दिल्ली वायु प्रदूषण: पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी बोलीं, 'GRAP काफी नहीं, साल भर चाहिए मिशन-मोड कार्रवाई'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ने पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया गया है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने 28 अक्टूबर 2026 को कहा कि इस बार GRAP समय से पहले शुरू हुआ, जो सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली चुनौती इसके क्रियान्वयन और वर्षभर की निरंतरता में है। उनके अनुसार, मौसमी उपायों से स्थायी समाधान नहीं मिल सकता।
GRAP की समयबद्धता — सुधार, पर पर्याप्त नहीं
कंधारी ने कहा कि GRAP हर साल आता है, लेकिन इस बार इस पर पहले से चर्चा हुई और इसे समय पर लागू किया गया। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा 'विंटर एक्शन प्लान' को लेकर सक्रिय दिख रहे हैं और सख्त नियमों की बात कर रहे हैं। हालांकि, कंधारी का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में भी ऐसी घोषणाएँ होती रही हैं — असली परीक्षा जमीनी क्रियान्वयन की है।
क्रियान्वयन में बड़ी खामियाँ
कंधारी ने सवाल उठाया कि यदि सीमा चौकियों पर वाहनों की जाँच की जाए, तो वहाँ लाखों गाड़ियाँ रुकेंगी — पर जाँच के लिए न पर्याप्त कर्मी हैं और न विशेष प्रशिक्षण। उन्होंने यह भी पूछा कि निर्माण स्थलों पर नियमों के उल्लंघन के लिए क्या कोई 'क्विक रिएक्शन टीम' उपलब्ध है? उनके अनुसार, शिकायत दर्ज होने और कार्रवाई होने के बीच के लंबे अंतराल में प्रदूषण बेरोकटोक जारी रहता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा — 'अगर सरकार की मंशा साफ है और वह सक्रिय है, तो सख्ती को एक व्यवस्थित कार्य योजना के साथ जोड़ना होगा। यह काम पूरे साल चलना चाहिए।' उनके मुताबिक, स्थानीय उत्सर्जन को कम करने के लिए मिशन-मोड में काम करना ज़रूरी है, ताकि भौगोलिक और मौसमी कारणों से होने वाले प्रदूषण को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सके।
पटाखे और धार्मिक भावना — कंधारी की दो-टूक
कंधारी ने मौजूदा स्थिति पर चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली अभी एक 'बंद ढक्कन वाले प्रदूषण के कंटेनर' की तरह है — प्रदूषण का कोई रास्ता नहीं। आने वाले हफ्तों में तापमान और गिरेगा, जिससे हवा और भारी होगी। ऐसे में पटाखे जलाना, कचरे के ढेरों में आग लगाना या औद्योगिक उत्सर्जन बढ़ाना 'एक बड़ी आपदा' को निमंत्रण देना होगा।
पटाखों को धार्मिक भावना से जोड़ने की प्रवृत्ति पर उन्होंने कहा — 'पटाखों का किसी धार्मिक भावना से कोई लेना-देना नहीं है। यह महज एक उत्सव का उत्साह है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्कूलों में चल रहे जागरूकता अभियानों से बच्चे भी पटाखों से दूरी बनाना सीख रहे हैं।
सिर्फ दीपावली नहीं, हर उत्सव पर लागू
कंधारी ने याद दिलाया कि प्रदूषण के कण हफ्तों और महीनों तक हवा में बने रहते हैं — यह एक रात की समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल दीपावली ही नहीं, बल्कि दशहरा, क्रिसमस, गुरुपर्व, राजनीतिक रैलियों और क्रिकेट मैचों में भी पटाखे जलाना वायु गुणवत्ता को नुकसान पहुँचाता है, और कानून इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हैं। दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार तभी संभव है जब उत्सव और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी प्रदूषण-नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाए।