उत्तराखंड में मदरसों पर कार्रवाई: रुद्रपुर में मौलाना मुफ्ती मुजीब का मदरसा सील, 60 ने अभी तक नहीं किया आवेदन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के रुद्रपुर में जिला प्रशासन ने 31 अगस्त को मौलाना मुफ्ती मुजीब के मदरसे पर ताला जड़ दिया। प्रशासन के अनुसार, यह मदरसा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की अनिवार्य मान्यता के बिना संचालित हो रहा था। मुफ्ती मुजीब वही धर्मगुरु हैं जिन्होंने कथित तौर पर त्रिशूल चौक पर धामी सरकार की मदरसा नीति के विरोध में आपत्तिजनक बयान दिए थे।
मुख्य घटनाक्रम
उधम सिंह नगर जिले में प्रशासन की कार्रवाई तेज़ हो गई है। जिला प्रशासन के मुताबिक, जिले में कुल 118 मदरसे संचालित हैं। इनमें से 5 मदरसे पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि करीब 60 मदरसों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। शेष मदरसों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं, जिनकी जाँच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
इसी क्रम में मदरसा जामियातुल हसनात — जो जाहिद रजा का बताया जाता है — को भी सील किया गया है। प्रशासन ने बताया कि इस संस्थान के पास भी मान्यता के आवश्यक दस्तावेज़ नहीं थे।
नई नियामक व्यवस्था क्या है
उत्तराखंड सरकार ने पूर्ववर्ती मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। अब प्रदेश के सभी मदरसों को इस प्राधिकरण के साथ-साथ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी मान्यता लेना अनिवार्य है। गौरतलब है कि इस बदलाव के बाद से ही कुछ मौलाना और मुस्लिम धर्मगुरु सरकार की इस व्यवस्था के विरोध में एकजुट हुए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि पहले मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत थे। अब तक करीब 200 मदरसों के आवेदन विभाग को प्राप्त हो चुके हैं और इन संस्थानों का स्पॉट सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो मदरसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं लेंगे, उनके विरुद्ध बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई अवसरों पर स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में प्रत्येक संस्थान को कानून और नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि 'देवभूमि' में कट्टरपंथी सोच के लिए कोई स्थान नहीं है और संबंधित मामले में आरोपी मौलवी को जेल भेजा जा चुका है।
आम जनता और अल्पसंख्यक समुदाय पर असर
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। जिन 60 मदरसों ने आवेदन नहीं किया है, उनमें पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग का कहना है कि मान्यता प्रक्रिया जटिल है और समय-सीमा बहुत कम दी गई है।
क्या होगा आगे
प्रशासन 200 से अधिक आवेदनों के आधार पर स्पॉट सर्वे की प्रक्रिया जारी रखेगा। जो मदरसे मान्यता की शर्तें पूरी करेंगे, उन्हें संचालन की अनुमति मिलेगी, जबकि शेष के विरुद्ध कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि 452 में से कितने मदरसे नई व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त कर पाते हैं।