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उज्जैन मस्जिद विवाद: मौलाना मुश्ताक मलिक बोले — 'मुसलमान संविधान में विश्वास रखता है, घबराएगा नहीं'

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उज्जैन मस्जिद विवाद: मौलाना मुश्ताक मलिक बोले — 'मुसलमान संविधान में विश्वास रखता है, घबराएगा नहीं'

सारांश

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सैकड़ों साल पुरानी शाही मस्जिद का हिस्सा रात में क्रेन से गिराया गया — मुस्लिम पक्ष की सहमति के बावजूद। हैदराबाद के मौलाना मुश्ताक मलिक ने इसे ध्यान भटकाने की राजनीति बताया और कहा कि संविधान में आस्था रखने वाला मुसलमान डरेगा नहीं।

मुख्य बातें

मौलाना मुश्ताक मलिक ने उज्जैन की छतरी चौक शाही मस्जिद का हिस्सा ध्वस्त करने की कड़ी आलोचना की।
मुस्लिम पक्ष ने खुद तीन फीट हिस्सा हटाने की सहमति दी थी, फिर भी प्रशासन ने कथित तौर पर रात में क्रेन से कार्रवाई की।
मलिक ने कहा — 'मुसलमान इस देश का नागरिक है, संविधान में विश्वास रखता है, घबराएगा नहीं।' उन्होंने इसे सत्तापक्ष की ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया और चेतावनी दी कि सत्ता टिकाऊ नहीं रहेगी।
मस्जिद के मीनार के छत पर गिरने से ऐतिहासिक संरचना को नुकसान पहुँचने का दावा किया गया है।

हैदराबाद के著名 धर्मगुरु मौलाना मुश्ताक मलिक ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में छतरी चौक स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को ध्वस्त किए जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ध्यान भटकाने की राजनीतिक कोशिश है, परंतु मुसलमान घबराएगा नहीं, क्योंकि वह इस देश का पूर्ण नागरिक है और संविधान में उसकी आस्था अटूट है।

मौलाना मलिक ने क्या कहा

मौलाना मुश्ताक मलिक ने बातचीत में कहा, 'मध्य प्रदेश के उज्जैन में मस्जिद के मसले में मुसलमानों ने खुद तीन फीट का हिस्सा हटाने की पेशकश की थी। इसके बावजूद प्रशासन रात में क्रेन लेकर आया और मस्जिद को गिराना शुरू कर दिया।' उन्होंने आगे कहा कि वह मस्जिद सैकड़ों साल पुरानी है और उसकी स्थापत्य शैली विशिष्ट है। मुसलमानों की चिंता थी कि क्रेन से गिराने पर उसके आर्किटेक्चर को नुकसान पहुँचेगा।

मलिक ने कहा, 'आपने क्रेन से मस्जिद को गिरा दिया, उसका मीनार छत पर गिरा।' उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि ऐतिहासिक धरोहर की हिफाज़त के बजाय उसे इस तरह क्षति पहुँचाई गई।

राजनीतिक संदर्भ पर तीखी टिप्पणी

मौलाना मलिक ने सत्तापक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'ये लोग तलाशा करेंगे, क्योंकि उन्हें शासन करना नहीं आ रहा। विपक्ष से लेकर युवा, वकील और डॉक्टर — तमाम लोग आज सड़कों पर उतरना चाहते हैं। उज्जैन का यह मसला ध्यान भटकाने की कोशिश है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमान इस देश का नागरिक है और उसने संविधान के आधार पर ही यहाँ रहने का फैसला किया था।

मलिक ने चेतावनी के स्वर में कहा कि यदि सत्तापक्ष संविधान को नहीं मानेगा तो धार्मिक भेदभाव पैदा होगा। उन्होंने कहा, 'मुसलमान इसका जवाब देगा और आपका इक्तेदार बाकी रहने वाला नहीं है।'

उज्जैन मस्जिद विवाद की पृष्ठभूमि

उज्जैन के छतरी चौक स्थित शाही मस्जिद का एक हिस्सा सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत हटाया जा रहा है। कथित तौर पर इस कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। प्रशासन के अनुसार, शांति बहाल होने के बाद ही मस्जिद के संबंधित हिस्से को हटाने का कार्य पूरा किया गया।

गौरतलब है कि मुस्लिम पक्ष ने पहले खुद तीन फीट हिस्सा हटाने की सहमति दी थी। आलोचकों का कहना है कि प्रशासन ने इस सहमति की प्रतीक्षा किए बिना ही रात में क्रेन से कार्रवाई की, जिससे मस्जिद की ऐतिहासिक संरचना को नुकसान पहुँचा।

आम जनता और समुदाय पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब देशभर में धार्मिक संपत्तियों और ध्वस्तीकरण से जुड़े मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं। स्थानीय मुस्लिम समुदाय में इस कार्रवाई को लेकर असंतोष है, जबकि प्रशासन इसे नियमित सड़क विस्तार का हिस्सा बता रहा है। मौलाना मलिक जैसे राष्ट्रीय स्तर के धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया ने इस स्थानीय विवाद को राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में क्या आधिकारिक स्थिति लेती है और क्या मुस्लिम पक्ष न्यायिक राह अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संवैधानिक विमर्श को केंद्र में रखता है — यह समझदारी है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या दोनों पक्ष इस विवाद को अदालत और संवाद के ज़रिए सुलझाते हैं, या इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का ईंधन बनने देते हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन मस्जिद विवाद क्या है?
उज्जैन के छतरी चौक स्थित सैकड़ों साल पुरानी शाही मस्जिद का एक हिस्सा सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत हटाया जा रहा है। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि उनकी स्वैच्छिक सहमति के बावजूद प्रशासन ने रात में क्रेन से मस्जिद गिराई, जिससे उसके ऐतिहासिक आर्किटेक्चर को नुकसान पहुँचा।
मौलाना मुश्ताक मलिक कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
मौलाना मुश्ताक मलिक हैदराबाद के著名 धर्मगुरु हैं। उन्होंने उज्जैन मस्जिद प्रकरण की आलोचना करते हुए कहा कि यह ध्यान भटकाने की राजनीतिक कोशिश है, लेकिन मुसलमान घबराएगा नहीं क्योंकि वह संविधान में विश्वास रखता है।
क्या मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद का हिस्सा हटाने की सहमति दी थी?
मौलाना मलिक के अनुसार, मुस्लिम पक्ष ने खुद तीन फीट हिस्सा हटाने की पेशकश की थी। इसके बावजूद कथित तौर पर प्रशासन ने रात में क्रेन से कार्रवाई की, जो मुस्लिम समुदाय की आपत्ति का मुख्य कारण बना।
इस विवाद का स्थानीय माहौल पर क्या असर पड़ा?
कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। प्रशासन के अनुसार बाद में शांति बहाली के बाद काम पूरा किया गया। मौलाना मलिक जैसे राष्ट्रीय धर्मगुरुओं के बयान के बाद यह विवाद राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है।
आगे इस मामले में क्या हो सकता है?
मुस्लिम पक्ष न्यायिक राह अपना सकता है, जबकि राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से उठा सकते हैं। मध्य प्रदेश सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अदालती हस्तक्षेप की संभावना इस मामले की अगली दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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