27 सितंबर 2026
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मन की बात: PM मोदी ने अशोक सिंघल की 100वीं जन्मजयंती पर दी श्रद्धांजलि, रामजन्मभूमि आंदोलन को किया याद

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मन की बात: PM मोदी ने अशोक सिंघल की 100वीं जन्मजयंती पर दी श्रद्धांजलि, रामजन्मभूमि आंदोलन को किया याद

सारांश

PM मोदी ने 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में VHP नेता अशोक सिंघल की 100वीं जन्मजयंती पर उन्हें याद किया। 27 सितंबर 1926 को आगरा में जन्मे सिंघल के रामजन्मभूमि आंदोलन को दिए योगदान को मोदी ने अयोध्या राम मंदिर की स्थापना का आधार बताया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में अशोक सिंघल को उनकी 100वीं जन्मजयंती पर श्रद्धांजलि दी।
अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था; वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष थे।
मोदी ने कहा कि सिंघल ने रामजन्मभूमि आंदोलन को दिशा और ऊर्जा दी, जिसका परिणाम अयोध्या में भव्य राम मंदिर के रूप में सामने है।
सिंघल IIT BHU से स्नातक थे और उनके पिता सिविल सेवा अधिकारी थे, फिर भी उन्होंने सामाजिक-सांस्कृतिक सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया।
मोदी ने उन्हें सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करने वाले नेता के रूप में भी याद किया, जिस पक्ष की अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल को उनकी 100वीं जन्मजयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि सिंघल ने रामजन्मभूमि आंदोलन को जो दिशा और ऊर्जा प्रदान की, उसी का प्रतिफल आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर के रूप में देश के सामने है।

शताब्दी वर्ष पर विशेष स्मरण

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में कहा, 'आज 27 सितंबर की यह तारीख एक विशेष कारण से और भी विशेष हो गई है। आज एक ऐसे महानुभाव की 100वीं जन्मजयंती है, जिन्होंने संस्कृति, समाज और राष्ट्र के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।' उन्होंने बताया कि 27 सितंबर 1926 को आगरा में जन्मे अशोक सिंघल ने समाज में रहते हुए भी तपस्वियों जैसा जीवन जिया।

गौरतलब है कि अशोक सिंघल का निधन 2015 में हुआ था, किंतु उनके जन्म का शताब्दी वर्ष उन्हें राष्ट्रीय विमर्श में पुनः केंद्र में ले आया है। यह पहला अवसर है जब 'मन की बात' के मंच से उनकी जन्मशती को इतनी विस्तृत श्रद्धांजलि दी गई।

रामजन्मभूमि आंदोलन में योगदान

प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंघल ने रामजन्मभूमि आंदोलन के साथ-साथ सामाजिक भेदभाव और विषमता के विरुद्ध भी एक बड़ी लड़ाई लड़ी, जिसकी अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। मोदी ने कहा, 'जब मैं राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में शामिल हो रहा था, तब भी मुझे बार-बार अशोक जी की याद आना बहुत स्वाभाविक था।' यह वक्तव्य जनवरी 2024 में संपन्न हुए अयोध्या राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से सिंघल की स्मृति को सीधे जोड़ता है।

व्यक्तित्व और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

मोदी ने सिंघल के जीवन का एक कम चर्चित पक्ष भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि सिंघल का जन्म एक समृद्ध परिवार में हुआ था — उनके पिता सिविल सेवा अधिकारी थे और अधिकांश भाई-बहन भी उच्च पदों पर रहे। स्वयं सिंघल IIT BHU से स्नातक थे, फिर भी उन्होंने सभी सांसारिक सुविधाओं को त्यागकर समाज और संस्कृति की सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।

मोदी ने इसे 'महान लोगों की पहचान' बताते हुए कहा कि उन्हें सिंघल के साथ इस मिशन से जुड़ने का सौभाग्य मिला। उन्होंने करोड़ों प्रशंसकों की ओर से सिंघल को नमन किया।

मन की बात का व्यापक संदर्भ

'मन की बात' का 138वाँ एपिसोड रविवार 27 सितंबर 2026 को प्रसारित हुआ। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी का सीधे जनता से संवाद का प्रमुख माध्यम है, जिसमें वे प्रायः राष्ट्रीय महत्व के व्यक्तित्वों, सामाजिक विषयों और सरकारी उपलब्धियों पर चर्चा करते हैं। सिंघल की शताब्दी जयंती पर उनका उल्लेख यह दर्शाता है कि वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व हिंदुत्व आंदोलन के ऐतिहासिक स्तंभों को सार्वजनिक स्मृति में स्थायी स्थान देने के प्रति सचेत है।

आगे क्या

अशोक सिंघल की जन्मशती के उपलक्ष्य में विश्व हिंदू परिषद द्वारा देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री की इस श्रद्धांजलि से इन आयोजनों को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊर्जा मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सुविचारित सांस्कृतिक संदेश है — यह हिंदुत्व आंदोलन की वैचारिक विरासत को मुख्यधारा की राष्ट्रीय स्मृति में स्थायित्व देने का प्रयास है। गौरतलब है कि सिंघल का नाम अयोध्या विवाद के सबसे तीखे दौर से जुड़ा रहा है, और राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनकी भूमिका को 'दूरदर्शी नेतृत्व' के रूप में पुनः स्थापित किया जा रहा है। जो पक्ष मुख्यधारा की कवरेज से अक्सर छूट जाता है, वह यह है कि मोदी ने सिंघल के सामाजिक समरसता के कार्य को भी रेखांकित किया — यह उस कथा को विस्तृत करने की कोशिश है जो अब तक मुख्यतः मंदिर-निर्माण तक सीमित थी।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक सिंघल कौन थे और उनकी 100वीं जन्मजयंती क्यों महत्वपूर्ण है?
अशोक सिंघल विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष थे, जिनका जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। वे रामजन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेता थे और उनकी 100वीं जन्मजयंती पर PM मोदी ने 'मन की बात' में उन्हें विशेष रूप से याद किया।
PM मोदी ने 'मन की बात' में अशोक सिंघल के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि सिंघल ने रामजन्मभूमि आंदोलन को दिशा और ऊर्जा दी, जिसका परिणाम अयोध्या में भव्य राम मंदिर है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय उन्हें बार-बार सिंघल की याद आई। साथ ही उन्होंने सिंघल के सामाजिक भेदभाव-विरोधी संघर्ष को भी रेखांकित किया।
'मन की बात' का 138वाँ एपिसोड कब प्रसारित हुआ?
'मन की बात' का 138वाँ एपिसोड रविवार, 27 सितंबर 2026 को प्रसारित हुआ। इस एपिसोड में PM मोदी ने अशोक सिंघल की जन्मशती पर विशेष रूप से उनके जीवन और योगदान की चर्चा की।
अशोक सिंघल की शैक्षणिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या थी?
अशोक सिंघल IIT BHU से स्नातक थे और उनके पिता सिविल सेवा अधिकारी थे। उनके अधिकांश भाई-बहन भी उच्च पदों पर रहे, फिर भी उन्होंने समृद्ध पारिवारिक पृष्ठभूमि को त्यागकर सामाजिक और सांस्कृतिक सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
रामजन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल की क्या भूमिका थी?
अशोक सिंघल VHP के नेतृत्व में रामजन्मभूमि आंदोलन के केंद्रीय व्यक्तित्व थे। PM मोदी के अनुसार उन्होंने इस आंदोलन को वैचारिक दिशा और जन-ऊर्जा प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक भेदभाव और विषमता के विरुद्ध भी संघर्ष किया, जो उनके व्यक्तित्व का एक कम-चर्चित पहलू है।
राष्ट्र प्रेस
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