केरल में कांग्रेस CLP की बैठक गुरुवार को, मुख्यमंत्री पद के लिए सतीशन, चेन्निथला और वेणुगोपाल में मुकाबला
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नवनिर्वाचित विधायकों की पहली बैठक गुरुवार, 6 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम स्थित पार्टी मुख्यालय में होने जा रही है। सुबह 10:30 बजे निर्धारित इस कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों पर विधायकों की राय जानी जाएगी। यह बैठक केरल में नई सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया का पहला बड़ा कदम मानी जा रही है।
बैठक की पृष्ठभूमि और महत्व
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने पुष्टि की कि CLP बैठक पार्टी मुख्यालय में आयोजित होगी। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने इस चुनाव में रिकॉर्ड 63 सीटें जीती हैं, जिससे पार्टी सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में है। गौरतलब है कि UDF करीब एक दशक बाद सत्ता में वापसी कर रहा है, जो इस बैठक को और अधिक ऐतिहासिक बनाता है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीन बड़े नाम
मुख्यमंत्री पद के लिए मुख्य रूप से तीन नेताओं के नाम सबसे आगे हैं। वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल — तीनों के पास पार्टी के भीतर उल्लेखनीय समर्थन है। बीते कुछ दिनों में अलग-अलग खेमे अपने-अपने नेता के समर्थन में माहौल बनाने में सक्रिय रहे हैं, जिससे यह मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अभी तक पार्टी हाईकमान की ओर से किसी एक नाम पर स्पष्टता नहीं आई है।
पर्यवेक्षकों की भूमिका
पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और अजय माकन को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पर्यवेक्षक विधायकों से व्यक्तिगत रूप से भी बातचीत कर सकते हैं, ताकि बिना किसी दबाव के उनकी राय सामने आ सके। इस प्रक्रिया के ज़रिये केवल संख्यात्मक समर्थन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक दावेदार की व्यापक स्वीकार्यता का भी आकलन किया जाएगा।
आगे क्या होगा
पर्यवेक्षक विधायकों की राय एकत्र कर पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट सौंपेंगे, जो अंतिम रूप से मुख्यमंत्री के नाम पर निर्णय लेगा। यह ज़रूरी नहीं कि अंतिम फैसला इसी बैठक में आ जाए, लेकिन इससे मिलने वाले संकेत आगे की दिशा तय करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सत्ता परिवर्तन के साथ राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। अब सभी की नज़रें इस पर हैं कि कांग्रेस अपनी रिकॉर्ड जीत को कितनी जल्दी एकजुट नेतृत्व में तब्दील कर पाती है।