मणिपुरी टट्टू संरक्षण: पालकों को अब ₹10,000 वार्षिक प्रोत्साहन, बजट में ₹30 लाख आवंटित
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर सरकार ने राज्य की लुप्तप्राय स्वदेशी अश्व प्रजाति — मणिपुरी टट्टू — के संरक्षण को गति देते हुए पालकों को दी जाने वाली वार्षिक प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर प्रति टट्टू ₹10,000 करने की घोषणा की है। पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विभाग के निदेशक एल. अरुणकुमार सिंह ने 28 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। वार्षिक बजट में इस प्रयोजन के लिए ₹30 लाख की राशि पहले ही आवंटित की जा चुकी है।
प्रोत्साहन वृद्धि की पृष्ठभूमि
निदेशक अरुणकुमार सिंह के अनुसार, पिछले वर्ष राज्यपाल के माध्यम से 1,150 टट्टू पालकों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई थी। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह द्वारा टट्टू पंजीकरण प्रणाली (पीआरएस) के शुभारंभ के बाद, विभाग ने प्रति पालक वार्षिक राशि को ₹10,000 तक बढ़ाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे मंजूरी मिल गई है। पीआरएस का उद्देश्य राज्य में टट्टुओं की कुल संख्या का सटीक निर्धारण करना है, और विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार इस वर्ष इनकी संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
मणिपुरी टट्टू: सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
मणिपुरी टट्टू देश की सबसे पुरानी मान्यता प्राप्त स्वदेशी घोड़े की नस्लों में से एक है। यह नस्ल अपनी बुद्धिमत्ता, चपलता और सहनशक्ति के लिए विख्यात है तथा सदियों से पोलो और घुड़दौड़ से जुड़ी रही है। विशेषज्ञों के अनुसार मणिपुरी टट्टू को पोलो के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे पुरानी नस्लों में गिना जाता है, जो समूचे एशिया में खेली जाने वाली इस परंपरागत खेल विधा का अभिन्न हिस्सा रही है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के समन्वय से संचालित क्षेत्रीय विकास और ब्रांडिंग ढाँचे के अंतर्गत मणिपुर का निर्धारित विशिष्ट विक्रय प्रस्ताव (यूएसपी) उसकी पोलो विरासत को घोषित किया गया है। इस पहल में आनुवंशिक-आधारित चयनात्मक प्रजनन और अवसंरचना विकास — दो प्रमुख घटक शामिल हैं।
पशुधन कल्याण की व्यापक पहलें
अरुणकुमार सिंह ने बताया कि विभाग राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत गायों, भैंसों और सूअरों सहित अन्य पशुओं का बीमा करा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से 28 अक्टूबर 2026 तक 2,456 जानवरों का बीमा कराया जा चुका है। इसके अलावा, एएससीएडी योजना के तहत लंपी स्किन डिजीज, अफ्रीकन स्वाइन फीवर, हेमरेजिक सेप्टीसीमिया, ब्लैक क्वार्टर और रेबीज जैसी बीमारियों के विरुद्ध नियमित टीकाकरण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मुर्गियों का टीकाकरण भी इस दायरे में शामिल है।
मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा का विस्तार
11 जुलाई 2024 को शुरू की गई 33 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ (एमवीयू) राज्यभर में सक्रिय हैं। पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 के ज़रिए इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। 1 अप्रैल से 28 अक्टूबर 2026 तक इस सेवा को 7,205 मामले प्राप्त हुए, जिनमें से 693 मामलों का समाधान फोन पर ही हो गया और 6,512 मामलों में पशु चिकित्सकों ने घर पर जाकर सेवा प्रदान की। साथ ही राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के तहत कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों का निर्माण कार्य भी जारी है।
आगे की राह
पीआरएस के माध्यम से राज्य में टट्टुओं की सटीक जनगणना होने के बाद प्रोत्साहन राशि के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता आने की उम्मीद है। मणिपुर सरकार और केंद्रीय मंत्रालय की संयुक्त भागीदारी से यह संरक्षण प्रयास राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हो सकता है।