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पंजाब में पराली जलाने के 404 मामले दर्ज, तरनतारन-अमृतसर सबसे आगे; ₹3.40 लाख वसूली

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पंजाब में पराली जलाने के 404 मामले दर्ज, तरनतारन-अमृतसर सबसे आगे; ₹3.40 लाख वसूली

सारांश

पंजाब में पराली जलाने के 404 मामले, ₹3.40 लाख वसूली और 39 एफआईआर — लेकिन तरनतारन में अकेले 198 घटनाएं बता रही हैं कि अभियान अभी पूरे असर में नहीं। CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड 30 नवंबर तक मैदान में हैं।

मुख्य बातें

PPCB की 20 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट में पंजाब में पराली जलाने की 404 घटनाएं दर्ज, 151 स्थानों पर पुष्टि।
तरनतारन में सर्वाधिक 198 और अमृतसर में 117 घटनाएं — ये दो ज़िले सबसे अधिक प्रभावित।
राज्यभर में ₹7.20 लाख पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, ₹3.40 लाख की वसूली हो चुकी है।
39 एफआईआर दर्ज, 106 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री, 152 चेतावनी नोटिस जारी।
CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड 18 प्रमुख धान उत्पादक ज़िलों में 30 नवंबर 2026 तक तैनात।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की 20 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में धान की पराली जलाने की कुल 404 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 358 खेतों का निरीक्षण पूरा हो चुका है और 151 स्थानों पर पराली जलाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। प्रशासन ने अब तक ₹7.20 लाख का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है, जिसमें से ₹3.40 लाख की वसूली की जा चुकी है।

ज़िलावार स्थिति: तरनतारन और अमृतसर सबसे प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, तरनतारन में सर्वाधिक 198 घटनाएं दर्ज हुई हैं। वहाँ 176 खेतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 75 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। अमृतसर में 117 घटनाएं सामने आईं — 111 खेतों के निरीक्षण में 42 मामलों में पराली जलाने की पुष्टि की गई।

अन्य ज़िलों में गुरदासपुर में 23, कपूरथला में 16, फिरोजपुर में 14, जालंधर में 5 और पटियाला में 4 घटनाएं दर्ज की गई हैं। पटियाला में 3 खेतों का निरीक्षण हुआ, 2 स्थानों पर पुष्टि हुई और ₹10,000 का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है।

कानूनी कार्रवाई: एफआईआर, रेड एंट्री और नोटिस

PPCB की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यभर में पराली जलाने के मामलों में 39 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 106 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और 152 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं। यह बहुआयामी कार्रवाई पिछले वर्षों की तुलना में अधिक संरचित दिखती है, हालाँकि आलोचकों का कहना है कि वास्तविक निरोध के लिए जुर्माने की राशि अभी भी बहुत कम है।

फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती: 30 नवंबर तक निगरानी

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब में 'फ्लाइंग स्क्वॉड' (उड़न दस्ते) तैनात किए हैं, जो 30 नवंबर 2026 तक फील्ड स्तर पर निरंतर निगरानी करेंगे। यह तैनाती अलग-अलग चरणों में की गई है ताकि धान कटाई के पूरे मौसम में प्रभावी नज़र रखी जा सके।

जिलेवार तैनाती में पंजाब के प्रमुख धान उत्पादक ज़िले शामिल हैं — संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मनसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मालेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत के कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँचने की आशंका जताई जा रही है। पराली का धुआँ दिल्ली-NCR सहित आसपास के राज्यों की वायु गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष अक्टूबर-नवंबर में यह समस्या विकराल रूप लेती है और यह अभियान उसी के मद्देनज़र चलाया जा रहा है।

CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड की कार्यकुशलता और ज़मीनी नतीजे आने वाले हफ्तों में इस अभियान की असली परीक्षा होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर जब तक पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधन — जैसे सुपर सीडर और बायोमास संयंत्र — किसानों की पहुँच में नहीं आते, हर साल यही चक्र दोहराता रहेगा। आँकड़े बताते हैं, असली सवाल नीयत का नहीं, क्रियान्वयन और किसान-समर्थन ढाँचे का है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पराली जलाने की कुल कितनी घटनाएं दर्ज हुई हैं?
PPCB की 20 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में पराली जलाने की कुल 404 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 358 खेतों का निरीक्षण हो चुका है और 151 स्थानों पर पुष्टि हुई है।
किस ज़िले में पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं हैं?
तरनतारन में 198 घटनाओं के साथ यह राज्य में सबसे अधिक प्रभावित ज़िला है। अमृतसर दूसरे स्थान पर है, जहाँ 117 घटनाएं दर्ज हुई हैं।
पराली जलाने पर कितना जुर्माना लगाया गया और कितनी वसूली हुई?
राज्यभर में अब तक ₹7.20 लाख का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है, जिसमें से ₹3.40 लाख की वसूली हो चुकी है। इसके अलावा 39 एफआईआर दर्ज और 152 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड क्या हैं और ये कब तक तैनात रहेंगे?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब के 18 प्रमुख धान उत्पादक ज़िलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। ये दल 30 नवंबर 2026 तक फील्ड स्तर पर निगरानी करेंगे।
पराली जलाने से आम जनता को क्या नुकसान होता है?
पराली का धुआँ वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को खतरनाक स्तर पर पहुँचाता है, जो श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसका असर पंजाब के अलावा दिल्ली-NCR और पड़ोसी राज्यों पर भी पड़ता है, खासकर अक्टूबर-नवंबर में।
राष्ट्र प्रेस
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