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पंजाब में पराली जलाने पर सख्ती: 26 सितंबर तक 40 घटनाएँ दर्ज, 8 किसानों पर ₹40,000 जुर्माना

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पंजाब में पराली जलाने पर सख्ती: 26 सितंबर तक 40 घटनाएँ दर्ज, 8 किसानों पर ₹40,000 जुर्माना

सारांश

धान कटाई के मौसम की शुरुआत के साथ ही पंजाब प्रशासन ने पराली जलाने पर शिकंजा कस दिया है। 26 सितंबर तक 40 घटनाएँ, 8 किसानों पर ₹40,000 जुर्माना और एक आपराधिक मामला — लेकिन असली सवाल यह है कि हर साल की यही कवायद पराली की समस्या को खत्म क्यों नहीं कर पाती।

मुख्य बातें

26 सितंबर 2026 तक पंजाब में पराली जलाने की 40 घटनाएँ सैटेलाइट और ज़मीनी प्रोटोकॉल से दर्ज।
सर्वाधिक 21 मामले अमृतसर जिले में; 12 स्थानों पर पराली जलाने की भौतिक पुष्टि।
8 किसानों पर कुल ₹40,000 पर्यावरण मुआवज़ा, जिसमें से ₹10,000 वसूल।
पटियाला में BNS धारा 223 के तहत 1 आपराधिक मामला दर्ज।
5 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री'; फिरोजपुर के 4 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस।

पंजाब में धान की कटाई का मौसम शुरू होते ही पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई तेज़ हो गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQMS) और राज्य प्रशासन की संयुक्त निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, 26 सितंबर 2026 तक सैटेलाइट डेटा और ज़मीनी प्रोटोकॉल के ज़रिए पूरे राज्य में 40 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इन मामलों में 8 किसानों पर कुल ₹40,000 का पर्यावरण मुआवज़ा (EC) लगाया गया है।

जिलेवार आँकड़े

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, सर्वाधिक 21 मामले अमृतसर जिले से सामने आए हैं, जिनमें से 14 खेतों का मौके पर भौतिक सत्यापन हुआ और 4 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि की गई। इसके बाद तरनतारन में 6 और फिरोजपुर में 5 मामले दर्ज हुए हैं। गुरदासपुर में 2, जबकि फाजिल्का, होशियारपुर, शहीद भगत सिंह नगर (SBS नगर), पटियाला और रूपनगर में 1-1 मामला दर्ज हुआ। राज्य में कुल 28 खेतों का भौतिक निरीक्षण किया गया, जिनमें से 12 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।

जुर्माना और कानूनी कार्रवाई

नियमों का उल्लंघन करने वाले 8 मामलों में कुल ₹40,000 का पर्यावरण मुआवज़ा लगाया गया है, जिसमें से अब तक ₹10,000 की वसूली हो चुकी है। जुर्माने का विवरण इस प्रकार है: फिरोजपुर पर ₹15,000, तरनतारन पर ₹10,000, अमृतसर पर ₹5,000, होशियारपुर पर ₹5,000 और पटियाला पर ₹5,000। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत पटियाला जिले में 1 आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया है।

राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' और नोटिस

राजस्व रिकॉर्ड में कुल 5 मामलों में 'रेड एंट्री' दर्ज की गई है — फिरोजपुर में 3 और तरनतारन में 2। 'रेड एंट्री' भूमि के दस्तावेज़ों पर उल्लंघन का स्थायी नोट होती है, जो भविष्य में सरकारी सुविधाओं पर असर डाल सकती है। इसके साथ ही, कर्तव्य में कोताही बरतने वाले नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों को फिरोजपुर जिले में 4 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

पराली जलाने के दुष्प्रभाव और व्यापक संदर्भ

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है, गंभीर वायु प्रदूषण फैलता है और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं — हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी हर साल इसी मौसम में पराली जलाने के मामले बड़े पैमाने पर सामने आते हैं। गौरतलब है कि सरकारें हर वर्ष जागरूकता अभियान और दंडात्मक कार्रवाई दोनों चलाती हैं, फिर भी यह समस्या दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के वायु प्रदूषण संकट में बड़ा योगदान करती है। आने वाले हफ्तों में धान की कटाई का ज़ोर बढ़ने के साथ घटनाओं में और वृद्धि की आशंका है, जिससे प्रशासनिक निगरानी का दबाव और बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 का कुल जुर्माना उस आर्थिक दबाव के सामने नगण्य है जो किसानों को पराली जलाने पर मजबूर करता है। असली सवाल यह है कि वर्षों की दंडात्मक कार्रवाई और जागरूकता अभियान के बावजूद पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधन — जैसे हैप्पी सीडर या बायोडीकंपोज़र — किसानों तक किफायती दर पर क्यों नहीं पहुँच पा रहे। जब तक नीति की धुरी सज़ा से हटकर व्यावहारिक सहयोग की ओर नहीं जाती, यह वार्षिक चक्र — घटनाएँ, जुर्माना, नोटिस और फिर वही हवा — जारी रहेगा।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पराली जलाने की अब तक कितनी घटनाएँ दर्ज हुई हैं?
CAQMS और राज्य प्रशासन की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, 26 सितंबर 2026 तक पंजाब में पराली जलाने की कुल 40 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें 28 खेतों का भौतिक निरीक्षण हुआ और 12 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई।
पराली जलाने पर पंजाब में क्या जुर्माना है?
उल्लंघन करने वाले किसानों पर पर्यावरण मुआवज़े (EC) के रूप में जुर्माना लगाया जाता है। इस बार 8 मामलों में कुल ₹40,000 का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें फिरोजपुर पर ₹15,000 सबसे अधिक है। इसके अलावा, गंभीर मामलों में BNS धारा 223 के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है।
पराली जलाने पर 'रेड एंट्री' क्या होती है?
'रेड एंट्री' राजस्व रिकॉर्ड में भूमि के दस्तावेज़ों पर दर्ज उल्लंघन का स्थायी नोट होती है। इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं और कृषि सुविधाओं का लाभ मिलने में बाधा आ सकती है। इस बार 5 मामलों में रेड एंट्री दर्ज की गई है।
पराली जलाने से क्या नुकसान होता है?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है, गंभीर वायु प्रदूषण फैलता है और मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। यह दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में सर्दियों के वायु प्रदूषण संकट का एक प्रमुख कारण माना जाता है।
किस जिले में पराली जलाने के सबसे अधिक मामले हैं?
अमृतसर जिले में सबसे अधिक 21 मामले दर्ज हुए हैं, हालाँकि 14 खेतों के भौतिक सत्यापन में केवल 4 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई। इसके बाद तरनतारन (6) और फिरोजपुर (5) का स्थान है।
राष्ट्र प्रेस
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