मदरसों में आधुनिक शिक्षा और राष्ट्रवाद जरूरी, यूसीसी पूरे देश में लागू हो: कारी अबरार जमाल
सारांश
मुख्य बातें
जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी अबरार जमाल ने 3 अगस्त को सहारनपुर में मदरसा शिक्षा सुधार, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को राष्ट्रव्यापी लागू करने और जंतर-मंतर विवाद सहित कई अहम मुद्दों पर अपना स्पष्ट पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक और रोज़गारपरक विषयों की पढ़ाई भी अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि वहाँ से निकलने वाले छात्र समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
मदरसा सुधार पर कारी जमाल का पक्ष
लेखिका तसलीमा नसरीन के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने मदरसों को बंद करने की वकालत की थी — कारी अबरार जमाल ने असहमति जताई और कहा कि मदरसों में आतंकवाद नहीं सिखाया जाता। हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि इन संस्थाओं में बदलाव की ज़रूरत है। उनके अनुसार उनकी संस्था वर्षों से यह माँग उठाती रही है कि मदरसों में हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत, जनरल नॉलेज और आधुनिक विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा 10 से 15 वर्षों तक मदरसे में पढ़ता है, तो उसे केवल आलिम, मुफ्ती या कारी बनकर नहीं निकलना चाहिए — बल्कि वह डॉक्टर, इंजीनियर, IAS या IPS अधिकारी भी बन सके, यह व्यवस्था होनी चाहिए। इससे मुस्लिम समाज के युवाओं को नई दिशा मिलेगी और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
राष्ट्रवाद और ऐतिहासिक योगदान
कारी जमाल ने कहा कि मदरसों में राष्ट्रगान की गूंज और देशभक्ति के पाठ शामिल होने चाहिए। उनका मानना है कि जिस दिन मदरसों से अशफाक उल्ला खाँ और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे देशभक्तों की प्रेरणा लेकर छात्र निकलेंगे, उस दिन देश की सेवा में उनकी भूमिका और व्यापक होगी।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने मदरसों को 'आतंकवाद की फैक्ट्री' कहा था — कारी जमाल ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि देश की आज़ादी में मदरसों और उलेमाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि अंग्रेज़ों के खिलाफ पहला फतवा मौलाना फज़ले हक खैराबादी ने जारी किया था और रेशमी रुमाल आंदोलन में भी मदरसों से जुड़े लोगों की सक्रिय भूमिका रही थी।
यूसीसी पर समर्थन और महिला अधिकारों की पैरवी
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर कारी अबरार जमाल ने स्पष्ट किया कि उनकी संस्था शुरू से इसके पक्ष में रही है। उन्होंने उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने का स्वागत किया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इसे शीघ्र लागू करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं के नाम पर कई बार अन्याय होता है। यूसीसी लागू होने से महिलाओं को इन समस्याओं से राहत मिलेगी और प्रत्येक नागरिक को कानून के समक्ष समान अधिकार प्राप्त होंगे।
जंतर-मंतर विवाद और लोकतांत्रिक मर्यादा
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले बच्चों के मामले पर कारी जमाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बच्चों को माफ करने का निर्णय 'बड़े दिल और लोकतांत्रिक सोच' का परिचायक है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन बच्चों ने प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया — हालाँकि बिना किसी ठोस साक्ष्य का उल्लेख किए — कि कुछ संगठन कथित तौर पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें विदेशों से फंडिंग मिल रही है।
संसद की गरिमा और विपक्ष से अपील
संसद की कार्यवाही बाधित होने के मुद्दे पर कारी जमाल ने विपक्ष से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद जनता के मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और लगातार हंगामे से लोकतंत्र कमज़ोर होता है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद और सहमति के साथ काम करें। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी।