पंजाब में पराली जलाने के 2,196 मामले दर्ज, ₹32.05 लाख जुर्माना; तरनतारन सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की 3 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने की कुल 2,196 घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि सरकार और प्रशासन की ओर से इन्हें रोकने के व्यापक प्रयास जारी हैं। 636 मामलों में पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है और कुल ₹32.05 लाख की राशि आरोपित की गई है, जिसमें से अब तक ₹20.60 लाख की वसूली हो चुकी है।
जिलेवार स्थिति: तरनतारन सबसे ऊपर
आँकड़ों के अनुसार सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएँ तरनतारन जिले में सामने आई हैं, जहाँ 545 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद फिरोजपुर में 305, अमृतसर में 198, संगरूर में 154 और बठिंडा में 148 घटनाएँ दर्ज हैं। गुरदासपुर में 108, फरीदकोट में 66 और फाजिल्का में 52 मामले सामने आए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुँचता है और पराली जलाने को इसकी एक प्रमुख वजह माना जाता है।
पटियाला जिले की स्थिति
पटियाला में 93 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। विभाग ने 39 खेतों का निरीक्षण किया, जिनमें 10 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। 7 मामलों में जुर्माना लगाया गया, जिसकी कुल राशि ₹40,000 थी — इनमें से ₹20,000 की वसूली हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, 9 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 10 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और 10 किसानों को चेतावनी नोटिस भेजे गए हैं।
राज्यव्यापी कार्रवाई का हिसाब
पीपीसीबी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य भर में अब तक 1,487 खेतों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिनमें 701 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है। 81 खेतों में अधिकारियों को पराली जलाने के निशान मिले हैं। राज्य में कुल 494 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 527 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है।
गौरतलब है कि 16 मामलों में अभियोजन कार्रवाई शुरू की गई है। रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि अब तक किसी भी नोडल या सुपरवाइजरी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट अथवा निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई है, हालाँकि लापरवाही के सिलसिले में 609 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
आम जनता और किसानों पर असर
पराली जलाने से उठने वाला धुआँ न केवल राज्य बल्कि पड़ोसी राज्यों और दिल्ली-एनसीआर तक की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है। आलोचकों का कहना है कि जुर्माने और एफआईआर के बावजूद यदि किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधन सुलभ और किफायती नहीं कराए गए, तो केवल罚 दंडात्मक कार्रवाई से स्थायी समाधान मुश्किल है।
आँकड़े बताते हैं कि वसूल हुई जुर्माना राशि, आरोपित कुल जुर्माने का लगभग 64 प्रतिशत है — जो बकाया वसूली में प्रशासनिक चुनौती को दर्शाता है। आगे की राह में किसानों की जागरूकता, वैकल्पिक फसल प्रबंधन और सख्त निगरानी तंत्र की भूमिका निर्णायक होगी।