थीमिथी उत्सव 2026: रासीपुरम मरियम्मन मंदिर में 1,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने अंगारों पर चलकर पूरी कीं मन्नतें
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के नमक्कल जिले के रासीपुरम स्थित नित्या सुमंगली मरियम्मन मंदिर में 5 नवंबर 2026 को पारंपरिक थीमिथी (अग्नि पर चलने का अनुष्ठान) उत्सव हर्षोल्लास और गहरी आस्था के साथ संपन्न हुआ। 1,000 से अधिक पुरुषों और महिलाओं ने नंगे पैर जलते अंगारों पर चलकर देवी मरियम्मन के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की और मन्नतें पूरी कीं।
उत्सव का आगाज़ और मुख्य क्रम
तमिल कैलेंडर के ऐप्पासी महीने में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस वार्षिक उत्सव का शुभारंभ इस वर्ष 20 अक्टूबर को देवी को पुष्प अर्पण के साथ हुआ। इसके उपरांत कई दिनों तक मंदिर परिसर में विविध धार्मिक कार्यक्रम, विशेष पूजा-अर्चना और शोभायात्राएँ आयोजित की गईं।
उत्सव के दौरान विभिन्न संगठनों की ओर से प्रतिदिन मंदिर को आकर्षक सज्जा से सजाया गया। नेर्थिकातन (मन्नत पूरी होने पर किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान) में भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
थीमिथी — उत्सव का हृदय
उत्सव का मुख्य आकर्षण थीमिथी कार्यक्रम रहा। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी। पीले वस्त्र धारण किए 1,000 से अधिक पुरुषों और महिलाओं ने हाथों में नीम की पत्तियाँ लेकर देवी मरियम्मन की आराधना की।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ नंगे पैर जलते अंगारों पर चलकर अपनी मन्नतें पूरी कीं। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई।
आसपास के क्षेत्रों से उमड़ी भीड़
इस धार्मिक आयोजन में रासीपुरम के अतिरिक्त आसपास के गाँवों और क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु पहुँचे। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में गहरा भक्तिमय वातावरण बना रहा। देवी के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने अंगारों को पार किया।
विशेष आकर्षण का केंद्र रहा एक युवक
थीमिथी उत्सव के दौरान एक युवक विशेष ध्यान का केंद्र बना। उसने सिर पर मुकुट पहन रखा था और हाथ में अभिनेता विजय की तस्वीर के साथ एक राजनीतिक दल का झंडा लेकर अग्नि पर चला। उसकी इस अनूठी भागीदारी ने वहाँ उपस्थित लोगों का ध्यान खींचा।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
थीमिथी अनुष्ठान तमिल संस्कृति और लोकआस्था की गहरी जड़ों को दर्शाता है, जहाँ भक्त यह विश्वास करते हैं कि देवी मरियम्मन की कृपा से वे बिना नुकसान के अग्नि पार कर सकते हैं। यह उत्सव क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अभिन्न अंग है। इस वर्ष का आयोजन परंपरागत रीति-रिवाजों और सामूहिक आस्था के उत्कर्ष के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।