यासूब अब्बास: यूसीसी और मदरसा बंदी से बुनियादी मुद्दों से भटक रही जनता, चाहिए रोजगार-शिक्षा
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने 14 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों को बंद करने के फैसले, 21 भाजपा-शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की योजना और महिला एशिया कप में ट्रॉफी विवाद — तीनों मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी जैसे विषयों को सामने लाया जा रहा है।
मदरसा बंदी पर सवाल
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान को बंद करने से पहले यह आकलन जरूरी है कि वहाँ कितने छात्र पढ़ रहे हैं और संस्था बंद होने से उनकी पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यदि कोई संस्था कानून के दायरे में रहकर शिक्षा प्रदान कर रही है और कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं हो रही, तो उसे केवल मान्यता के आधार पर बंद नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने 252 मदरसों को बंद करने के फैसले को शिक्षा के विस्तार की नीति के विरुद्ध बताया। अब्बास ने मदरसों के जिम्मेदार लोगों को अदालत का रुख करने की सलाह दी और न्यायिक राहत की उम्मीद जताई। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की गलत गतिविधि के आधार पर पूरे शिक्षण संस्थान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने हावर्ड यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि किसी छात्र की गतिविधि से पूरे संस्थान को बदनाम करना न्यायसंगत नहीं है।
यूसीसी पर आपत्ति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 21 भाजपा-शासित राज्यों में लोकसभा चुनाव से पहले यूसीसी लागू करने संबंधी बयान पर मौलाना अब्बास ने कहा कि इस तरह की घोषणाओं से केवल एक समुदाय ही नहीं, बल्कि देश के अन्य क्षेत्रों के लोग भी असहमत हैं।
उन्होंने जोर दिया कि पेपर लीक, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाएँ और महंगाई जैसी समस्याओं का समाधान यूसीसी जैसे मुद्दों के जरिए नहीं किया जा सकता। अब्बास के अनुसार, पिछले कई वर्षों से तीन तलाक, यूसीसी, एनआरसी और सीएए जैसे विषयों पर राजनीति होती रही है, जबकि अब जनता रोजगार और शिक्षा जैसे बुनियादी सवालों पर जवाब माँग रही है। उन्होंने कहा कि 'जनता अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है।'
महिला एशिया कप ट्रॉफी विवाद
महिला एशिया कप फाइनल में श्रीलंका को हराकर चैंपियन बनी भारतीय टीम के पाकिस्तानी एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार पर अब्बास ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के रुख का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों में गंभीर मतभेद हैं, तो क्रिकेट संबंधों पर भी एकरूप नीति होनी चाहिए। अब्बास ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों पर पुनर्विचार करने की माँग की। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तानी अधिकारी के हाथों ट्रॉफी लेना स्वीकार नहीं है, तो पाकिस्तान के साथ मैच भी नहीं खेले जाने चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पुरुष टीम पहले भी इसी तरह ट्रॉफी न लेने का फैसला कर चुकी है।
आगे की राह
मौलाना अब्बास के बयान ऐसे समय में आए हैं जब देश में यूसीसी, मदरसा नियमन और भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों पर बहस तेज है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की नीति में स्पष्टता और एकरूपता जरूरी है। गौरतलब है कि मदरसा नियमन और यूसीसी को लेकर विभिन्न धार्मिक संगठन और विपक्षी दल भी अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराते रहे हैं। अब्बास ने स्पष्ट किया कि जनता की असली प्राथमिकताएँ सामाजिक-आर्थिक हैं, और उन्हीं पर नीति-निर्माण केंद्रित होना चाहिए।