भाजपा शासित राज्यों में मुसलमान असुरक्षित: मौलाना मुश्ताक मलिक के गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने 29 सितंबर 2026 को हैदराबाद में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों में मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को गंभीर कठिनाइयों और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से संवैधानिक सुरक्षा उपायों को लागू करने की माँग की।
मुख्य आरोप और बयान
मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा, 'भाजपा के शासन वाले राज्यों में मुसलमानों का जीवन बहुत मुश्किल हो गया है। जहाँ भी एसआईआर हुआ है, जैसे असम और बंगाल में, मुसलमानों को बाहर निकाला जा रहा है और डिटेंशन सेंटर में भेजा जा रहा है।'
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम इलाकों में पानी तक बंद कर दिया गया है। उनके अनुसार, 'मस्जिदें गिराई जा रही हैं, मॉब लिंचिंग हो रही है। टोपी पहनकर और दाढ़ी रखकर ट्रेनों और सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो गया है।' मौलाना ने यह भी दावा किया कि एक बार में 200 घरों वाली मुस्लिम बस्तियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।
ऐतिहासिक सन्दर्भ और 1947 का उल्लेख
मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा, '1947 में पाकिस्तान जाने के बजाय मुसलमानों ने भारत को अपना मुल्क समझकर यहाँ रहने का निर्णय लिया था। उनके अनुसार इस देश के लिए हमारे समाज के लोगों ने बड़ी कुर्बानी दी है।' उन्होंने वीर अब्दुल हमीद का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की रक्षा करना असली देशभक्ति है, न कि कोई गीत गाना।
मस्जिदों पर कार्रवाई का मुद्दा
इससे पहले भी हैदराबाद में मौलाना ने दिल्ली की मदीना मस्जिद और कोलकाता एयरपोर्ट की जामा मस्जिद को गिराए जाने पर चिंता जताई थी। उनके अनुसार, 'गैरकानूनी होने के नाम पर मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में अल्पसंख्यक अधिकारों और धार्मिक स्थलों पर की जाने वाली कार्रवाइयों को लेकर राष्ट्रीय बहस जारी है।
संवैधानिक सुरक्षा की माँग
मौलाना मुश्ताक मलिक ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि अल्पसंख्यकों को संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा वास्तविक रूप में मिलनी चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान किसी सत्यापित सरकारी आँकड़े पर आधारित नहीं है — मौलाना के ये आरोप उनके निजी दृष्टिकोण और संगठन की पर्यवेक्षण पर आधारित हैं। BJP या संबंधित राज्य सरकारों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे की स्थिति
तहरीक मुस्लिम शब्बान ने संकेत दिया है कि यदि सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो संगठन आगे और बड़े प्रदर्शन की योजना बना सकता है। अल्पसंख्यक अधिकारों का यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।