पीएम मोदी और ऑस्ट्रियाई चांसलर के बीच व्यापार, निवेश और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर महत्वपूर्ण वार्ता
सारांश
Key Takeaways
- भारत और ऑस्ट्रिया के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने का प्रयास।
- ग्रीन टेक्नोलॉजी में सहयोग की संभावनाएं।
- स्टॉकर का भारत दौरा एशिया में उनका पहला आधिकारिक दौरा है।
- भारत के विकास और निवेश में बढ़ती गति।
- महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करना।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने गुरुवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक द्विपक्षीय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, ग्रीन टेक्नोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना था।
चांसलर स्टॉकर ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने से पहले राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया, "ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने बापू और उनके आदर्शों को याद करते हुए राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी, उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की और गांधीजी के शांति, अहिंसा और वैश्विक सद्भाव के संदेश पर विचार किया।"
स्टॉकर अपनी पहली यात्रा पर भारत आए हैं, जो उनके एशिया में पहले आधिकारिक दौरे के रूप में भी जाना जाता है। इस दौरे का उद्देश्य व्यापार, निवेश और उभरती टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करना है।
बुधवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ऑस्ट्रियाई चांसलर के साथ मुलाकात की थी और आशा व्यक्त की थी कि गुरुवार को होने वाली बैठक से दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे।
चांसलर स्टॉकर ने भारत की विकास यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि देश बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत यूरोपीय संघ के लिए दक्षिण एशिया में सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है।
स्टॉकर ने भारत पहुंचने के बाद एक्स पर लिखा, “भारत लगभग 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और बुनियादी ढांचे तथा तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। ऑस्ट्रिया जैसे छोटे लेकिन अत्यधिक नवोन्मेषी निर्यातक देश के लिए यह एक बड़ा अवसर है।”
उन्होंने कहा, “वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में मजबूत साझेदारियां ही आर्थिक सफलता की कुंजी हैं। इसीलिए, मैं अगले तीन दिनों के लिए नई दिल्ली में हूं ताकि ठोस ढांचा तैयार किया जा सके जिससे ऑस्ट्रियाई कंपनियां नई साझेदारियों, सहयोग और बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से इस विकास का लाभ उठा सकें।”