23 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब में पराली जलाने की 510 घटनाएँ दर्ज, 184 मामलों में ₹9.30 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब में पराली जलाने की 510 घटनाएँ दर्ज, 184 मामलों में ₹9.30 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना

सारांश

पंजाब में पराली जलाने का सीज़न एक बार फिर निगरानी की परीक्षा ले रहा है। PPCB के अनुसार 510 घटनाएँ दर्ज, ₹9.30 लाख जुर्माना — लेकिन वसूली अभी आधी भी नहीं। तरनतारन और अमृतसर सबसे अधिक प्रभावित, जबकि अधिकारियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई अभी बाकी।

मुख्य बातें

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की 22 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट में राज्यभर में पराली जलाने की 510 घटनाएँ दर्ज।
467 मामलों का भौतिक निरीक्षण; 184 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़ा (EC) लगाया गया।
कुल ₹9.30 लाख का जुर्माना, जिसमें से अब तक ₹4.93 लाख की वसूली।
तरनतारन ( 247 घटनाएँ ) और अमृतसर ( 136 घटनाएँ ) सर्वाधिक प्रभावित जिले।
227 नोडल/सुपरवाइज़री अधिकारियों को चेतावनी नोटिस; 4 FIR दर्ज; 166 रेड एंट्री रिकॉर्ड।
किसी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय चार्जशीट या निलंबन के आदेश जारी नहीं।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की 22 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में धान की पराली जलाने की कुल 510 घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिनमें से 467 मामलों का भौतिक निरीक्षण किया जा चुका है और 184 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़ा (Environmental Compensation) लगाया गया है। प्रशासन ने अब तक कुल ₹9.30 लाख का जुर्माना लगाया है, जिसमें से ₹4.93 लाख की वसूली हो चुकी है।

राज्यव्यापी कार्रवाई का ब्यौरा

रिपोर्ट में 195 स्थानों की पहचान की गई है, जहाँ पराली जलाने की घटनाओं की पुष्टि हुई। इसके अतिरिक्त, 4 मामलों में नोडल अधिकारियों या संबंधित कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय चार्जशीट या निलंबन के आदेश जारी नहीं किए गए हैं।

227 नोडल और सुपरवाइज़री अधिकारियों को चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, 4 मामलों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है और 166 रेड एंट्री रिकॉर्ड की गई हैं।

जिलावार घटनाओं का विवरण

तरनतारन जिला 247 घटनाओं के साथ सर्वाधिक प्रभावित है — यहाँ 229 मामलों का निरीक्षण हुआ और 97 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया। अमृतसर में 136 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिनमें 127 का निरीक्षण हुआ और 51 मामलों में जुर्माना लगाया गया।

गुरदासपुर में 32, फिरोज़पुर में 26, कपूरथला में 18, और फ़ाज़िल्का व जालंधर में 9-9 घटनाएँ दर्ज की गईं। पटियाला में 5 घटनाएँ सामने आईं, जिनमें 4 का निरीक्षण हुआ और 3 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया। उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट में जिलेवार आँकड़ों का योग राज्य के कुल आँकड़े से भिन्न दिखाई देता है, इसलिए इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

वसूली और निगरानी की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार लगाए गए ₹9.30 लाख के जुर्माने में से केवल ₹4.93 लाख — यानी लगभग 53% — की ही वसूली हो सकी है। यह अनुपात यह संकेत देता है कि जुर्माना-प्रक्रिया की प्रभावशीलता को और सुदृढ़ किए जाने की ज़रूरत है। गौरतलब है कि पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार वर्षों से वैकल्पिक प्रबंधन तकनीकों और सब्सिडी का सहारा लेती आई है, फिर भी हर फसल सीज़न में नई घटनाएँ सामने आती हैं।

व्यापक संदर्भ और असर

पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएँ प्रतिवर्ष अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) राज्यों पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि जुर्माना-आधारित दृष्टिकोण तब तक पर्याप्त नहीं होगा, जब तक किसानों को पराली प्रबंधन के किफ़ायती विकल्प बड़े पैमाने पर उपलब्ध न कराए जाएँ।

आने वाले दिनों में PPCB की निगरानी जारी रहेगी और वसूली के आँकड़ों में बदलाव की संभावना है — नई रिपोर्टें इस सीज़न की कुल स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जुर्माना, नोटिस — फिर भी अगले सीज़न में स्थिति जस की तस। जब तक किसानों को पराली प्रबंधन की सस्ती और सुलभ तकनीक बड़े पैमाने पर नहीं मिलती, दंडात्मक उपाय केवल आँकड़ों की कसरत बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पराली जलाने की कितनी घटनाएँ दर्ज हुई हैं?
PPCB की 22 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पराली जलाने की कुल 510 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें से 467 मामलों का भौतिक निरीक्षण किया जा चुका है।
पराली जलाने पर पंजाब में कितना पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है?
184 मामलों में कुल ₹9.30 लाख का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया है, जिसमें से ₹4.93 लाख की वसूली हो चुकी है। शेष राशि की वसूली प्रक्रिया जारी है।
पराली जलाने के सबसे अधिक मामले किस जिले में दर्ज हुए?
तरनतारन जिले में सर्वाधिक 247 घटनाएँ दर्ज हुई हैं, उसके बाद अमृतसर में 136 घटनाएँ हैं। दोनों जिले मिलकर राज्य की कुल घटनाओं के बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।
पराली जलाने पर अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई है?
227 नोडल और सुपरवाइज़री अधिकारियों को चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं और 166 रेड एंट्री दर्ज की गई हैं। हालाँकि रिपोर्ट के अनुसार अब तक किसी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय चार्जशीट या निलंबन के आदेश जारी नहीं किए गए हैं।
पराली जलाना दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करता है?
पंजाब और हरियाणा में अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से निकलने वाला धुआँ दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय योगदान करता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे पर राज्यों पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 4 सप्ताह पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले