथ लेने का निर्देश दिया था। इनमें से 19 पार्षदों ने समय रहते यह प्रक्रिया पूरी कर ली। अकेले सुगथन न्यायिक हिरासत में होने के कारण ऐसा नहीं कर सके।

गौरतलब है कि सुगथन की जमानत याचिका पर KAAPA सलाहकार बोर्ड ने 29 जून को सुनवाई की, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं आया है। इसी देरी के चलते वे केरल उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी में हैं।

भाजपा के लिए राजनीतिक दाँव

वर्तमान में 101 सदस्यीय तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा के पास 50 पार्षद हैं और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन प्राप्त है — इसी मामूली बहुमत के बल पर पार्टी ने पहली बार इस निकाय में सत्ता हासिल की थी। यदि सुगथन 24 जुलाई की समय-सीमा से पहले शपथ नहीं ले पाते, तो वे अपनी सीट स्थायी रूप से गँवा देंगे और भाजपा की प्रभावी संख्या घटकर 49 रह जाएगी।

यह आँकड़ा साधारण बहुमत की सीमा से एक कम होगा, जिससे परिषद में पार्टी की स्थिति अनिश्चित हो जाएगी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में अड़चनें आ सकती हैं।

विपक्ष की स्थिति

निगम में वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के पास 29 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) के पास 20 पार्षद हैं। दूसरा निर्दलीय पार्षद वामपंथी दलों के निकट माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि इस समीकरण से विपक्ष को तत्काल सत्ता नहीं मिलेगी, लेकिन भाजपा की स्थिति इतनी कमज़ोर ज़रूर हो जाएगी कि बजट पास कराने से लेकर महापौर चुनाव तक हर कदम पर उसे जद्दोजहद करनी पड़ेगी।

आगे क्या होगा

भाजपा की उम्मीदें अब उच्च न्यायालय में सुगथन की जमानत याचिका पर टिकी हैं। यदि न्यायालय 24 जुलाई से पहले राहत देता है, तो पार्टी अपना बहुमत बचा सकती है। यह मामला केरल में नगर निकाय राजनीति की उस नाज़ुक प्रकृति को उजागर करता है जहाँ एक सीट का फर्क सत्ता और विपक्ष के बीच की रेखा खींच सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक कानूनी पेच, और ऐतिहासिक बहुमत खतरे में। KAAPA एक कठोर निवारक हिरासत कानून है जो ज़मानत को जटिल बनाता है, और इसका राजनीतिक दुरुपयोग का इतिहास भी रहा है — यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस मामले में समय की संयोग महज़ इत्तेफाक है। भाजपा के लिए असली परीक्षा यह है कि वह न्यायिक राहत के बिना निगम चलाने की वैकल्पिक रणनीति तैयार करे, क्योंकि 24 जुलाई की समय-सीमा अदालत की गति पर निर्भर है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा का बहुमत खतरे में क्यों है?
भाजपा के पार्षद आर. सुगथन KAAPA के तहत न्यायिक हिरासत में हैं और 24 जुलाई तक शपथ न ले पाने पर उनकी सीट स्थायी रूप से जाएगी। इससे भाजपा की संख्या 50 से घटकर 49 हो जाएगी, जो 101 सदस्यीय निगम में साधारण बहुमत से एक कम है।
आर. सुगथन को किस आरोप में हिरासत में लिया गया है?
सुगथन को केरल असामाजिक गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (KAAPA) के तहत हिरासत में लिया गया है। KAAPA सलाहकार बोर्ड ने 29 जून को उनके मामले की सुनवाई की, लेकिन अभी तक जमानत पर कोई निर्णय नहीं आया है।
24 जुलाई की समय-सीमा क्यों महत्वपूर्ण है?
केरल उच्च न्यायालय ने 20 पार्षदों को शपथ उल्लंघन के लिए अयोग्य घोषित करते हुए चार सप्ताह में पुनः शपथ लेने का निर्देश दिया था। 19 पार्षदों ने यह पूरा कर लिया, लेकिन सुगथन हिरासत में होने के कारण नहीं कर सके। 24 जुलाई यह समय-सीमा समाप्त होने की अनुमानित तारीख है।
सुगथन की सीट जाने पर विपक्ष को सीधे सत्ता मिलेगी क्या?
नहीं। LDF के पास 29 और UDF के पास 20 पार्षद हैं, जो मिलकर भी बहुमत के लिए पर्याप्त नहीं हैं। लेकिन भाजपा बहुमत खोने के बाद प्रशासनिक निर्णयों और महत्वपूर्ण चुनावों में कमज़ोर स्थिति में आ जाएगी।
भाजपा अब क्या कदम उठा रही है?
सुगथन KAAPA सलाहकार बोर्ड के निर्णय में देरी के बाद केरल उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने की तैयारी में हैं। भाजपा की उम्मीदें 24 जुलाई से पहले न्यायिक राहत मिलने पर टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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