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यासूब अब्बास: यूसीसी और मदरसा बंदी से बुनियादी मुद्दों से भटक रही जनता, चाहिए रोजगार-शिक्षा

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यासूब अब्बास: यूसीसी और मदरसा बंदी से बुनियादी मुद्दों से भटक रही जनता, चाहिए रोजगार-शिक्षा

सारांश

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना यासूब अब्बास ने एक साथ तीन विवादास्पद मुद्दों पर बोलते हुए कहा कि यूसीसी और मदरसा बंदी जैसे कदम रोजगार-शिक्षा की असली समस्याओं से ध्यान भटकाते हैं। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों के पूर्ण बहिष्कार की वकालत की।

मुख्य बातें

मौलाना यासूब अब्बास ने पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों की बंदी का विरोध किया और संबंधित पक्षों को अदालत जाने की सलाह दी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 21 भाजपा-शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने के बयान पर अब्बास ने कहा — रोजगार, शिक्षा और महंगाई से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
उन्होंने महिला एशिया कप में पाकिस्तानी अधिकारी मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी न लेने के भारतीय महिला क्रिकेट टीम के फैसले का समर्थन किया।
बीसीसीआई से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों पर पुनर्विचार और पूर्ण बहिष्कार की माँग की।
अब्बास ने कहा कि तीन तलाक, यूसीसी, एनआरसी और सीएए जैसे विषयों पर राजनीति के बजाय जनता बुनियादी मुद्दों पर जवाब चाहती है।

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने 14 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों को बंद करने के फैसले, 21 भाजपा-शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की योजना और महिला एशिया कप में ट्रॉफी विवाद — तीनों मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी जैसे विषयों को सामने लाया जा रहा है।

मदरसा बंदी पर सवाल

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान को बंद करने से पहले यह आकलन जरूरी है कि वहाँ कितने छात्र पढ़ रहे हैं और संस्था बंद होने से उनकी पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यदि कोई संस्था कानून के दायरे में रहकर शिक्षा प्रदान कर रही है और कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं हो रही, तो उसे केवल मान्यता के आधार पर बंद नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने 252 मदरसों को बंद करने के फैसले को शिक्षा के विस्तार की नीति के विरुद्ध बताया। अब्बास ने मदरसों के जिम्मेदार लोगों को अदालत का रुख करने की सलाह दी और न्यायिक राहत की उम्मीद जताई। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की गलत गतिविधि के आधार पर पूरे शिक्षण संस्थान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने हावर्ड यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि किसी छात्र की गतिविधि से पूरे संस्थान को बदनाम करना न्यायसंगत नहीं है।

यूसीसी पर आपत्ति

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 21 भाजपा-शासित राज्यों में लोकसभा चुनाव से पहले यूसीसी लागू करने संबंधी बयान पर मौलाना अब्बास ने कहा कि इस तरह की घोषणाओं से केवल एक समुदाय ही नहीं, बल्कि देश के अन्य क्षेत्रों के लोग भी असहमत हैं।

उन्होंने जोर दिया कि पेपर लीक, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाएँ और महंगाई जैसी समस्याओं का समाधान यूसीसी जैसे मुद्दों के जरिए नहीं किया जा सकता। अब्बास के अनुसार, पिछले कई वर्षों से तीन तलाक, यूसीसी, एनआरसी और सीएए जैसे विषयों पर राजनीति होती रही है, जबकि अब जनता रोजगार और शिक्षा जैसे बुनियादी सवालों पर जवाब माँग रही है। उन्होंने कहा कि 'जनता अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है।'

महिला एशिया कप ट्रॉफी विवाद

महिला एशिया कप फाइनल में श्रीलंका को हराकर चैंपियन बनी भारतीय टीम के पाकिस्तानी एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार पर अब्बास ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के रुख का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों में गंभीर मतभेद हैं, तो क्रिकेट संबंधों पर भी एकरूप नीति होनी चाहिए। अब्बास ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों पर पुनर्विचार करने की माँग की। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तानी अधिकारी के हाथों ट्रॉफी लेना स्वीकार नहीं है, तो पाकिस्तान के साथ मैच भी नहीं खेले जाने चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पुरुष टीम पहले भी इसी तरह ट्रॉफी न लेने का फैसला कर चुकी है।

आगे की राह

मौलाना अब्बास के बयान ऐसे समय में आए हैं जब देश में यूसीसी, मदरसा नियमन और भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों पर बहस तेज है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की नीति में स्पष्टता और एकरूपता जरूरी है। गौरतलब है कि मदरसा नियमन और यूसीसी को लेकर विभिन्न धार्मिक संगठन और विपक्षी दल भी अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराते रहे हैं। अब्बास ने स्पष्ट किया कि जनता की असली प्राथमिकताएँ सामाजिक-आर्थिक हैं, और उन्हीं पर नीति-निर्माण केंद्रित होना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यूसीसी और क्रिकेट कूटनीति। यह दिलचस्प है कि एक धार्मिक संगठन का नेता पाकिस्तान के साथ क्रिकेट बहिष्कार की वकालत कर रहा है, जो परंपरागत रूप से अल्पसंख्यक नेतृत्व की स्थिति से अलग है। यूसीसी को 'ध्यान भटकाने' की रणनीति बताना एक व्यापक विरोध-विमर्श का हिस्सा है, लेकिन 252 मदरसों की बंदी पर न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की उनकी सलाह व्यावहारिक और संयमित है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों को सांप्रदायिक कोण से देखती है — असली सवाल यह है कि मदरसा नियमन के लिए एक समान, पारदर्शी राष्ट्रीय मानक क्यों नहीं है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना यासूब अब्बास ने पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों की बंदी पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान को बंद करने से पहले छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने वाले असर का आकलन होना चाहिए। यदि संस्था कानून के दायरे में काम कर रही है, तो केवल मान्यता के आधार पर उसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मदरसों के जिम्मेदार लोगों को अदालत जाने की सलाह दी।
यूसीसी को लेकर मौलाना अब्बास की आपत्ति क्या है?
उनका कहना है कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी जैसे विषय सामने लाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन घोषणाओं से केवल एक नहीं, बल्कि देश के कई क्षेत्रों के लोग असहमत हैं।
महिला एशिया कप ट्रॉफी विवाद पर मौलाना अब्बास का क्या रुख है?
उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पाकिस्तानी अधिकारी मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी न लेने के फैसले का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि दोनों देशों के संबंध इतने खराब हैं, तो क्रिकेट नीति भी एकरूप होनी चाहिए — और पाकिस्तान के साथ मैच भी नहीं खेले जाने चाहिए।
मौलाना अब्बास ने बीसीसीआई से क्या माँग की?
उन्होंने बीसीसीआई से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों पर पुनर्विचार करने और पूर्ण बहिष्कार की नीति अपनाने की माँग की। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पुरुष टीम पहले ही इसी तरह ट्रॉफी न लेने का फैसला कर चुकी है।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड यूसीसी के मुद्दे पर क्यों सक्रिय है?
बोर्ड का मानना है कि यूसीसी व्यक्तिगत धार्मिक कानूनों को प्रभावित करता है और इसे लेकर विभिन्न समुदायों में असहमति है। जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार, तीन तलाक से लेकर सीएए तक इन विषयों पर वर्षों से राजनीति हो रही है, जबकि जनता की असली प्राथमिकताएँ सामाजिक-आर्थिक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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