4 अगस्त 2026
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मदरसा डिग्री विवाद: सपा का तीखा हमला — 'सरकार चाहती है लोग राशन की कतार में खड़े रहें, सोचें नहीं'

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मदरसा डिग्री विवाद: सपा का तीखा हमला — 'सरकार चाहती है लोग राशन की कतार में खड़े रहें, सोचें नहीं'

सारांश

UP सरकार के मदरसा डिग्री रोक प्रस्ताव और डिप्टी सीएम के विवादित बयान पर सपा ने तीखा पलटवार किया। विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा को कुचलकर लोगों को 'पाँच किलो राशन की कतार' तक सीमित रखना चाहती है — और यह सब चुनावी एजेंडे की आड़ में हो रहा है।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मदरसे से पढ़े लोगों को आतंकवादी सोच का बताया — सपा ने इसे 'चुनावी एजेंडा' करार दिया।
UP सरकार ने मदरसों में कामिल और फाजिल डिग्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है।
सपा विधायक जाहिद बेग ने कहा — सरकार चाहती है लोग पाँच किलो राशन के लिए कतार में खड़े रहें, आगे न सोचें।
सपा विधायक अतुल प्रधान ने जौहर यूनिवर्सिटी के 3,500 छात्रों का हवाला देते हुए सरकार पर शिक्षा-विरोधी होने का आरोप लगाया।
सपा के डिप्टी चीफ व्हिप आर.के.
वर्मा ने UP के चार अपंजीकृत विश्वविद्यालयों पर भी कार्रवाई की माँग की।

उत्तर प्रदेश सरकार के मदरसों में कामिल (स्नातक) और फाजिल (स्नातकोत्तर) की डिग्री पर रोक लगाने के प्रस्ताव और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान के विरोध में — जिसमें उन्होंने मदरसे से शिक्षा प्राप्त करने वालों को आतंकवादी सोच का बताया — समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने 4 अगस्त को लखनऊ में तीखी प्रतिक्रिया दी। सपा विधायकों ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार शिक्षा को कुचलने और समाज को बाँटने की राजनीति कर रही है।

मदरसों का ऐतिहासिक योगदान

सपा विधायक मो. हसन रूमी ने उपमुख्यमंत्री के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'इन लोगों को इतिहास की जानकारी नहीं है। मदरसों से ही स्वतंत्रता सेनानी निकले। हर धर्म के स्वतंत्रता सेनानियों ने मदरसों में शिक्षा पाई और देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। देवबंद के दारुल उलूम से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों ने आवाज उठाई और रेशमी रूमाल आंदोलन शुरू किया।'

रूमी ने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री का बयान पाकिस्तान और बांग्लादेश पर लागू हो सकता है, भारत पर नहीं, और इसे चुनावी एजेंडे से प्रेरित बताया।

शिक्षा पर हमले का आरोप

सपा विधायक जाहिद बेग ने कामिल-फाजिल डिग्री पर रोक के प्रस्ताव को व्यापक शिक्षा-विरोधी नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, 'यह सरकार हर शिक्षण संस्थान को बंद करना चाहती है, चाहे उसका नाम कुछ भी हो। चाहे कामिल-फाजिल का मुद्दा हो, यूनिवर्सिटी का मुद्दा हो या इलाहाबाद में फीस घोटाले का। यह सरकार नहीं चाहती कि छात्र पढ़ाई करें। वह चाहती है कि लोग पाँच किलो राशन के लिए कतारों में खड़े रहें, ताकि उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों से आगे सोचने का मौका न मिले।'

जौहर यूनिवर्सिटी और संविधान का मुद्दा

सपा विधायक अतुल प्रधान ने जौहर यूनिवर्सिटी का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ 3,500 छात्र अध्ययनरत हैं, फिर भी जिलाधिकारी ने उसे गिराने का आदेश जारी किया था। प्रधान ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल धर्म और जाति के आधार पर समाज को बाँटना चाहता है, आरक्षण समाप्त करना चाहता है और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संविधान को कमज़ोर करना चाहता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की भाषा प्रतिदिन बदल रही है, जो इस बात का संकेत है कि राज्य और देश की जनता BJP के विरुद्ध है।

फर्जी डिग्री संस्थानों पर भी उठे सवाल

सपा के डिप्टी चीफ व्हिप आर.के. वर्मा ने एक अलग कोण से मुद्दा उठाते हुए कहा कि फर्जी डिग्रियाँ देने वाले सभी संस्थानों को बंद किया जाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में चार ऐसे विश्वविद्यालय हैं जो बिना उचित पंजीकरण और कानूनी मान्यता के संचालित हो रहे हैं। वर्मा ने माँग की कि इन संस्थानों की डिग्रियाँ अमान्य घोषित की जाएँ और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल गर्मा रहा है। गौरतलब है कि मदरसा शिक्षा को लेकर केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर नीतिगत बहस जारी है। सपा का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में शिक्षा नीति और अल्पसंख्यक अधिकार प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक वास्तविक नीतिगत सवाल उठाता है — क्या उच्च शिक्षा के अवसर संकुचित किए जा रहे हैं? मदरसा शिक्षा सुधार एक जायज़ बहस है, लेकिन 'आतंकवादी सोच' जैसे शब्द उस बहस को तथ्य से हटाकर भावना की ओर ले जाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करती है कि जो सरकार फर्जी डिग्री संस्थानों पर चुप है, वह मदरसा डिग्री पर सबसे पहले कार्रवाई कर रही है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UP सरकार का कामिल और फाजिल डिग्री पर रोक का प्रस्ताव क्या है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसों में दी जाने वाली कामिल (स्नातक) और फाजिल (स्नातकोत्तर) डिग्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को राष्ट्रीय मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली के अनुरूप बनाना बताया जा रहा है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मदरसों पर क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कथित तौर पर कहा कि मदरसे से शिक्षा प्राप्त करने वालों में आतंकवादी सोच होती है। इस बयान की सपा सहित कई विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की है।
सपा ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
समाजवादी पार्टी के कई विधायकों ने 4 अगस्त को लखनऊ में प्रेस के सामने सरकार पर हमला बोला। विधायक जाहिद बेग ने कहा कि सरकार चाहती है लोग पाँच किलो राशन की कतार में खड़े रहें और आगे न सोचें, जबकि मो. हसन रूमी ने मदरसों के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का हवाला दिया।
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद क्या है?
सपा विधायक अतुल प्रधान के अनुसार जौहर यूनिवर्सिटी में 3,500 छात्र पढ़ रहे हैं, लेकिन जिलाधिकारी ने इसे गिराने का आदेश जारी किया था। सपा ने इसे सरकार की शिक्षा-विरोधी नीति का प्रमाण बताया है।
सपा ने किन अन्य संस्थानों पर कार्रवाई की माँग की?
सपा के डिप्टी चीफ व्हिप आर.के. वर्मा ने उत्तर प्रदेश के चार ऐसे विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई की माँग की जो बिना उचित पंजीकरण और कानूनी मान्यता के संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की डिग्रियाँ भी अमान्य घोषित की जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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