यूपी मदरसा डिग्री पर रोक: NDA नेताओं ने कहा — बेहतर शिक्षा हो, आतंकी गतिविधियाँ नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों में कामिल (ग्रेजुएशन) और फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएशन) की डिग्री पर रोक लगाने के निर्णय पर लखनऊ में 4 अगस्त को सत्तापक्ष के मंत्रियों और विधायकों की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। एनडीए नेताओं का एकमत स्वर रहा — मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन किसी भी आतंकवादी गतिविधि के लिए इनका उपयोग स्वीकार्य नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
फिलहाल यूपी मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों में कामिल और फाजिल की डिग्रियाँ दी जाती हैं, जिन्हें क्रमशः ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के समकक्ष माना जाता है। कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद मदरसों की शैक्षणिक सीमा कक्षा 12 तक सीमित हो जाएगी। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुपालन में उठाया जा रहा है, जिसमें मदरसा बोर्ड को अपनी उच्च डिग्रियों को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध करने का निर्देश दिया गया था।
सरकार की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप ने कहा, 'मदरसों में बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए। उनसे आतंकवादी गतिविधियाँ नहीं होनी चाहिए और मदरसों के ज़रिए बच्चों के भविष्य को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। यह सरकार की ज़िम्मेदारी है और इसीलिए सरकार सुधारों के साथ आगे बढ़ रही है।'
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष एवं मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सरकार का नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए कैबिनेट में एक प्रस्ताव पेश किया जा रहा है। एक बार कैबिनेट में आने के बाद इसे लागू किया जाएगा।' राजभर ने आगे जोड़ा, 'अगर आप भारत सरकार से UGC की मंजूरी के बिना मदरसा चला रहे हैं और डिग्री जारी कर रहे हैं, तो उन डिग्रियों को नकली माना जाएगा। यह सभी मदरसों पर लागू होता है।'
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड को अपनी यूजी और पीजी डिग्री को किसी विश्वविद्यालय से जोड़ने का निर्देश दिया गया था। हमारा इरादा हमेशा मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए काम करना रहा है।'
विधायकों का समर्थन
मंत्री जेपीएस राठौर ने कहा, 'निश्चित रूप से मदरसों को आधुनिक शिक्षा का केंद्र बनना चाहिए, जहाँ छात्र समकालीन शिक्षा प्राप्त कर सकें और राज्य व देश के विकास में योगदान दे सकें।' भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राजेश चौधरी ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, 'जो शिक्षा व्यवस्था संवैधानिक है, वह बनी रहेगी और जिसकी ज़रूरत नहीं है, उसे खत्म कर देना चाहिए।'
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि यूपी में बड़ी संख्या में छात्र मदरसा बोर्ड से कामिल और फाजिल की डिग्री लेकर उच्च शिक्षा या रोज़गार की राह पर थे। प्रस्तावित बदलाव के बाद इन छात्रों को अपनी उच्च शिक्षा के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध कार्यक्रम में दाखिला लेना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मदरसा शिक्षा सुधार पर व्यापक बहस जारी है।
क्या होगा आगे
कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पास होने के बाद नई व्यवस्था लागू होगी। इसके तहत मदरसों को अपने उच्च शिक्षा कार्यक्रमों को UGC-मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से संबद्ध करना होगा अथवा उन्हें बंद करना होगा। सरकार के अनुसार, यह कदम मदरसा छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में उठाया गया है।