6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अरशद मदनी का आरोप: मुसलमानों और मदरसों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए बनाया जा रहा है निशाना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अरशद मदनी का आरोप: मुसलमानों और मदरसों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए बनाया जा रहा है निशाना

सारांश

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अरशद मदनी ने मदरसों को 'आतंकवाद का केंद्र' बताने वाले बयानों को सांप्रदायिकता की पराकाष्ठा करार दिया। उनका यह पलटवार उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान के बाद आया जिसमें मदरसों को 'अनौपचारिक रूप से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला' बताया गया था।

मुख्य बातें

अरशद मदनी ने 6 अगस्त को आरोप लगाया कि मुसलमानों और मदरसों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कथित तौर पर कहा था कि मदरसे 'अनौपचारिक रूप से आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।' मौर्य ने निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन की मदरसों पर प्रतिबंध की माँग का समर्थन किया था।
मदनी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा — 'मदरसों को आतंकवाद का केंद्र बताना सांप्रदायिकता और पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा है।' उन्होंने ऐसे बयानों को भारत की एकता और संवैधानिक मूल्यों के लिए खतरा बताया।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरशद मदनी ने 6 अगस्त 2026 को आरोप लगाया कि मुसलमानों और उनके शैक्षणिक संस्थानों — विशेषकर मदरसों — को चुनावी और राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, इस तरह के बयान 'सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा' हैं और भारत की संवैधानिक नींव को कमज़ोर करते हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान से भड़का, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मदरसे 'अनौपचारिक रूप से आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं' और वहाँ पढ़ने वाले छात्रों में 'आतंकवादी जैसी सोच' विकसित होती है।

मौर्य ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की उस माँग का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने मदरसों को 'जिहादी फ़ैक्टरी' बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी।

मदनी की तीखी प्रतिक्रिया

मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इन आरोपों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने लिखा, 'मदरसों को आतंकवाद का केंद्र बताना सांप्रदायिकता और पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा है।'

उन्होंने आलोचकों पर ऐतिहासिक प्रश्न उठाते हुए कहा, 'यह बहुत अजीब बात है कि जिन लोगों के राजनीतिक पूर्वजों ने भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों से माफी माँगी थी, वे ही अब मदरसों को आतंकवाद के केंद्र के तौर पर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।'

मदरसों पर बेबुनियाद आरोपों का सिलसिला

मदनी ने आरोप लगाया कि मदरसों के पाठ्यक्रम और देशभक्ति पर सवाल उठाने से लेकर उन्हें 'आतंकवाद के प्रजनन स्थल' के रूप में प्रस्तुत करने तक — यह एक सुनियोजित नैरेटिव है। उनके शब्दों में, 'ऐसे आख्यानों का उद्देश्य नफरत और अविश्वास फैलाना है।'

गौरतलब है कि मदरसा शिक्षा और उसकी प्रासंगिकता को लेकर यह कोई पहली बार नहीं है जब राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हो। उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों में मदरसा पाठ्यक्रम में सुधार और सर्वेक्षण जैसे कदम उठा चुकी है, जिसे अल्पसंख्यक संगठन लगातार चुनौती देते रहे हैं।

संवैधानिक मूल्यों की दुहाई

जमीयत प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे बयान देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए घातक हैं। उन्होंने कहा, 'ये गैर-जिम्मेदाराना बयान एक खतरनाक सोच को दर्शाते हैं, जो सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा हैं और भारत की एकता व संवैधानिक मूल्यों को कमज़ोर करते हैं।'

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और उनकी निगरानी को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहसें तेज़ हो रही हैं। मदनी के बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है, जो आने वाले दिनों में इस विमर्श को और गहरा कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मदरसा बहस राष्ट्रीय विमर्श में लौट आती है। केशव प्रसाद मौर्य के बयान की टाइमिंग और तस्लीमा नसरीन के समर्थन की राजनीतिक उपयोगिता को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है। दूसरी ओर, मदनी का ऐतिहासिक तर्क — 'जिनके पूर्वजों ने अंग्रेजों से माफी माँगी' — खुद एक राजनीतिक प्रतिआक्रमण है, जो बहस को तथ्य से हटाकर विरासत की लड़ाई में बदल देता है। असली सवाल — मदरसा पाठ्यक्रम में सुधार कितना ज़रूरी और कितना थोपा हुआ है — इस शोर में दब जाता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरशद मदनी ने मदरसों के बारे में क्या कहा?
अरशद मदनी ने कहा कि मदरसों को 'आतंकवाद का केंद्र' बताना सांप्रदायिकता और पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि चुनावी और राजनीतिक लाभ के लिए मुसलमानों और उनके शैक्षणिक संस्थानों पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य ने मदरसों पर क्या बयान दिया था?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कथित तौर पर कहा था कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मदरसे 'अनौपचारिक रूप से आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं' और वहाँ पढ़ने वाले छात्रों में 'आतंकवादी जैसी सोच' विकसित होती है। उन्होंने तस्लीमा नसरीन की मदरसों पर प्रतिबंध की माँग का भी समर्थन किया।
तस्लीमा नसरीन ने मदरसों के बारे में क्या कहा?
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने मदरसों को 'जिहादी फ़ैक्टरी' बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। उनकी इस माँग को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मौर्य ने समर्थन दिया, जिसके बाद यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद एक प्रमुख इस्लामी धार्मिक संगठन है जो भारत में मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और शैक्षिक हितों का प्रतिनिधित्व करता है। अरशद मदनी इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और वे अक्सर मुस्लिम समुदाय से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते हैं।
मदरसा विवाद का भारत की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
मदरसों को लेकर यह बहस अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और उनकी निगरानी के व्यापक सवाल से जुड़ी है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि शैक्षिक सुधार की माँग वैध है। यह विमर्श आने वाले चुनावों में एक संवेदनशील मुद्दा बना रह सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले