CHOGM 2026: जयशंकर की कॉमनवेल्थ देशों से अपील — भरोसेमंद सप्लाई चेन और कनेक्टिविटी कॉरिडोर मज़बूत करें
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 5 नवंबर 2026 को सेंट जॉन्स, एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग (CHOGM 2026) के दौरान कॉमनवेल्थ साझेदार देशों से आग्रह किया कि वे अपनी सप्लाई चेन को जोखिम से बचाने के लिए छोटे और भरोसेमंद रास्तों को अपनाएँ और उनमें विविधता लाएँ। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अधिक कनेक्टिविटी कॉरिडोर वैश्विक कारोबार के लिए अनुकूल हैं।
CHOGM बिज़नेस लीडर्स मीटिंग में जयशंकर के मुख्य संदेश
जयशंकर ने कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट और बिज़नेस लीडर्स ब्रेकफास्ट मीटिंग में कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भरोसेमंद और विविध सप्लाई चेन बनाना समय की माँग है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'कॉमनवेल्थ साझेदारों को भी जोखिम कम करने और विविधता लाने की ज़रूरत है। इसके लिए छोटी और भरोसेमंद सप्लाई चेन की ज़रूरत है। ज़्यादा कनेक्टिविटी कॉरिडोर कारोबार के लिए अच्छे हैं। कॉमनवेल्थ साझेदारों को स्थानीय वितरण को बढ़ाने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए।'
प्रशिक्षण, डिजिटल और जलवायु एजेंडा
विदेश मंत्री ने प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया, यह तर्क देते हुए कि इससे साझेदार देशों को ज़्यादा विकल्प और लचीलापन मिलता है। उन्होंने डिजिटल प्रौद्योगिकी को 'गेम चेंजर' बताते हुए कहा कि यह दक्षता, सुशासन और विकास को प्रोत्साहित करती है। जलवायु कार्रवाई के संदर्भ में उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) के उपयोग की संभावना पर प्रकाश डाला।
भारतीय कारोबारी समुदाय और कौशल गतिशीलता
जयशंकर ने दुनियाभर में फैले भारतीय कारोबारी समुदाय को कॉमनवेल्थ के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति करार दिया। उन्होंने कहा कि कौशल की गतिशीलता (Skill Mobility) कॉमनवेल्थ का एक प्रमुख फोकस बन सकती है और कॉमनवेल्थ के भीतर परस्पर भरोसा समृद्धि के नए रास्ते खोल सकता है। उन्होंने फर्स्ट रिस्पॉन्डर अनुभव और HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) गतिविधियों का हवाला देते हुए स्थानीय हब की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
CHOGM एग्जीक्यूटिव सेशन में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
इससे एक दिन पहले, बुधवार 4 नवंबर 2026 को, जयशंकर ने CHOGM एग्जीक्यूटिव सेशन को भी संबोधित किया था। उस सत्र में उन्होंने सुशासन और वित्तीय जवाबदेही को बढ़ाने में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने भारत के हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और जारी वार्ताओं का भी उल्लेख किया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भू-राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और कई देश अपनी व्यापार निर्भरता में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे की दिशा
CHOGM 2026 में जयशंकर की भागीदारी भारत की उस व्यापक रणनीतिक सोच को दर्शाती है, जिसमें बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय कूटनीति के ज़रिए नए आर्थिक गठबंधन बनाए जाएँ। कॉमनवेल्थ के 56 सदस्य देशों के साथ सप्लाई चेन और डिजिटल जुड़ाव पर भारत का यह रुख आने वाले महीनों में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं को नई दिशा दे सकता है।