पंजाब में पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई: 84 मामले दर्ज, ₹1.40 लाख जुर्माना, अमृतसर सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब में धान की पराली जलाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की 5 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पराली जलाने की कुल 84 घटनाएँ सामने आई हैं, जिनमें से 30 मामलों में खेतों में आग की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने 28 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़े के तौर पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया है।
मुख्य घटनाक्रम
78 खेतों का भौतिक निरीक्षण किया गया, जिसमें से 30 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। अब तक ₹55,000 की वसूली हो चुकी है। इसके अतिरिक्त 13 किसानों के फ़ार्म रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की गई है और 1 एफआईआर भी दायर की गई है। नोडल एवं पर्यवेक्षी अधिकारियों ने 36 स्थानों पर चेतावनी और शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं।
जिलेवार आँकड़े
अमृतसर जिला सर्वाधिक प्रभावित है, जहाँ 49 घटनाएँ दर्ज हुई हैं। यहाँ 45 खेतों की जाँच की गई और 13 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। 11 मामलों में ₹55,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से ₹35,000 वसूल हो चुके हैं। जिले में 32 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं।
तरनतारन में 18 घटनाएँ रिपोर्ट हुईं। 16 खेतों का निरीक्षण हुआ और 9 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। यहाँ ₹45,000 का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से ₹10,000 वसूले गए हैं। 9 मामलों में रेड एंट्री भी की गई है।
फिरोजपुर में 5 घटनाएँ सामने आईं। सभी 5 खेतों की जाँच में पराली जलाने की पुष्टि हुई और ₹25,000 का मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से ₹5,000 वसूले गए। 4 रेड एंट्री भी दर्ज हुई हैं।
पटियाला में 2 मामले दर्ज हुए। दोनों खेतों में पराली जलाने की पुष्टि हुई और कुल ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया है, हालाँकि अभी तक कोई वसूली नहीं हुई। पटियाला में 1 एफआईआर भी दर्ज की गई है।
पराली जलाने का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है। गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएँ प्रत्येक अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। CAQM की निगरानी और जुर्माने की यह प्रक्रिया पिछले वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत शुरुआती चरण में सख्त कदम उठाने का संकेत देती है।
आम जनता और किसानों पर असर
पर्यावरणीय मुआवज़े की प्रणाली के तहत छोटे किसानों पर प्रति घटना ₹2,500 से ₹15,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। फ़ार्म रिकॉर्ड में रेड एंट्री किसानों के भविष्य के सरकारी लाभों को प्रभावित कर सकती है। आलोचकों का कहना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है — किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराना भी उतना ही ज़रूरी है।
आगे क्या होगा
CAQM की निगरानी अक्टूबर-नवंबर के पूरे धान कटाई सीज़न में जारी रहेगी। प्रशासन की यह कार्रवाई आने वाले हफ्तों में और तेज़ होने की संभावना है क्योंकि राज्यभर में धान की कटाई अपने चरम पर पहुँचेगी।