मदरसों पर तस्लीमा नसरीन के बयान की मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने निंदा की, केंद्र से कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 4 अगस्त 2026 को बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन द्वारा मदरसों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर दिए गए बयानों की कड़ी निंदा की है। बोर्ड ने इन बयानों को भड़काऊ, भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए इन्हें भारत के आंतरिक मामलों में एक विदेशी नागरिक का अस्वीकार्य हस्तक्षेप करार दिया।
बोर्ड का आधिकारिक रुख
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि इस्लामी शिक्षण संस्थानों — मदरसों — पर कट्टरता फैलाने या जिहादी तैयार करने के आरोप 'पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण' हैं। उनके अनुसार, ऐसे आरोप देश के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास प्रतीत होते हैं।
डॉ. इलियास ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी को भी धार्मिक संस्थाओं को बदनाम करने या देश के आंतरिक विषयों में दखल देने की छूट नहीं दी जा सकती।
केंद्र सरकार से माँग
बोर्ड ने केंद्र सरकार से माँग की है कि ऐसे व्यक्तियों को कानून की सीमाओं में रहने के लिए बाध्य किया जाए और भविष्य में इस प्रकार के बयान न दोहराए जाएँ। डॉ. इलियास ने कहा कि यह 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है कि भारत में शरण लेकर रह रही एक विदेशी नागरिक देश के धार्मिक, संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी कर रही हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर चिंता
बोर्ड ने तस्लीमा नसरीन की बांग्लादेश संबंधी टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। डॉ. इलियास के अनुसार, ये बयान भारत की संतुलित विदेश नीति के अनुरूप नहीं हैं और इनसे भारत-बांग्लादेश संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बोर्ड ने सरकार से इस पहलू पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
मदरसों की भूमिका पर बोर्ड का पक्ष
बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि मदरसों को बदनाम करने का अभियान कोई नया नहीं है — पिछले कई दशकों से ऐसे आरोप लगते रहे हैं, परंतु आरोप लगाने वालों की ओर से कभी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। उनका दावा है कि देश की किसी भी जाँच या सुरक्षा एजेंसी ने अब तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है।
बोर्ड के अनुसार, देशभर के हज़ारों मदरसे बिना सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाले लाखों बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इन संस्थानों के अनेक छात्र न्यायपालिका, शिक्षा, पत्रकारिता, सिविल सेवा और सामाजिक कार्य जैसे क्षेत्रों में योगदान देते हैं।
आगे क्या होगा
बोर्ड ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रूप से तीन माँगें रखी हैं — कथित भड़काऊ बयानों का संज्ञान लेना, विदेशी शरणार्थियों को भारत के आंतरिक व धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप से रोकना, और देश के संवैधानिक व सामाजिक ढाँचे को किसी भी व्यक्ति की नफरत-आधारित राजनीति से बचाना। यह देखना बाकी है कि सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है।