जयशंकर-रीसिंगर वार्ता: भारत-ऑस्ट्रिया सुरक्षा-रक्षा साझेदारी को मिली नई गति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री बीट मेनल-रीसिंगर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें सुरक्षा-रक्षा सहयोग, आर्थिक संबंध और संयुक्त राष्ट्र ढाँचे में साझा भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऑस्ट्रियाई चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की अप्रैल 2026 में हुई भारत यात्रा के दौरान हुए समझौतों की प्रगति-समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।
बैठक की पृष्ठभूमि
जयशंकर ने आरंभिक संबोधन में अतिथि प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि अप्रैल में चांसलर की यात्रा 'बेहद फलदायी' रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बैठक का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रियाई नेतृत्व के बीच हुई उस बैठक के बाद बनी सहमति के क्रियान्वयन की समीक्षा करना है। विदेश मंत्रालय (MEA) में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज सहित वरिष्ठ अधिकारी भी इस वार्ता में उपस्थित रहे।
सुरक्षा-रक्षा सहयोग पर जोर
जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी 'आगे बढ़ रही है' और यह भारत-ऑस्ट्रिया रणनीतिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 'विश्व के लिए यह वाकई जटिल समय है' और इसीलिए दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर सहयोग स्वाभाविक है।
UNSC सदस्यता और बहुपक्षीय सहयोग
जयशंकर ने ऑस्ट्रिया को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अस्थायी सदस्य बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ढाँचे में दोनों देशों के सहयोग का लंबा इतिहास रहा है और इसे आगे जारी रखने की इच्छाशक्ति दोनों पक्षों में है। गौरतलब है कि ऑस्ट्रिया 2027-28 कार्यकाल के लिए UNSC का अस्थायी सदस्य निर्वाचित हुआ है।
आर्थिक और जन-संबंध
विदेश मंत्री ने माना कि द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग 'अच्छा चल रहा है, लेकिन इसमें और सुधार की गुंजाइश है।' उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन और लोगों के आपसी संपर्क को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में गिनाया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के 'आने वाले महीनों में लागू होने' की संभावना को भी उन्होंने सकारात्मक संकेत के रूप में रेखांकित किया।
आगे की राह
इस बैठक के नतीजे भारत-ऑस्ट्रिया रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने का काम करेंगे। भारत-EU FTA के करीब आने के साथ ऑस्ट्रिया जैसे यूरोपीय भागीदारों के साथ रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग और गहरा होने की संभावना है।