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अशोक सिंघल जयंती: अमित शाह, शिवराज समेत दिग्गज नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता को दी श्रद्धांजलि

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अशोक सिंघल जयंती: अमित शाह, शिवराज समेत दिग्गज नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता को दी श्रद्धांजलि

सारांश

राम मंदिर के साकार होने के बाद पहली बार नहीं, पर शायद सबसे प्रतीकात्मक — अशोक सिंघल की जयंती पर गृह मंत्री समेत दर्जनों नेताओं का एक साथ एक्स पर उतरना बताता है कि उनकी विरासत आज भी भाजपा की राजनीतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

मुख्य बातें

अशोक सिंघल की जयंती पर 27 सितंबर 2026 को शीर्ष नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
गृह मंत्री अमित शाह ने सिंघल को 'सादगी और धर्मनिष्ठा का प्रतीक' बताया और आपातकाल से राम जन्मभूमि तक उनके संघर्ष को याद किया।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके नेतृत्व को 'राष्ट्र पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण' कहा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और गिरिराज सिंह ने भी एक्स पर श्रद्धा व्यक्त की।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व भाजपा महासचिव विनोद तावड़े ने भी सिंघल के योगदान को नमन किया।
सिंघल का नवंबर 2015 में निधन हुआ था; जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा उनके दशकों के आंदोलन की परिणति मानी जाती है।

राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की जयंती पर 27 सितंबर 2026 को देशभर के शीर्ष नेताओं ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, भाजपा महासचिव विनोद तावड़े और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कई नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्हें नमन किया।

गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, सादगी और धर्मनिष्ठा के प्रतीक अशोक सिंघल की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं। सभी सुखों का त्याग कर निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र, संस्कृति और विचारधारा के प्रति जीवन समर्पित करने का जो आदर्श अशोक सिंघल ने स्थापित किया, वह विरले ही देखने को मिलता है।' शाह ने यह भी कहा कि आपातकाल के विरुद्ध आवाज बुलंद करने से लेकर श्री राम जन्मभूमि आंदोलन को गति देने तक सिंघल का संघर्ष और समर्पण सदैव मार्गदर्शन देता रहेगा।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद सिंघल की विरासत एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में है। सिंघल का दशकों का संघर्ष उस आंदोलन की बुनियाद था जिसकी परिणति जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के रूप में हुई।

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रियों के संदेश

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पर लिखा कि सिंघल ने अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि की सेवा में समर्पित किया और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर समाज जागरण तक उनका दृढ़ नेतृत्व राष्ट्र के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण रहा। नवीन ने कहा कि सिंघल का जीवन अपनी विरासत के प्रति सजग रहते हुए राष्ट्रहित में कार्य करने का मार्ग दिखाता रहेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मातृभूमि की सेवा और धर्म की रक्षा के लिए सिंघल को 'युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा।' केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उन्हें 'महान सनातन पुरुष' बताते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण के संकल्प को जन-आंदोलन बनाने में उनका त्याग और योगदान 'सदैव अविस्मरणीय रहेगा।'

विनोद तावड़े और विष्णुदेव साय के विचार

भाजपा राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने अपनी श्रद्धांजलि में सिंघल के जीवन को 'अटूट तपस्या का साक्षात रूप' और 'निःस्वार्थ भक्ति का प्रतीक' कहा। तावड़े ने कहा कि उनकी निष्ठा 'आने वाली पीढ़ियों के लिए शाश्वत प्रेरणा-स्रोत है।'

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सिंघल को 'राम जन्मभूमि आंदोलन का प्रमुख स्तंभ' बताते हुए उनके जीवन को 'सेवा, साधना और संकल्प का अनुपम उदाहरण' कहा। साय ने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण में सिंघल का योगदान समाज को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

अशोक सिंघल की विरासत

अशोक सिंघल विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दीर्घकालिक नेता और श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के केंद्रीय चेहरे रहे। 1990 के दशक में उन्होंने इस आंदोलन को देशव्यापी जन-लहर में बदलने में निर्णायक भूमिका निभाई। नवंबर 2015 में उनका निधन हुआ, किंतु उनके अनुयायी और भाजपा-संघ परिवार प्रतिवर्ष उनकी जयंती पर उनके योगदान को स्मरण करते हैं। यह ऐसी Nवीं जयंती है जब उनके निधन के बाद राम मंदिर अपना साकार रूप ले चुका है, जिससे इस वर्ष की श्रद्धांजलियों का महत्व और गहरा हो जाता है।

आने वाले समय में VHP और संघ परिवार से जुड़े संगठन सिंघल की स्मृति में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे, जो उनकी विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बनेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित सांस्कृतिक-राजनीतिक संदेश है — यह बताना कि राम मंदिर की सफलता का श्रेय किस वैचारिक धारा को जाता है। गौरतलब है कि जब सिंघल जीवित थे, तब उनका और भाजपा नेतृत्व का रिश्ता हमेशा सहज नहीं रहा; मृत्यु के बाद उन्हें एकमत से 'प्रणेता' का दर्जा मिलना उस जटिलता को सरल बना देता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि इन श्रद्धांजलियों से परे सिंघल के विचारों को आज की नीतियों में कितना स्थान मिला है — यही असली पैमाना है जो उनकी विरासत को जीवंत या प्रतीकात्मक साबित करेगा।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक सिंघल कौन थे और उनकी जयंती कब है?
अशोक सिंघल विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उनकी जयंती 27 सितंबर को मनाई जाती है; नवंबर 2015 में उनका निधन हुआ था।
अशोक सिंघल की जयंती 2026 पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
27 सितंबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, भाजपा महासचिव विनोद तावड़े और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल की क्या भूमिका थी?
अशोक सिंघल ने 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन को देशव्यापी जन-लहर में बदलने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में VHP ने इस मुद्दे को करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जोड़ा, जिसकी परिणति जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के रूप में हुई।
गृह मंत्री अमित शाह ने अशोक सिंघल के बारे में क्या कहा?
अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि सिंघल 'सादगी और धर्मनिष्ठा के प्रतीक' थे और उन्होंने निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र, संस्कृति और विचारधारा के प्रति जीवन समर्पित किया। शाह ने आपातकाल के विरुद्ध उनके संघर्ष और राम जन्मभूमि आंदोलन को गति देने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से याद किया।
क्या अशोक सिंघल ने राम मंदिर बनते देखा था?
नहीं, अशोक सिंघल का निधन नवंबर 2015 में हुआ था, जबकि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा जनवरी 2024 में हुई। इसीलिए नेता अक्सर उनके योगदान को मंदिर निर्माण की नींव के रूप में याद करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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