मस्जिदें फिर आबाद होंगी, सरकारें आती-जाती हैं: अरशद मदनी का बयान
सारांश
मुख्य बातें
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने 27 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से मस्जिदों पर चल रही कार्रवाइयों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज जिन मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है, वे एक दिन पुनः आबाद होंगी और वहाँ दोबारा 'अल्लाहु अकबर' की सदाएँ गूँजेंगी। मदनी ने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोग चिरस्थायी नहीं होते, क्योंकि सरकारें बदलती रहती हैं।
इस्लाम की अमरता पर जोर
मदनी ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि 'इस्लाम को दुनिया की कोई ताकत न तो अब तक मिटा सकी है और न ही भविष्य में मिटा सकेगी।' उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के अंजाम का उदाहरण देते हुए कहा कि इस्लाम को समाप्त करने का स्वप्न देखने वाले स्वयं इतिहास के पन्नों में दफन हो गए, जबकि इस्लाम आज भी जीवंत है।
सरकार पर आरोप
मदनी ने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, लेकिन मौजूदा सरकार मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम, उनकी धार्मिक पहचान और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बना रही है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में कई धार्मिक स्थलों के विध्वंस को लेकर विवाद जारी है।
मदरसों की भूमिका और अभिभावकों की जिम्मेदारी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने मदरसों को इस्लाम और ईमान का रक्षक बताते हुए कहा कि ये धार्मिक पहचान के संरक्षक हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नई पीढ़ी की आस्था और नैतिकता की रक्षा केवल मदरसों की जिम्मेदारी नहीं है — इसमें माता-पिता की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
सहारनपुर मस्जिद प्रकरण से जुड़ा संदर्भ
यह ऐसी दूसरी बड़ी प्रतिक्रिया है जो मदनी ने मस्जिद विध्वंस के संदर्भ में दी है। इससे पहले 5 सितंबर को उन्होंने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को गिराए जाने पर गहरा खेद व्यक्त किया था। उनका कहना था कि इस कार्रवाई ने यह मूल सवाल खड़ा किया कि यदि संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं, तो उनके लागू होने में दोहरा मापदंड क्यों दिखता है।
मुसलमानों से अपील
मदनी ने मुस्लिम समुदाय से मौजूदा परिस्थितियों में निराश न होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सब्र, एकता, हिकमत और दृढ़ता के साथ अपने धर्म और ईमान पर अडिग रहना ही इस दौर का सही जवाब है। उनका यह संदेश आने वाले समय में संगठन की रणनीतिक दिशा का संकेत माना जा रहा है।