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उत्तराखंड में मदरसों पर कार्रवाई: रुद्रपुर में मौलाना मुफ्ती मुजीब का मदरसा सील, 60 ने अभी तक नहीं किया आवेदन

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उत्तराखंड में मदरसों पर कार्रवाई: रुद्रपुर में मौलाना मुफ्ती मुजीब का मदरसा सील, 60 ने अभी तक नहीं किया आवेदन

सारांश

उत्तराखंड में मदरसों पर सरकारी शिकंजा कसता जा रहा है — रुद्रपुर में मुफ्ती मुजीब का मदरसा सील हुआ, उधम सिंह नगर के 60 मदरसों ने आवेदन तक नहीं किया। 452 पंजीकृत मदरसों में से केवल 200 ने नई मान्यता प्रक्रिया शुरू की है। धामी सरकार की यह कार्रवाई राज्य में मदरसा शिक्षा के भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

मुख्य बातें

मौलाना मुफ्ती मुजीब का मदरसा 31 अगस्त को रुद्रपुर में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता न होने पर सील किया गया।
मदरसा जामियातुल हसनात ( जाहिद रजा ) को भी आवश्यक दस्तावेज़ न होने पर सील किया गया।
उधम सिंह नगर के 118 मदरसों में से 60 ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया; 5 पहले ही बंद।
प्रदेश में पहले 452 मदरसे पंजीकृत थे; अब तक केवल करीब 200 के आवेदन प्राप्त हुए हैं।
अल्पसंख्यक विभाग सचिव डॉ.
पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट किया — मान्यता न लेने वाले मदरसे बंद किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा — देवभूमि में कट्टरपंथी सोच के लिए कोई जगह नहीं।

उत्तराखंड के रुद्रपुर में जिला प्रशासन ने 31 अगस्त को मौलाना मुफ्ती मुजीब के मदरसे पर ताला जड़ दिया। प्रशासन के अनुसार, यह मदरसा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की अनिवार्य मान्यता के बिना संचालित हो रहा था। मुफ्ती मुजीब वही धर्मगुरु हैं जिन्होंने कथित तौर पर त्रिशूल चौक पर धामी सरकार की मदरसा नीति के विरोध में आपत्तिजनक बयान दिए थे।

मुख्य घटनाक्रम

उधम सिंह नगर जिले में प्रशासन की कार्रवाई तेज़ हो गई है। जिला प्रशासन के मुताबिक, जिले में कुल 118 मदरसे संचालित हैं। इनमें से 5 मदरसे पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि करीब 60 मदरसों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। शेष मदरसों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं, जिनकी जाँच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

इसी क्रम में मदरसा जामियातुल हसनात — जो जाहिद रजा का बताया जाता है — को भी सील किया गया है। प्रशासन ने बताया कि इस संस्थान के पास भी मान्यता के आवश्यक दस्तावेज़ नहीं थे।

नई नियामक व्यवस्था क्या है

उत्तराखंड सरकार ने पूर्ववर्ती मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। अब प्रदेश के सभी मदरसों को इस प्राधिकरण के साथ-साथ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी मान्यता लेना अनिवार्य है। गौरतलब है कि इस बदलाव के बाद से ही कुछ मौलाना और मुस्लिम धर्मगुरु सरकार की इस व्यवस्था के विरोध में एकजुट हुए हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि पहले मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत थे। अब तक करीब 200 मदरसों के आवेदन विभाग को प्राप्त हो चुके हैं और इन संस्थानों का स्पॉट सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो मदरसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं लेंगे, उनके विरुद्ध बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई अवसरों पर स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में प्रत्येक संस्थान को कानून और नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि 'देवभूमि' में कट्टरपंथी सोच के लिए कोई स्थान नहीं है और संबंधित मामले में आरोपी मौलवी को जेल भेजा जा चुका है।

आम जनता और अल्पसंख्यक समुदाय पर असर

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। जिन 60 मदरसों ने आवेदन नहीं किया है, उनमें पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग का कहना है कि मान्यता प्रक्रिया जटिल है और समय-सीमा बहुत कम दी गई है।

क्या होगा आगे

प्रशासन 200 से अधिक आवेदनों के आधार पर स्पॉट सर्वे की प्रक्रिया जारी रखेगा। जो मदरसे मान्यता की शर्तें पूरी करेंगे, उन्हें संचालन की अनुमति मिलेगी, जबकि शेष के विरुद्ध कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि 452 में से कितने मदरसे नई व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त कर पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक संदेश भी है — विशेषकर तब जब मुफ्ती मुजीब जैसे धर्मगुरु सार्वजनिक मंच पर सरकार को चुनौती दे चुके हों। लेकिन असली सवाल यह है कि 452 में से केवल 200 आवेदन आना क्या दर्शाता है — अनुपालन की इच्छाशक्ति की कमी, या प्रक्रिया की जटिलता? जिन 60 मदरसों ने आवेदन तक नहीं किया, उनमें पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा का क्या होगा, यह सरकार की जवाबदेही का अनुत्तरित पहलू है। मान्यता अनिवार्य करना उचित है, किंतु बिना पर्याप्त संक्रमण-काल और स्पष्ट दिशानिर्देशों के यह कार्रवाई शिक्षा से वंचित करने का ज़रिया न बन जाए — यह सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुद्रपुर में मौलाना मुफ्ती मुजीब का मदरसा क्यों सील किया गया?
जिला प्रशासन के अनुसार, मदरसा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की अनिवार्य मान्यता के बिना संचालित हो रहा था। उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड समाप्त कर नई मान्यता प्रणाली लागू की है, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई।
उत्तराखंड में मदरसों के लिए नई मान्यता प्रक्रिया क्या है?
राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया है। अब सभी मदरसों को इस प्राधिकरण और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड दोनों से मान्यता लेना अनिवार्य है। बिना मान्यता के संचालित मदरसों को सील किया जा रहा है।
उधम सिंह नगर में कितने मदरसों पर कार्रवाई हो सकती है?
जिले के 118 मदरसों में से 5 पहले ही बंद हो चुके हैं और करीब 60 ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। प्रशासन के अनुसार, आवेदन न करने वाले मदरसों के विरुद्ध बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश में कुल कितने मदरसे पंजीकृत थे और अब तक कितनों ने आवेदन किया?
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, पहले मदरसा बोर्ड के तहत 452 मदरसे पंजीकृत थे। अब तक करीब 200 मदरसों के आवेदन विभाग को मिले हैं और उनका स्पॉट सर्वे कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने मदरसा नीति पर क्या कहा है?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में हर संस्थान को कानून और नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि में कट्टरपंथी सोच के लिए कोई स्थान नहीं है और आरोपी मौलवी को जेल भेजा जा चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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