अबू आजमी का आरोप: दिल्ली-यूपी में मुसलमानों को निशाना बनाकर बहुसंख्यकों को राजनीतिक संदेश दिया जा रहा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (SP) के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने 23 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर मुसलमानों को जानबूझकर तकलीफ देकर बहुसंख्यक समुदाय को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मस्जिदों और झुग्गी-बस्तियों पर हो रही कार्रवाइयों को एकतरफा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग (ECI) से हस्तक्षेप की माँग की।
नफरत की राजनीति पर आजमी के आरोप
आजमी ने कहा कि कुछ तत्व नफरत की राजनीति को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं और उनके अनुसार संबंधित संस्थाएँ उन तत्वों के 'इंस्ट्रूमेंट' की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह उत्तर प्रदेश में नफरत का माहौल बनाया गया, वैसा ही प्रयास अब दिल्ली में भी दिखाई दे रहा है।
आजमी ने सुप्रीम कोर्ट से इन मामलों को गंभीरता से लेने और चुनाव आयोग की भूमिका पर नजर रखने की अपील की। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की स्थितियाँ देश की एकता और भाईचारे के लिए चिंताजनक हैं।
मस्जिदों और अवैध निर्माण पर कार्रवाई का मुद्दा
अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई पर आजमी ने कहा कि यदि नियमों का पालन करवाना है तो वे नियम सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के कई इलाकों में अन्य निर्माणों को छोड़कर केवल मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे गलत सामाजिक संदेश जाता है।
गौरतलब है कि देश के कई शहरों में हाल के महीनों में अवैध निर्माण विध्वंस अभियानों को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है। आजमी का यह बयान उसी व्यापक बहस का हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल
आजमी ने उत्तर प्रदेश में लूट, हत्या और अन्य अपराधों की घटनाओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने राज्य में हुए एनकाउंटरों पर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष जाँच तथा कानून के अनुसार कार्रवाई की माँग की।
उन्होंने सुझाव दिया कि आपराधिक मामलों की सुनवाई तय समय-सीमा में पूरी करने के लिए अतिरिक्त अदालतें स्थापित की जाएँ और जरूरत पड़ने पर रात में भी सुनवाई की व्यवस्था हो।
झुग्गी-बस्तियों के पुनर्विकास पर आपत्ति
झुग्गी-बस्तियों और 14 फीट से अधिक ऊँचाई वाले निर्माणों पर कार्रवाई के मुद्दे पर आजमी ने कहा कि बेदखली से पहले वहाँ रहने वाले लोगों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत से निवासियों के पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बिजली-पानी के कनेक्शन जैसे आधिकारिक दस्तावेज मौजूद हैं, इसलिए बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना अनुचित होगा।
महाराष्ट्र में नशे की समस्या पर माँग
आजमी ने महाराष्ट्र में नशे की बढ़ती समस्या पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने माँग की कि हर पुलिस थाने में नशे के विरुद्ध विशेष यूनिट बनाई जाए और आपूर्ति नेटवर्क को जड़ से तोड़ने के लिए सरकार पुलिस को सख्त निर्देश दे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और सपा समेत विपक्षी दल अल्पसंख्यक मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस बयान पर सत्तारूढ़ दलों की प्रतिक्रिया राजनीतिक तापमान तय करेगी।