27 अक्टूबर 2026
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मस्जिदें फिर आबाद होंगी, सरकारें आती-जाती हैं: अरशद मदनी का बयान

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मस्जिदें फिर आबाद होंगी, सरकारें आती-जाती हैं: अरशद मदनी का बयान

सारांश

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि तोड़ी गई मस्जिदें एक दिन फिर आबाद होंगी और सत्ता अस्थायी होती है। यह बयान सहारनपुर मस्जिद विध्वंस पर उनकी पहले की प्रतिक्रिया के बाद आया है और मौजूदा सियासी-धार्मिक तनाव में एक नई धुरी खड़ी करता है।

मुख्य बातें

मौलाना अरशद मदनी ने 27 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर मस्जिद विध्वंस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि तोड़ी गई मस्जिदें 'एक दिन फिर आबाद होंगी' और सरकारें आती-जाती रहती हैं।
मदनी का आरोप — मौजूदा सरकार मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बना रही है।
सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के अंजाम का उदाहरण देकर चेताया।
इससे पहले 5 सितंबर को सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विध्वंस पर भी मदनी ने आपत्ति जताई थी।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने 27 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से मस्जिदों पर चल रही कार्रवाइयों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज जिन मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है, वे एक दिन पुनः आबाद होंगी और वहाँ दोबारा 'अल्लाहु अकबर' की सदाएँ गूँजेंगी। मदनी ने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोग चिरस्थायी नहीं होते, क्योंकि सरकारें बदलती रहती हैं।

इस्लाम की अमरता पर जोर

मदनी ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि 'इस्लाम को दुनिया की कोई ताकत न तो अब तक मिटा सकी है और न ही भविष्य में मिटा सकेगी।' उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के अंजाम का उदाहरण देते हुए कहा कि इस्लाम को समाप्त करने का स्वप्न देखने वाले स्वयं इतिहास के पन्नों में दफन हो गए, जबकि इस्लाम आज भी जीवंत है।

सरकार पर आरोप

मदनी ने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, लेकिन मौजूदा सरकार मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम, उनकी धार्मिक पहचान और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बना रही है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में कई धार्मिक स्थलों के विध्वंस को लेकर विवाद जारी है।

मदरसों की भूमिका और अभिभावकों की जिम्मेदारी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने मदरसों को इस्लाम और ईमान का रक्षक बताते हुए कहा कि ये धार्मिक पहचान के संरक्षक हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नई पीढ़ी की आस्था और नैतिकता की रक्षा केवल मदरसों की जिम्मेदारी नहीं है — इसमें माता-पिता की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।

सहारनपुर मस्जिद प्रकरण से जुड़ा संदर्भ

यह ऐसी दूसरी बड़ी प्रतिक्रिया है जो मदनी ने मस्जिद विध्वंस के संदर्भ में दी है। इससे पहले 5 सितंबर को उन्होंने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को गिराए जाने पर गहरा खेद व्यक्त किया था। उनका कहना था कि इस कार्रवाई ने यह मूल सवाल खड़ा किया कि यदि संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं, तो उनके लागू होने में दोहरा मापदंड क्यों दिखता है।

मुसलमानों से अपील

मदनी ने मुस्लिम समुदाय से मौजूदा परिस्थितियों में निराश न होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सब्र, एकता, हिकमत और दृढ़ता के साथ अपने धर्म और ईमान पर अडिग रहना ही इस दौर का सही जवाब है। उनका यह संदेश आने वाले समय में संगठन की रणनीतिक दिशा का संकेत माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी कानूनी और संवैधानिक रास्ता — लेकिन साथ ही सोवियत संघ जैसे ऐतिहासिक संदर्भ का उपयोग राजनीतिक संकेत भी देता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद का यह स्वर न्यायिक मार्ग और जनमत दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति का हिस्सा है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना अरशद मदनी ने मस्जिदों को लेकर क्या कहा?
मदनी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज जिन मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है, वे एक दिन फिर आबाद होंगी और वहाँ दोबारा 'अल्लाहु अकबर' की सदाएँ गूँजेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोग स्थायी नहीं होते।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद का मौजूदा सरकार पर क्या आरोप है?
मदनी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार केवल मुसलमानों को नहीं, बल्कि इस्लाम, उनकी धार्मिक पहचान और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बना रही है। उनके अनुसार यह पहले की सरकारों के तरीके से अलग और अधिक गंभीर है।
सहारनपुर मस्जिद विध्वंस से इस बयान का क्या संबंध है?
5 सितंबर को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की ऐतिहासिक मस्जिद गिराए जाने पर मदनी ने पहले ही कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने तब भी कहा था कि यह कार्रवाई संविधान और समान न्याय के सिद्धांत पर सवाल खड़ा करती है।
मदनी ने मदरसों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने मदरसों को इस्लाम और धार्मिक पहचान का रक्षक बताया। साथ ही स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी की आस्था और नैतिकता की रक्षा केवल मदरसों की नहीं, बल्कि माता-पिता की भी जिम्मेदारी है।
मदनी ने मुस्लिम समुदाय से क्या अपील की?
मदनी ने मुसलमानों से मौजूदा हालात में निराश न होने और सब्र, एकता, हिकमत व दृढ़ता के साथ अपने धर्म पर अडिग रहने की अपील की। उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के पतन का उदाहरण देकर चेताया।
राष्ट्र प्रेस
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